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Moradabad: आठ साल पहले बना जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर, अब तक नहीं मिली फायर एनओसी, एक दिन पहले लग गई थी आग

Fri, 05 Jul 2024 01:42 PM IST
विमल शर्मा शिवम वर्मा, अमर उजाला मुरादाबाद
शिवम वर्मा, अमर उजाला मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 05 Jul 2024 01:42 PM IST
सार

मुरादाबाद के जिला अस्पताल में बने ट्रॉमा सेंटर में बृहस्पतिवार को आग लग गई। इससे मरीज और कर्मियों में भगदड़ मच गई। जांच में पता चला कि जिला अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर आठ साल पहले बना था। अब तक इसे फायर एनओसी नहीं मिली है। 

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Moradabad: Trauma center built in district hospital eight years ago, fire NOC not received till now
जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग बुझाते दमकलकर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले दिनों दिल्ली के न्यू बोर्न बेबी केयर अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन विभाग लगातार सक्रिय है। हालांकि जिला अस्पताल की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अस्पताल परिसर में ट्रॉमा सेंटर आठ साल पहले बना था।

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डेढ़ साल पहले इसका संचालन शुरू हुआ है। अब तक फायर सेफ्टी की एनओसी अस्पताल के पास नहीं है। ट्रॉमा सेंटर में सीटी स्कैन के अलावा सिर में गंभीर चोर के मरीज भर्ती किए जाते हैं। मानक अधूरे होने के कारण अग्निशमन विभाग की ओर से एनओसी जारी नहीं की गई है।
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इस बात को लेकर जिला अस्पताल प्रबंधन व अग्निशमन की टीम में कहासुनी भी हुई। अग्निशमन विभाग ने आग बुझाने के बाद पूरी घटना की जानकारी अस्पताल प्रबंधन से लिखित में मांगी। अग्नि सुरक्षा उपकरण चालू न होने की बात भी सामने आई।
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जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि पानी की सप्लाई उनके टैंक से हुई है, जो अग्नि सुरक्षा के लिए ही बनाया गया था। जिला अस्पताल की ओपीडी व इमरजेंसी में भी पिछले माह लखनऊ की टीम ने ऑडिट किया था। अग्नि सुरक्षा के कई बिंदुओं में खामियां पाई गई थीं।

महिला अस्पताल के पास भी नहीं है फायर एनओसी 
महिला अस्पताल के पास भी फायर सेफ्टी की एनओसी नहीं है। जबकि यहां हर दिन 15 से ज्यादा नवजात व महिलाएं भर्ती रहती हैं। एसएनसीयू में भी 10 से अधिक नवजात हमेशा भर्ती रहते हैं। कई प्राइवेट अस्पतालों से भी यहां बच्चों को भेजा जाता है।

इसके बावजूद अस्पताल में अग्नि सुरक्षा को लेकर इंतजाम काफी नहीं हैं। एसएनसीयू के बाहर लगे अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी डेट निकल चुकी है। पाइपलाइन लगी हैं लेकिन आग लगने पर पानी की सप्लाई व आग बुझाने का इंतजाम नहीं है।

अग्निशमन यंत्र चालू स्थिति में क्यों नहीं थे, इसकी जानकारी की जाएगी। फिलहाल हमारे स्टाफ ने पहुंचकर सबसे पहले आग बुझाने का काम किया। बाकी मामलों पर अस्पताल प्रबंधन से चर्चा करेंगे। जहां कमियां हैं, उन्हें बता दी जाएंगी।  - कृष्ण कांत ओझा, चीफ फायर सेफ्टी ऑफिसर

जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग
बृहस्पतिवार को सुबह के 10 बजे थे। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बने सीटी स्कैन कक्ष में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल ओझा रोजाना की तरह मरीज का सीटी स्कैन करने बैठे थे। मशीन शुरू हुई ही थी कि अचानक बराबर वाले बैटरी रूम में तेज धमाका हुआ।

वहीं रखीं 34 बैटरियां एक-एक फट गईं। कुछ ही पलों में पूरे ट्रॉमा सेंटर में आग की लपटें और धुआं छा गया। ट्रॉमा सेंटर में भगदड़ मच गई। नर्सेज ड्यूटी रूम से स्टाफ दौड़कर आए, उन्होंने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ओझा को बाहर निकाला। इसके बाद सभी महिला स्टाफ बाहर भेजी गईं।

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