रसोई का बजट बिगड़ा: दीपावली से पहले महंगाई के दीये जले, सरसों का तेल 210 रुपये लीटर पहुंचा
सरसों के तेल की कीमत दस दिनों में 160 रुपये से बढ़कर 200 से 210 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कारोबारियों के मुताबिक, कम उत्पादन, सरसों की बढ़ती मांग और लागत में इजाफा दाम बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं। कीमतों में तेजी से रसोई का बजट बिगड़ रहा है और दिवाली पर दीये जलाना भी महंगा होने की आशंका है।
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सरसों के तेल की कीमत में अचानक तेजी आ गई है। दस दिनों के भीतर सरसों का तेल 160 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 210 तक पहुंच गया है। अभी कीमतों में और इजाफा होने की बात कही जा रही है। जिस तरह से रेट बढ़े हैं उससे इस बार दिवाली पर दीये जलाना भी महंगा हो जाएगा।
सरसों के तेल के बढ़े दाम ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे सरसों का कम उत्पादन तो बताया ही जा रहा है साथ ही सरसों के तेल की बढ़ी मांग भी एक वजह है। तेल कारोबारी विवेक अग्रवाल का कहना है कि पिछले दो महीनोें में थोक के भाव में 15 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।
उनका कहना है कि इस समय रिफाइंड का प्रयोग कम हुआ है और सरसों के तेल की मांग बढ़ी है। काली सरसों के तेल की डिमांड सबसे ज्यादा है। कटरा नाज के कारोबारी अशोक गुप्ता के मुताबिक सरसों का तेल 160 रुपये से बढ़कर 200 से 210 रुपये प्रति किलो तक हो गया है।
कारोबारी श्याम आर्य का कहना है कि बाजार में काली सरसों का रेट 8000 रुपये प्रति क्विंटल है। उत्पादन लागत बढ़ने के साथ ही दाम में भी इजाफा हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सरसों के रेट बढ़ने के कारण ही तेल के दामों में इजाफा हुआ है।
बाजार में मक्खन की भी कमी, आपूर्ति घटी
बाजार में मक्खन की उपलब्धता कम होने से इसकी किल्लत बनी हुई है। डिस्ट्रीब्यूटर सानिध्य गुप्ता का कहना है कि पिछले तीन महीने से मक्खन की आपूर्ति प्रभावित है। कच्चे माल और अन्य संसाधनों की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने से बाजार में पर्याप्त मात्रा में मक्खन नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले हर महीने करीब 15 लाख रुपये का मक्खन बाजार में उपलब्ध कराया जाता था लेकिन अब इसकी आपूर्ति घटकर तीन से चार लाख रुपये रह गई है। आपूर्ति सामान्य होने में करीब दो महीने लगने की बात कही जा रही है।
कम हो गया सरसों का रकबा
किसान गन्ना, धान और गेहूं की खेती में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। पहले गेहूं के साथ सरसों की बोआई भी होती थी लेकिन अब धीरे धीरे सरसों की खेती कम होती जा रही है। कभी मुरादाबाद और अमरोहा में तो सरसों का रकबा सबसे ज्यादा था। कृषि विभाग के उपनिदेशक रविकांत सिंह ने बताया कि अब धीरे धीरे क्षेत्रफल बढ़ रहा है। 2025-26 में मुरादाबाद जिले में सरसों का रकबा 7020 हेक्टेयर था। उत्पादन हुआ 10011 टन। जबकि 2026-27 में 8649 हेक्टेयर में सरसों की खेती हो रही है। संभावित पैदावार 13126 टन होगी।