{"_id":"5e55869c8ebc3ef3a254975c","slug":"pollution-city-news-mbd341246391","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व भर के प्रदूषित शहरों में मुरादाबाद का भी 21वां स्थान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व भर के प्रदूषित शहरों में मुरादाबाद का भी 21वां स्थान
Wed, 26 Feb 2020 04:13 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Feb 2020 04:13 AM IST
विज्ञापन
मुरादाबाद
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद पीतल कारोबार में ही नहीं प्रदूषण की वजह से भी दुनिया में जाना जा रहा है। एनजीटी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के बावजूद देश के टॉप टेन प्रदूषित शहरों में स्थान बनाता है। उधर विश्व भर के सबसे प्रदूषित शहरों में 21 भारत के हैं जिनमें मुरादाबाद का 21 वां स्थान आया है। यानी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और यहां की वायु दिन ब दिन प्रदूषित होती जा रही है।
विज्ञापन
मुरादाबाद में अवैध पीतल भट्टियाें ने यह हालत खराब की है। यहां काफी अवैध भट्ठियां संचालित होने के साथ ई कचरा जलाया जा रहा है। कई गोदाम यहां ऐसे हैं जहां से थर्माकोल आदि जलाया जाता है। हैरत की बात यह है कि कई स्थानों पर कूड़ा भी ऐसे ही जला दिया जाता है पर सबसे अहम कारण भट्ठियां ही हैं। पीतल नगरी की चमक को प्रदूषण की काली छाया ने धुंधला कर दिया है।
विज्ञापन
इसको दूर करने के लिए सालों से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर प्रयास कागजों में बनकर फाइलों में समा जाते हैं। एनजीटी की लाख कोशिशों के बाद भी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कोई खास उपाय नहीं किए गए। अब फिर से यहां काम्प्रीहेंसिव प्लान पर काम शुरू किया गया है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य के लिए घातक
चिकित्सकों का कहना है कि, जब भी वायु की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब हो तो लोगों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। स्मॉग को सबसे बुरा असर बच्चों के साथ ही बुजुर्गो की सेहत पर पड़ता है। खासकर सबसे ज्यादा असर हृदय तथा फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति घातक होती है। दमा और सांस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
स्मॉग में छिपे हानिकारक रसायन के कण अस्थमा के मरीजों में अस्थमा अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। जबकि स्मॉग से फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली ट्यूब में रुकावट, सूजन, कफ के कारण समस्या होती है।