फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   no water in pond

इस तालाब का कभी पानी पीते थे लोग, आज पानी की एक बूंद भी नहीं

Mon, 18 Dec 2017 01:17 AM IST
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 18 Dec 2017 01:17 AM IST
विज्ञापन
no water in pond
तालाब - फोटो : अमर उजाला
 तालाब, कुएं, नदियां, हमारी संस्कृति और सभ्यता के अभिन्न अंग हैं। लेकिन शहरीकरण और विकास की अंधी दौर में हम प्रकृति से दूर होने के साथ-साथ अपनी संस्कृति और सभ्यता को भी भूलते जा रहे हैं।
विज्ञापन


  गोपलपुर के लोगों को छोड़ कर इस गांव का नाम शायद ही महानगर में कोई जानता होेगा। इस गांव को अब लोग बुद्धि विहार के सेक्टर 7 में गिनते हैं। लेकिन सेक्टर सात में जिस तालाब का आवास विकास ने आधा अधूरा सौंदर्यीकरण कर अनुपयोगी बना दिया है। इस तालाब का पानी कभी गोपलपुर के लोगों के लिए पीने, नहाने के काम आता था।
विज्ञापन


इस गांव में दो कुएं भी वजूद में थे लेकिन अब एक कुंआ रोड के नीचे कहीं गुम हो गया है तो दूसरा अपनी निशानी छोड़ गया है। सेक्टर सात में जो तालाब है उसमें पानी नहीं है। यहां आवास विकास ने तालाब के चारों ओर ईंट की दीवार से घेर कर ऊंची रैलिंग लगा दी है। बरसात का पानी आने के लिए इसमें मात्र एक पुलिया बनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन अब इस तालाब में बरसात का पानी नहीं रुकता। कम बरसात और वाटर लेबल गिरने से पानी तालाब में रुकता ही नहीं। जबकि आज से पच्चीस से तीस साल पहले इस तालाब का पानी लोग पीते थे। इस तालाब में चारों तरफ से बरसात का पानी बहकर आता था। लोग यहां नहाते थे। तालाब में साल भर पानी भरा रहता था।

लेकिन अब यहां घास उगी हुई है। ऐसे में कहा सकते हैं कि तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि एक बड़े से गड्ढे का सौंदर्यीकरण हुआ है। अब तालाब लोगों के लिए किसी तरह से उपयोगी नहीं रहा। यहां रहने वाले 75 वर्षीय जबर सिंह ने बताया कि यह तालाब करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। यह तालाब इस गांव के लिए बहुत उपयोगी था। कश्मीरी देवी ने बताया कि हम यहां अपने जानवरों को भी पानी पिलाते थे।


आज भी अपने होने का सबूत दे रहा एक मात्र बचा कुएं का अवशेष  
इस गांव में दो कुएं भी थे। एक कुंआ तो सड़क बनने में भेंट चढ़ गया और सदा के लिए दफन हो गया। लेकिन एक कुआं अब भी अपने होने की गवाही दे रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब हैंड पंप नहीं था तो इन्हीं दो कुएं से लोग पानी भरते थे। यहां तक की यहां से पानी निकालकर खेतों की सिंचाई भी करते थे।

लेकिन धीरे-धीरे कुएं का पानी गंदा होने के साथ ही सूखने लगे। जब कुएं सूख गए तो उसमें लोग कूड़ा कचरा डालने लगे और कुएं समाप्त हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed