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समस्या जस की तस तो काहे का वोट
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 04 Aug 2016 10:58 AM IST
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मेयर उप चुनाव
- फोटो : demo
साल दर साल चुनाव होते गए और मेयर बदलते गए। लेकिन निजात की बजाए पब्लिक की समस्याओं का अंबार लगता गया। मेयर उप चुनाव में इस अंबार को मतदाता दबाकर बैठ गया। जलभराव, बिजली, सड़क, पानी की समस्या दूर नहीं होने पर पब्लिक वोट डालने नहीं निकली। मतदान से दूरी बना ली। साथ ही प्रत्याशियों को ये संदेश दे दिया है, जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किस बात का वोट।
वैसे महानगर के हर मोहल्ले छोटी बड़ी समस्याएं है। लेकिन कुछ मोहल्ले ऐसे हैं जहां पब्लिक को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही है। नगर निगम के दायरे में आने के बाद ही कहीं सड़क नहीं है तो कहीं पानी नहीं है। कई मोहल्ले बरसात में टापू बन जाते हैं तो कहीं मोहल्ले बिजली के मकड़जाल से घिरे हैं।
प्रत्याशी हर चुनाव में आश्वासन देकर वोट हासिल चलते बनते हैं। लेकिन मोहल्ले की समस्या जस की तस रहती है। मेयर उप चुनाव में मतदाताओं ने आश्वासन की घुट्टी पर साइलेंट वार किया। अपनी समस्या घर में दबाकर बैठ गए। जबकि बूथों पर प्रत्याशियों के एजेंट उनकी राह देखते रहे।
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वैसे महानगर के हर मोहल्ले छोटी बड़ी समस्याएं है। लेकिन कुछ मोहल्ले ऐसे हैं जहां पब्लिक को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही है। नगर निगम के दायरे में आने के बाद ही कहीं सड़क नहीं है तो कहीं पानी नहीं है। कई मोहल्ले बरसात में टापू बन जाते हैं तो कहीं मोहल्ले बिजली के मकड़जाल से घिरे हैं।
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प्रत्याशी हर चुनाव में आश्वासन देकर वोट हासिल चलते बनते हैं। लेकिन मोहल्ले की समस्या जस की तस रहती है। मेयर उप चुनाव में मतदाताओं ने आश्वासन की घुट्टी पर साइलेंट वार किया। अपनी समस्या घर में दबाकर बैठ गए। जबकि बूथों पर प्रत्याशियों के एजेंट उनकी राह देखते रहे।
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