शुभ दीपावली: पीतलनगरी के मेधावियों पर सोने की बारिश, छात्रों को मेडल मिले.. अभिभावकों के चेहरे खिले
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुरादाबाद के चार मेधावियों को स्वर्ण पदक मिले। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के हाथों सम्मान पाकर मेधावी बेहद खुश हैं।
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुरादाबाद के चार मेधावियों को स्वर्ण पदक मिले। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के हाथों सम्मान पाकर मेधावी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि त्योहार से पहले इस तरह की खुशी मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों को दिया।
दादाजी का सपना किया पूरा
कोठीवाल डेंटल कॉलेज से ओरल एंड मैग्जिलो फेशियल पैथोलॉजी एंड ओरल माइक्रो बायोलॉजी की पढ़ाई करने वाले त्रिपुरा निवासी डॉ. दीपन मजूमदार को 74.71 फीसदी अंकों के साथ गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है। उनका कहना है कि यह उपलब्धि मेरे दादा जी अटल बिहारी मजूमदार का सपना है, जिसे मैंने पूरा किया है। दीपन की भविष्य में शोध करने की योजना है। उनका कहना है कि इस पढ़ाई के बाद मुंह और गले के अंदर जितनी बीमारियां ट्यूमर, कैंसर आदि है, उसके इलाज की विशेषज्ञता मिल जाती है। सम्मान प्राप्त करने के लिए वह अपने पिता दिलीप मजूमदार के साथ बरेली गए थे। उन्होंने बताया कि प्राचार्य डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल और निदेशक केके मिश्रा ने पढ़ाई में बहुत मदद की। उनकी वजह से ही यह उपलब्धि मिल सकी है।
लोगों की स्माइल संवारने का सबसे अच्छा तरीका
कोठीवाल डेंटल कॉलेज की बीडीएस की छात्रा और लखनऊ के विभूति खंड निवासी वृंदा अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने 77.3 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। शुक्रवार को गोल्ड मेडल लेने के लिए वृंदा अपनी मम्मी अंजलि अरोड़ा और पापा हेमंत अरोड़ा के साथ बरेली गई थीं। उन्होंने बताया कि डेंटिस्ट बनना मेरा सपना था। एक बार मैं डेंटल क्लीनिक में गई थी। वहां दांतों का उपचार होते हुए देखा। तभी समझ आ गया था कि लोगों की स्माइल को संवारने का सबसे अच्छा तरीका डेंटल बनना है। जो व्यक्ति खाना चबा नहीं पाते तो उनके लिए डेंचर बनाते हैं। जब उन्हें खुशी मिलती है, उसको बयां नहीं कर सकती। एमडीएस करने के लिए मैं दोबारा नीट की तैयारी करुंगी। यह उपलब्धि शिक्षकों की मेहनत और मार्गदर्शन की वजह से मिली है। खासकर प्राचार्य डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा है।
टेक्सटाइल में करियर बनाना है लक्ष्य
विल्सोनिया डिग्री कॉलेज की छात्रा और बनारस निवासी उम्मे हबीब ने बताया कि बीकॉम में 69.95 फीसदी अंक आए हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में वह टेक्सटाइल के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं। बिजनेस वूमेन बनना मेरा बचपन का सपना था। इसमें परिजनों का पूरा सहयोग मिला है। मेरे पिता टीएमयू में शिक्षक हैं।
दर्शनशास्त्र में शोध करने का सपना
केजीके कॉलेज में एमए दर्शनशास्त्र की छात्रा और गांव सरकड़ा विश्नोई ठाकुरद्वारा निवासी इंदू रानी ने बताया कि उनके 72.67 फीसदी अंक आए हैं। उन्होंने कहा कि जेआरएफ करके प्रोफेसर बनने का सपना है। इंदू के मुताबिक हमें पुरानी विचारधारा हमें जड़ों से जोड़ती है। इसलिए सभी को भारतीय दर्शन पढ़ना चाहिए। अधिक से अधिक बच्चों को यह विषय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी इस उपलब्धि में सबसे बड़ा योगदान मेरे पति विशाल चौहान है। उन्होंने और परिजनों ने मेरे दो वर्षीय बेटे विराट चौहान की देखभाल की, ताकि मुझे पढ़ाई के लिए समय मिल सके। इंदू का चयन बिहार के दरभंगा जिला में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर हो गया है। इंदू के पिता विनोद कुमार चौहान और मम्मी राधा देवी हैं।