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सेवानिवृत्त दरोगा के बेटे की हत्या में पुलिस कर्मी दोषमुक्त

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 01:59 AM IST
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Policeman acquitted in the murder of retired inspector's son
मुरादाबाद। सेवानिवृत्त दरोगा के बेटे शबलू की हत्या के मामले में अदालत ने पुलिसकर्मी सनी तोमर निवासी बिजरौल जिला बागपत को दोषमुक्त कर दिया है। हजरतनगर थाना पुलिस ने शबलू को आर्म्स एक्ट के मामले में हिरासत में लिया था। इस मामले में एसओ समेत 11 पुलिसकर्मी और दो अन्य के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था।
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संभल जनपद के असमोली के मढ़न गांव निवासी मैराजुल हसन पुलिस विभाग में दरोगा पद से सेवानिवृत्त हुए थे। हजरत नगर गढ़ी थाने में 23 सितंबर 2016 को पुलिस कस्टडी के दौरान दरोगा के बेटे रफीकुल हसन उर्फ शबलू की मौत हो गई थी। घटना से दिन पहले ही रफीकुल हसन उर्फ शबलू को पुलिस सिरसी गांव से उठाकर ले गई थी।
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शबलू वहां अपने एक रिश्तेदार के घर शादी समारोह में शामिल होने गया था। मृतक के भाई कमरूल हसन ने हजरतनगर गढ़ी थाने के तत्कालीन एसओ परवेज चौहान, सिपाही रवित कुमार, हिमांशु तोमर, सनी तोमर, कपिल देव शर्मा, सोनू कुमार, योगेंद्र कसाना, राहुल कुमार, सतेंद्र सिंह, सचिन कुमार एवं सुनील के साथ ही मुखबिर कुमैल अब्बास व अरमान के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान एसओ समेत 11 आरोपियों के नाम विवेचना में निकल दिए गए थे।
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साथ ही विवेचक ने दो पुलिसकर्मी सनी तोमर व हिमांशु तोमर के खिलाफ गैरइरादतन हत्या में आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। पुलिस ने सनी तोमर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस केस की सुनवाई अपर जिला जज तृतीय अमित मालवीय की अदालत में हुई। मृतक के भाई कमरुल हसन ने केस में दावा किया था कि उन्होंने पुलिसकर्मियों को शबलू की पिटाई करते हुए अपनी आंखों मे सामने देखा था। पुलिस ने शबलू की मौत पुलिस कस्टडी से भागते समय गिरकर होने से बताई है।

पुलिस का दावा है कि उस समय शबलू को कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था, तभी वह हादसे का शिकार हुआ था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्यों के अभाव में आरोपी सनी तोमर को निर्दोष मानते हुए दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने जेल में बंद पुलिसकर्मी सनी तोमर निवासी बिजरौल, जिला बागपत को रिहा करने का आदेश दिया है। वहीं, फरार चल रहे दूसरे आरोपी सिपाही हिमांशु तोमर की पत्रावली पहले ही पृथक की जा चुकी है, जिस पर सुनवाई विचाराधीन है।
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