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Moradabad News: जिला अस्पताल की तर्ज पर बिलारी और कांठ सीएचसी में बनेंगे पोषण पुनर्वास केंद्र
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल की तर्ज पर बिलारी और कांठ सीएचसी पर भी पोषण पुनर्वास केंद्र बनाए जाएंगे। 10-10 बेड की क्षमता वाले इन पोषण पुनर्वास केंद्रों में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जाएगा। यहां बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। उपचार के दौरान बच्चों की सेहत, वजन और पोषण स्तर में सुधार की निगरानी की जाएगी।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में आमतौर पर 14 दिन तक बच्चों को भर्ती रखकर उपचार किया जाता है। जरूरत पड़ने पर गंभीर स्थिति वाले बच्चों के लिए भर्ती की अवधि बढ़ाई जा सकती है। बच्चों के साथ रहने वाली मां या देखभाल करने वाले को निर्धारित नियमों के अनुसार भत्ता भी दिया जाता है। इससे परिवार को बच्चे के उपचार के दौरान आर्थिक मदद मिलती है। केंद्रों पर बच्चों की देखभाल के साथ माताओं को भी पौष्टिक भोजन, स्तनपान और घर पर बच्चों के खानपान से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। उपचार के बाद बच्चों की नियमित जांच और वजन की निगरानी भी जरूरी होगी, ताकि दोबारा कुपोषण की स्थिति न बने।
सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में संचालित एनआरसी में पिछले साढ़े चार साल में 1148 बच्चों का उपचार किया जा चुका है। यहां बच्चों के बेहतर उपचार के लिए बेड की संख्या भी बढ़ाई गई है। अब बिलारी और कांठ में केंद्र स्थापित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के गंभीर कुपोषित बच्चों को उपचार की सुविधा नजदीक मिल सकेगी।
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पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में आमतौर पर 14 दिन तक बच्चों को भर्ती रखकर उपचार किया जाता है। जरूरत पड़ने पर गंभीर स्थिति वाले बच्चों के लिए भर्ती की अवधि बढ़ाई जा सकती है। बच्चों के साथ रहने वाली मां या देखभाल करने वाले को निर्धारित नियमों के अनुसार भत्ता भी दिया जाता है। इससे परिवार को बच्चे के उपचार के दौरान आर्थिक मदद मिलती है। केंद्रों पर बच्चों की देखभाल के साथ माताओं को भी पौष्टिक भोजन, स्तनपान और घर पर बच्चों के खानपान से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। उपचार के बाद बच्चों की नियमित जांच और वजन की निगरानी भी जरूरी होगी, ताकि दोबारा कुपोषण की स्थिति न बने।
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सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में संचालित एनआरसी में पिछले साढ़े चार साल में 1148 बच्चों का उपचार किया जा चुका है। यहां बच्चों के बेहतर उपचार के लिए बेड की संख्या भी बढ़ाई गई है। अब बिलारी और कांठ में केंद्र स्थापित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के गंभीर कुपोषित बच्चों को उपचार की सुविधा नजदीक मिल सकेगी।
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