Moradabad: जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग, कर्मचारी और मरीज फंसे.. बमुश्किल बचाए गए
मुरादाबाद जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बैटरी फंटने के बाद आग भड़क उठी। अचानक विस्फोट हाेने के बाद अफरा-तफरी मच गई। दमकलकर्मियों ने आग पर बमुश्किल काबू पाया।
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मुरादाबाद जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में अचानक आग भड़क उठी। इससे मौके पर मरीज और उनके परिजनों में भगदड़ मच गई। सूचना पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने आग पर बमुश्किल काबू पाया। सुबह के 10 बजे रोजाना की तरह रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल ओझा मरीज का सीटी स्कैन करने बैठे थे।
मशीन शुरू हुई ही थी कि अचानक बराबर वाले बैटरी रूम में तेज धमाका हुआ। कुछ ही पलों में पूरे ट्रॉमा सेंटर में आग की लपटों के साथ धुआं छा गया। सीटी स्कैन कक्ष के बराबर वाले कमरे में रखीं 34 बैटरियां एक-एक फटती चली गई।
नर्सेज ड्यूटी रूम से स्टाफ दौड़कर आया और उन्होंने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ओझा को बाहर निकाला। इसके बाद सभी महिला कर्मी बाहर भेजी गईं। ट्रॉमा सेंटर के वार्ड में भर्ती छह मरीज भी तीमारदारों की मदद से बाहर निकाला गया।
भगदड़ की स्थिति में दो से तीन मिनट में पूरा भवन खाली कर दिया गया। तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। गनीमत रही कि कोई कर्मी या मरीज अंदर नहीं रहा। हॉस्पिटल मैनेजर रजनीश ने हिम्मत दिखाई और हेलमेट लगाकर ट्रॉमा सेंटर के अंदर घुस गए।
उन्होंने फौरन ऑक्सीजन के चार जंबो सिलिंडर बाहर निकले, जिससे उनमें आग न लगे। 15 मिनट बाद दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने में आधा घंटा लग गया।
अस्पताल की बिजली काटी, ओपीडी छोड़ बाहर आए डॉक्टर
देखते ही देखते जिला अस्पताल परिसर में लोगों व स्टाफ की भीड़ लग गई। अस्पताल की बिजली काट दी गई, जिससे शॉर्ट सर्किट की स्थिति में आग न फैले। सभी डॉक्टर व मरीज ओपीडी से निकलकर बाहर आ गए।
दमकल विभाग के चीफ फायर सेफ्टी ऑफिसर कृष्ण कांत ओझा भी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने जिला अस्पताल के टैंक से पानी की सप्लाई ली और आग बुझवाई। अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्र काम नहीं कर रहे थे। पानी की सप्लाई भी पाइप से जुड़ी नहीं थी।