मुरादाबाद जिले के मूंढापांडे थाना क्षेत्र में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। गैंग के चार तस्करों के पेट से दुबई से लाए गए सोने के 27 कैप्सूल निकाले गए हैं। इनका वजन करीब 1.058 किलोग्राम है। इनकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है। तस्करों के खिलाफ कस्टम एक्ट सहित बीएनएस की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
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टांडा पुलिस
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ऐसे हुआ खुलासा
मामला 23 मई का है। रामपुर निवासी जुल्फेकार अली ने पुलिस को कॉल कर बताया कि वह और उसके कुछ साथी एक कार में दिल्ली से रामपुर लौट रहे थे। तभी मूंढापांडे थाना क्षेत्र के पुराने टोल के पास बोलेरो और स्विफ्ट डिजायर सवार 5-6 बदमाशों ने उनकी कार को हथियारों के बल पर रोक लिया और उन्हें जबरन जंगल की ओर ले गए। इस बीच जुल्फेकार किसी तरह भाग निकला और पास के इलाके में पहुंचकर मदद ली।
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आरोपियों से बरामद सोना
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सूचना पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की। थाना प्रभारी ने टीम के साथ चेकिंग के दौरान मुठभेड़ में दो बदमाशों तौफिक (रामपुर दौराहा) और रजा (काशीपुर, उत्तराखंड) को गिरफ्तार कर लिया। उनके अन्य साथी मौके से फरार हो गए। मुठभेड़ के दाैरान दोनों बदमाश गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें सीएचसी मूंढापांडे में भर्ती कराया गया। इनके कब्जे से अवैध असलहे, कारें और अपहृत चारों तस्करों को छुड़ाया गया।
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सोना तस्करी की आरोपियों के घरों में छाई वीरानी
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तस्करों के पेट में थे सोने के कैप्सूल, एक्स-रे में खुला राज
चारों तस्करों मुत्तलीब, अजरुद्दीन, शाने आलम और जुल्फेकार अली, निवासी टांडा (रामपुर) को पुलिस ने संदेह के आधार पर जिला अस्पताल भेजा। वहां एक्सरे में उनके पेट में मेटल जैसी आकृति के कैप्सूल दिखे। डॉक्टरों की निगरानी में जब उपचार शुरू हुआ तो उनके पेट से 27 सोने के कैप्सूल बरामद किए गए।
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मुरादाबाद में सोना तस्करी के आरोपियों के पेट से निकाले गए कैप्सूल
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ऐसे करते थे तस्करी, पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे
पूछताछ में चारों ने बताया कि वह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं। इन्हें फाइनेंसर दुबई ट्रैवल वीजा पर भेजते थे। जहां वह बिल पर सोने के कैप्सूल खरीदकर पानी से निगल लेते और दुबई से मुंबई एयरपोर्ट तक पहुंच जाते। देश लौटने पर घर में सिर्फ फल और हल्का खाना खाते और दो-तीन दिन में मल के जरिए सोना निकालते थे। इसके बाद सोना साफ कर हिस्सा लेकर फाइनेंसर को सौंप देते थे। इन्होंने बताया कि गिरोह में ट्रैवल एजेंट, डॉक्टर और अन्य लोग भी शामिल हैं। जो पूरी प्रक्रिया को सुनियोजित ढंग से अंजाम देते हैं।