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एक्यूआई घटा पर अभी भी देश में नंबर वन प्रदूषित शहर मुरादाबाद, अवैध पीतल भट्ठियों के संचालन से गंभीर श्रेणी में हवा का स्तर

Thu, 04 Feb 2021 01:53 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Thu, 04 Feb 2021 01:53 AM IST
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moradabad highest polluted city in country last four days
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अवैध पीतल भट्ठियों के संचालन और ई-कचरे के जलने की वजह से मुरादाबाद का वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आई। इसके बावजूद चौथे दिन भी मुरादाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया।
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शाम पांच बजे मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। अधिकारी अब इन अवैध पीतल भट्ठियों को कोयले के बजाय गैस से संचालित करवाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए शासन स्तर से निर्देश मांगे गए हैं। बुधवार को मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक चार सौ था, जिसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 460, पीएम 10 का अधिकतम स्तर 422 दर्ज किया गया। नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 68 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा।
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प्रदूषण की मार से बचाएगी बारिश
पंत नगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि पत्थर वाले कोयले के जलने से कार्बन मोनो ऑक्साइड सबसे अधिक निकलती है। इससे भारी कणों में वृद्धि होती है। वातावरण में इन कणों के बढ़ने और कोहरे के मिलने से स्मॉग बन जाता है। मुरादाबाद में इन दिनों स्मॉग की परत छाई हुई है। इसलिए सांस रोगियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। चार फरवरी से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद बारिश का अनुमान बन रहा है। यदि पांच से दस मिलीमीटर बारिश होती है तो शहरवासियों को गलन के साथ प्रदूषण से भी राहत मिल पाएगी।
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इन क्षेत्रों में डाली जा रही है गैस पाइप लाइन
स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण में पहले चरण का पाइप लाइन बिछाई जा रही है। अभी बरबलान, करूला, कटघर, मुगलपुरा और लालबाग क्षेत्र के आधे हिस्से आदि में लाइन बिछाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अगले तीन महीनों में पहले चरण का कार्य समाप्त हो जाएगा। इसके बाद में पाइप लाइन बिछ रहा है। नागफनी, गलशहीद, पीतल बस्ती व अन्य क्षेत्र दूसरे चरण में आएंगे।

हम उद्योग संचालन की अनुमति भूमि उपयोग (लैंडयूज) देखकर देते हैं। यदि पीतल भट्ठियां गैस से संचालित होने लगेंगी तो प्रदूषण से शहरवासियों को काफी हद तक राहत मिल जाएगी।

- विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

शहर में गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। ज्यादातर पीतल भट्ठियां आवासीय क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस स्थिति में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकता है। इसलिए हमने इस मामले को शासन में भेज दिया है। वहां अभी मंथन चल रहा है कि किस तरह पीतल भट्ठियों को गैस से संचालित करने की योजना का क्रियान्वयन किया जाए। वहां से निर्देश मिलने के बाद ही पीतल भट्टी संचालकों को कनेक्शन दिए जाएंगे।
- अनुज कुमार, उपायुक्त उद्योग।
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