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Moradabad News: 535 फर्मों से फैलाया 22 राज्यों में जीएसटी चोरी का नेटवर्क
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मुरादाबाद। मेरठ के रहने वाले मास्टर माइंड इखलाक की डायरी जीएसटी चोरी के कई राज खोलेंगे। डायरी में एसआईटी को 535 फर्मों के नाम और मोबाइल नंबर मिले हैं। इन 535 फर्जी फर्मों के जरिये मास्टर माइंड ने देश के 22 राज्यों में जीएसटी चोरी का नेटवर्क फैला रखा है। ऐसे में जीएसटी चोरी का दायरा एक हजार करोड़ से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही कई बड़े नाम सामने आने की संभावना है। फिलहाल एसआईटी के साथ राज्य कर विभाग के अधिकारी इन फर्मों का ब्योरा खंगालने में जुटे हैं।
एसआईटी के एसपी सुभाष चंद्र गंगवार ने गिरफ्तार मेरठ के इखलाक की डायरी के बारे में राज्य कर के अपर आयुक्त ग्रेड-1 अशोक कुमार सिंह को जानकारी दी। डायरी में 535 फर्मों का ब्योरा उपलब्ध है। इस गिरोह ने डायरी में 22 राज्यों का भी जिक्र किया है। इसमें दिल्ली उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित देश के प्रमुख राज्य शामिल हैं। आरोपियों ने एचडीएफसी के एक खाता से लेनदेन किया है। पुलिस इस खाते के बारे में जानकारी लेकर सोमवार को उसे फ्रिज कराने की कोशिश करेगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य कर विभाग ने 144 फर्मों की जांच के दौरान करीब 400 करोड़ की जीएसटी चोरी और 1970 करोड़ रुपये का टर्नओवर करना बताया था। यदि 535 फर्मों की जांच की गई तो जीएसटी चोरी का दायरा एक हजार करोड़ तक हो सकता है।
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मेरठ के शाहिद और उसके सीएम की तलाश
- अभी जीएसटी चोरी में शामिल मेरठ का शाहिद, उसके करीबी सीए सहित अन्य आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। अभी बोगस फर्मों से सामान खरीदने वाले कारोबारी भी नहीं पकड़े गए हैं। पता चला है कि इस गिरोह ने कई कारोबारियों को फर्जी ई-वे बिल उपलब्ध कराकर मालामाल किया है।
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मोबाइल नंबरों की निकाली जाएगी सीडीआर
इखलाक की डायरी में कई मोबाइल नंबर भी मिले हैं। पुलिस सभी नंबरों का सीडीआर निकालकर उनकी छानबीन करेगी। पुलिस का कहना है कि बड़े लोगों को भी बख्शा नहीं जाएगा। छानबीन की रिपोर्ट डीआईजी रेंज को उपलब्ध कराई जाएगी।
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लकड़ी लदे सात ट्रकों को छुड़ाने के लिए 14 लाख जमा
मुरादाबाद। राज्य कर विभाग की टीमों ने लखनऊ मुरादाबाद हाईवे और कांठ रोड पर चेकिंग के दौरान एक सप्ताह के अंदर लकड़ी लदे सात ट्रकों को पकड़कर जब्त किया। इस मामले में ट्रकों को छुड़वाने के लिए कई लोगों ने पैरवी की लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। राज्य कर के अपर आयुक्त ग्रेड-2 आरए सेठ ने बताया कि कारोबारियों ने ट्रकों को छुड़वाने के लिए 14 लाख रुपये विभाग में जमा किए। ब्यूरो
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आर्थिक तंगी झेल रहा था इखलाक, टायर मरम्मत की थी दुकान
मुरादाबाद। मास्टर माइंड इखलाक ने पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि वर्ष 2022 में मेरठ के शास्त्री नगर में टायर (व्हील बैलेंसिंग) और वॉशिंग की दुकान खोली थी। कारोबार में नुकसान होने के बाद वह आर्थिक तंगी झेल रहा था। इस बीच उसकी मुलाकात मेरठ निवासी दोस्त शाहिद से हुई। शाहिद ने बताया कि वह जीएसटी की बोगस फर्म बनवाकर बिना कुछ पैसे लगाए बिल ट्रेडिंग कर आईटीसी के पैसे हासिल कर सकता है। इसके लिए पहले से रजिस्टर्ड बोगस फर्म की आईडी पासवर्ड दिल्ली से 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये में मिल जाएगी। वह फर्म सीए को देकर फर्जी ई-वे बिल बनावाकर बिल ट्रेडिंग करा देगा। इसके बाद आईटीसी पास ऑन कर पैसे कमाए जा सकते हैं। यदि बोगस (फर्जी) फर्मों के माध्यम से बिलिंग की जाएगी तो काफी मुनाफा होगा। इसमें पकड़े जाने का भी कोई विशेष जोखिम भी नहीं उठाना पड़ेगा। क्योंकि सभी फर्में फर्जी होंगी।
इखलाक दोस्त का लुभावना प्रस्ताव सुनकर काम करने के लिए तैयार हो गया।
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दिल्ली में पहले पंजीकृत फर्मों को खरीदा, फिर किया बिल ट्रेडिंग
मुरादाबाद। शाहिद के कहने पर इखलाक ने दिल्ली में पहले से रजिस्टर्ड फर्म खरीदकर लुधियाना और कानपुर में काम करने वाले सीए को देकर फर्जी ई-वे बिल बनवाकर बिल ट्रेडिंग करने लगा। ट्रेडिंग में इखलाक को इनवाइस में टैक्स वेल्यू के हिसाब से सौ रुपये पर 30 पैसे मिलते थे। जैसे छह करोड़ के फर्जी इनवाइस और ई-वे बिल बनवाकर देने पर 1.80 लाख रुपये मिल जाते हैं। इसमें फर्म की ट्रांजेक्शन को एक नंबर में बैंक खातों से दिखाया जाता है। बाद में कैश निकालकर अपना हिस्सा रखकर वापस देते हैं। ब्यूरो
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फर्मों की जांच में आएगे नए तथ्य
अपर आयुक्त ग्रेड-1 अशोक कुमार सिंह, ग्रेड-2 आरए सेठ, संयुक्त आयुक्त मिलिंद राज ने बताया कि नई फर्मों की जांच के दौरान काफी जानकारियां मिलेंगी। अभी तक राज्य कर विभाग ने सिर्फ 144 फर्मों की छानबीन की थी। इस मामले में 1970 करोड़ के टर्नओवर का मामला प्रकाश में आया था।
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जांच टीम में शामिल पुलिसकर्मी
सीओ के अधीन एसआईटी के सदस्य निरीक्षक शैलेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक विवेक यादव, पूजा, हेड कॉस्टेबल प्रशांत और अरुण प्रताप सिंह शामिल हैं। टीम में शामिल लोगों ने सीडीआर के आधार पर आरोपियों का ब्यौरा इकट्ठा किया है।
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एसआईटी के एसपी सुभाष चंद्र गंगवार ने गिरफ्तार मेरठ के इखलाक की डायरी के बारे में राज्य कर के अपर आयुक्त ग्रेड-1 अशोक कुमार सिंह को जानकारी दी। डायरी में 535 फर्मों का ब्योरा उपलब्ध है। इस गिरोह ने डायरी में 22 राज्यों का भी जिक्र किया है। इसमें दिल्ली उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित देश के प्रमुख राज्य शामिल हैं। आरोपियों ने एचडीएफसी के एक खाता से लेनदेन किया है। पुलिस इस खाते के बारे में जानकारी लेकर सोमवार को उसे फ्रिज कराने की कोशिश करेगी।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य कर विभाग ने 144 फर्मों की जांच के दौरान करीब 400 करोड़ की जीएसटी चोरी और 1970 करोड़ रुपये का टर्नओवर करना बताया था। यदि 535 फर्मों की जांच की गई तो जीएसटी चोरी का दायरा एक हजार करोड़ तक हो सकता है।
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मेरठ के शाहिद और उसके सीएम की तलाश
- अभी जीएसटी चोरी में शामिल मेरठ का शाहिद, उसके करीबी सीए सहित अन्य आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। अभी बोगस फर्मों से सामान खरीदने वाले कारोबारी भी नहीं पकड़े गए हैं। पता चला है कि इस गिरोह ने कई कारोबारियों को फर्जी ई-वे बिल उपलब्ध कराकर मालामाल किया है।
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मोबाइल नंबरों की निकाली जाएगी सीडीआर
इखलाक की डायरी में कई मोबाइल नंबर भी मिले हैं। पुलिस सभी नंबरों का सीडीआर निकालकर उनकी छानबीन करेगी। पुलिस का कहना है कि बड़े लोगों को भी बख्शा नहीं जाएगा। छानबीन की रिपोर्ट डीआईजी रेंज को उपलब्ध कराई जाएगी।
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लकड़ी लदे सात ट्रकों को छुड़ाने के लिए 14 लाख जमा
मुरादाबाद। राज्य कर विभाग की टीमों ने लखनऊ मुरादाबाद हाईवे और कांठ रोड पर चेकिंग के दौरान एक सप्ताह के अंदर लकड़ी लदे सात ट्रकों को पकड़कर जब्त किया। इस मामले में ट्रकों को छुड़वाने के लिए कई लोगों ने पैरवी की लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। राज्य कर के अपर आयुक्त ग्रेड-2 आरए सेठ ने बताया कि कारोबारियों ने ट्रकों को छुड़वाने के लिए 14 लाख रुपये विभाग में जमा किए। ब्यूरो
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आर्थिक तंगी झेल रहा था इखलाक, टायर मरम्मत की थी दुकान
मुरादाबाद। मास्टर माइंड इखलाक ने पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि वर्ष 2022 में मेरठ के शास्त्री नगर में टायर (व्हील बैलेंसिंग) और वॉशिंग की दुकान खोली थी। कारोबार में नुकसान होने के बाद वह आर्थिक तंगी झेल रहा था। इस बीच उसकी मुलाकात मेरठ निवासी दोस्त शाहिद से हुई। शाहिद ने बताया कि वह जीएसटी की बोगस फर्म बनवाकर बिना कुछ पैसे लगाए बिल ट्रेडिंग कर आईटीसी के पैसे हासिल कर सकता है। इसके लिए पहले से रजिस्टर्ड बोगस फर्म की आईडी पासवर्ड दिल्ली से 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये में मिल जाएगी। वह फर्म सीए को देकर फर्जी ई-वे बिल बनावाकर बिल ट्रेडिंग करा देगा। इसके बाद आईटीसी पास ऑन कर पैसे कमाए जा सकते हैं। यदि बोगस (फर्जी) फर्मों के माध्यम से बिलिंग की जाएगी तो काफी मुनाफा होगा। इसमें पकड़े जाने का भी कोई विशेष जोखिम भी नहीं उठाना पड़ेगा। क्योंकि सभी फर्में फर्जी होंगी।
इखलाक दोस्त का लुभावना प्रस्ताव सुनकर काम करने के लिए तैयार हो गया।
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दिल्ली में पहले पंजीकृत फर्मों को खरीदा, फिर किया बिल ट्रेडिंग
मुरादाबाद। शाहिद के कहने पर इखलाक ने दिल्ली में पहले से रजिस्टर्ड फर्म खरीदकर लुधियाना और कानपुर में काम करने वाले सीए को देकर फर्जी ई-वे बिल बनवाकर बिल ट्रेडिंग करने लगा। ट्रेडिंग में इखलाक को इनवाइस में टैक्स वेल्यू के हिसाब से सौ रुपये पर 30 पैसे मिलते थे। जैसे छह करोड़ के फर्जी इनवाइस और ई-वे बिल बनवाकर देने पर 1.80 लाख रुपये मिल जाते हैं। इसमें फर्म की ट्रांजेक्शन को एक नंबर में बैंक खातों से दिखाया जाता है। बाद में कैश निकालकर अपना हिस्सा रखकर वापस देते हैं। ब्यूरो
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फर्मों की जांच में आएगे नए तथ्य
अपर आयुक्त ग्रेड-1 अशोक कुमार सिंह, ग्रेड-2 आरए सेठ, संयुक्त आयुक्त मिलिंद राज ने बताया कि नई फर्मों की जांच के दौरान काफी जानकारियां मिलेंगी। अभी तक राज्य कर विभाग ने सिर्फ 144 फर्मों की छानबीन की थी। इस मामले में 1970 करोड़ के टर्नओवर का मामला प्रकाश में आया था।
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जांच टीम में शामिल पुलिसकर्मी
सीओ के अधीन एसआईटी के सदस्य निरीक्षक शैलेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक विवेक यादव, पूजा, हेड कॉस्टेबल प्रशांत और अरुण प्रताप सिंह शामिल हैं। टीम में शामिल लोगों ने सीडीआर के आधार पर आरोपियों का ब्यौरा इकट्ठा किया है।