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मैटरनिटी विंग की लिफ्ट खराब होने से गर्भवतियों व प्रसूताओं की हालत पस्त
सार
अब दूसरी व तीसरी मंजिल पर जाने के लिए गर्भवतियों और प्रसूताओं को परेशानी उठा रैंप अथवा सीढ़ी का सहारा लेकर जाना होता है।एक माह में होते हैं 300 प्रसवमैटरनिटी विंग में एक माह में औसतन 300 सामान्य प्रसव होते हैं। टीकाकरण कराने वाले बच्चों और पोषण पुनर्वास में आने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या अलग है।मंडलायुक्त से की लिफ्ट खराब होने की शिकायतसोमवार को मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने मैरटरनिटी विंग में बने एमएनसीयू का फीता काटकर उद्घाटन किया था। अस्पताल में लिफ्ट है लेकिन गर्भवतियों अथवा मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।प्रीति, निवासी जैराई, हयातनगरमुझे रैंप पर चढ़कर ही दूसरी मंजिल पर आना पड़ा।
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Maternity wing lift deteriorated condition of pregnant women
- फोटो : CHANDAUSI
विस्तार
मैटरनिटी विंग की लिफ्ट खराब होने से गर्भवतियों व प्रसूताओं की हालत पस्त
सीएचसी चंदौसी की मैटरनिटी विंग के भवन में मरीजों की सुविधा के लगी लिफ्ट पिछले चार साल से खराब है। इसके चलते अस्पताल में प्रसव और जांच के लिए आने वाली गर्भवतियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें रैंप अथवा जीने की सीढ़ी चढ़कर जाना पड़ता है। विभागीय अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
चंदौसी सीएचसी में 2017 में 30 बेड की मैटरनिटी विंग बनाई गई थी। इसका निर्माण करीब 2.60 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था। विंग में गर्भवती महिलाओं के प्रसव, उपचार, नवजात शिशुओं के उपचार, कुपोषित बच्चों को भर्ती करने के लिए पोषण पुनर्वास केेंद्र यह सभी सुविधाएं दूसरी व तीसरी मंजिल पर हैं। दूसरी व तीसरी मंजिल पर मरीजों को लेकर जाने व नीचे लाने के लिए लिफ्ट बनाई गई है। भवन बनने के कुछ माह बाद ही यह लिफ्ट खराब हो गई थी। अब दूसरी व तीसरी मंजिल पर जाने के लिए गर्भवतियों और प्रसूताओं को परेशानी उठा रैंप अथवा सीढ़ी का सहारा लेकर जाना होता है।
एक माह में होते हैं 300 प्रसव
मैटरनिटी विंग में एक माह में औसतन 300 सामान्य प्रसव होते हैं। इनके अलावा रोजाना करीब 50 गर्भवतियां टीकाकरण व अन्य जांच के लिए आती हैं। टीकाकरण कराने वाले बच्चों और पोषण पुनर्वास में आने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या अलग है।
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मंडलायुक्त से की लिफ्ट खराब होने की शिकायत
सोमवार को मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने मैरटरनिटी विंग में बने एमएनसीयू का फीता काटकर उद्घाटन किया था। उस समय भी लोगों ने उनके सामने लिफ्ट खराब होने की समस्या रखी थी। उन्होंने भी शीघ्र ही लिफ्ट को दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया था।
गर्भवतियों को चलने में दिक्कत होती है। खास तौर से सीढ़ी अथवा रैंप पर चढ़ने में। अस्पताल में लिफ्ट है लेकिन गर्भवतियों अथवा मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रीति, निवासी जैराई, हयातनगर
मुझे रैंप पर चढ़कर ही दूसरी मंजिल पर आना पड़ा। बहुत अधिक दर्द व परेशानी हुई। अस्पताल में बीमार अथवा गर्भवतियों को दूसरी मंजिल पर जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है।
डोली, निवासी ओरछी
खराब लिफ्ट को सही कराने के लिए एडी मुरादाबाद कार्यालय शिकायत की गई थी। वहां से तकनीकी टीम को सही कराने के लिए भेजा गया है। लिफ्ट टीक करने का कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही मरीजों को इसकी सुविधा मिलने लगेगी।
डॉ. हरवेंद्र सिंह, एमओआईसी सीएचसी, चंदौसी
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सीएचसी चंदौसी की मैटरनिटी विंग के भवन में मरीजों की सुविधा के लगी लिफ्ट पिछले चार साल से खराब है। इसके चलते अस्पताल में प्रसव और जांच के लिए आने वाली गर्भवतियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें रैंप अथवा जीने की सीढ़ी चढ़कर जाना पड़ता है। विभागीय अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
चंदौसी सीएचसी में 2017 में 30 बेड की मैटरनिटी विंग बनाई गई थी। इसका निर्माण करीब 2.60 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था। विंग में गर्भवती महिलाओं के प्रसव, उपचार, नवजात शिशुओं के उपचार, कुपोषित बच्चों को भर्ती करने के लिए पोषण पुनर्वास केेंद्र यह सभी सुविधाएं दूसरी व तीसरी मंजिल पर हैं। दूसरी व तीसरी मंजिल पर मरीजों को लेकर जाने व नीचे लाने के लिए लिफ्ट बनाई गई है। भवन बनने के कुछ माह बाद ही यह लिफ्ट खराब हो गई थी। अब दूसरी व तीसरी मंजिल पर जाने के लिए गर्भवतियों और प्रसूताओं को परेशानी उठा रैंप अथवा सीढ़ी का सहारा लेकर जाना होता है।
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एक माह में होते हैं 300 प्रसव
मैटरनिटी विंग में एक माह में औसतन 300 सामान्य प्रसव होते हैं। इनके अलावा रोजाना करीब 50 गर्भवतियां टीकाकरण व अन्य जांच के लिए आती हैं। टीकाकरण कराने वाले बच्चों और पोषण पुनर्वास में आने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या अलग है।
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मंडलायुक्त से की लिफ्ट खराब होने की शिकायत
सोमवार को मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने मैरटरनिटी विंग में बने एमएनसीयू का फीता काटकर उद्घाटन किया था। उस समय भी लोगों ने उनके सामने लिफ्ट खराब होने की समस्या रखी थी। उन्होंने भी शीघ्र ही लिफ्ट को दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया था।
गर्भवतियों को चलने में दिक्कत होती है। खास तौर से सीढ़ी अथवा रैंप पर चढ़ने में। अस्पताल में लिफ्ट है लेकिन गर्भवतियों अथवा मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रीति, निवासी जैराई, हयातनगर
मुझे रैंप पर चढ़कर ही दूसरी मंजिल पर आना पड़ा। बहुत अधिक दर्द व परेशानी हुई। अस्पताल में बीमार अथवा गर्भवतियों को दूसरी मंजिल पर जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है।
डोली, निवासी ओरछी
खराब लिफ्ट को सही कराने के लिए एडी मुरादाबाद कार्यालय शिकायत की गई थी। वहां से तकनीकी टीम को सही कराने के लिए भेजा गया है। लिफ्ट टीक करने का कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही मरीजों को इसकी सुविधा मिलने लगेगी।
डॉ. हरवेंद्र सिंह, एमओआईसी सीएचसी, चंदौसी