मेजर जेपी सिंह मुरादाबाद की सियासत की बेहद दिलचस्प शख्सियत हैं। कॅरिअर का शुरुआती हिस्सा फौज में गुजरा और उसके बाद सियासत की बीहड़ दुनिया में उतर आए। दोनों ही क्षेत्रों में मेजर ने सफल पारी खेली। जब फौज में थे तो 1971 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों से लोहा लेने का मौका मिला।
मेजर जेपी सिंह इंदिरा गांधी के संपर्क में आने के बाद कांग्रेस की ओर से सियासी मैदान में उतरे मगर वह प्रदेश में कांग्रेस के लगातार कमजोर होते चले जाने का दौर था। बदलते सियासी मौसम को भांपते हुए मेजर भाजपा की नाव पर सवार हो गए और इस दौरान 1991 और 1996 में दो बार पार्टी की ओर से विधायक रहे। बाद में जब भाजपा में पूछ घटी तो बाकी सियासी घाटों का पानी पी आए।
अब फिर भाजपा में हैं, मगर हाशिए पर। अपने 35-40 साल के सियासी सफर में मेजर को इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और चंद्रशेखर से लेकर अटल बिहारी बाजपेयी तक तमाम शख्सियतों को नजदीक जाने का मौका मिला।
80 साल से ज्यादा के हो चुके मेजर जब अपनी जिंदगी के किस्से सुनाने बैठते हैं तो भारतीय राजनीति की तमाम बड़ी शख्सियतों के व्यक्तित्व के नए पहलू सामने आते हैं। हाल ही में मेजर जेपी सिंह ने अपनी अतरंगी जिंदगी से जुड़े तमाम किस्से अमर उजाला से साझा किए।
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मेजर जेपी सिंह पूर्व विधायक मुरादाबाद
- फोटो : संवाद
बांग्लादेश में ऑपरेशन शुरू हो चुका था। मैं फौज में था। हम नगालैंड से सीधे बांग्लादेश पहुंचे थे। जनरल सगत सिंह हमारे इंचार्ज थे। उन्होंने पूरा ऑपरेशन संभाला। हमें ब्रह्मपुत्र नदी पार करनी थी, पर नावें नहीं मिलीं। केले के पेड़ काटकर हम राफ्ट बनाकर नदी पार कर गए। नदी पार होते ही लड़ाई शुरू हो गई। ऊपर से विमान हमला कर रहे थे और नीचे हमारी बटालियन लड़ रही थी।
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मेजर जेपी सिंह पूर्व विधायक मुरादाबाद
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बंकरों में जो नजारा मिला वह दिल तोड़ देने वाला था। पाकिस्तानी सैनिक महिलाओं पर अत्याचार कर रहे थे। हमारे पास हथियार सीमित थे, लेकिन आर्टिलरी की मदद से हमने भारी फायर किया। तुंगी जो ढाका से करीब 12 किलोमीटर दूर था वहां बहुत भयंकर लड़ाई चल रही थी। इसी बीच हमारे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ने पाकिस्तानी सेना से सरेंडर करवा दिया।
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मेजर जेपी सिंह पूर्व विधायक मुरादाबाद
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फिर हमें आदेश मिला कि शेख मुजीबुर्रहमान के घर जाकर उनके परिवार को सुरक्षित बाहर निकालो। हमने उनका परिवार रेस्क्यू किया। शेख मुजीबुर्रहमान उस समय पाकिस्तान की जेल में थे। उनके परिवार ने हमें बहुत धन्यवाद दिया। चाय और ड्राई फ्रूट देने की कोशिश की, पर हमने कुछ नहीं लिया। उन्होंने मुझे एक गोल्ड वॉच दी। वह घड़ी आज भी मेरे पास है।
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मेजर जेपी सिंह पूर्व विधायक मुरादाबाद
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जब मैं पूरी रात खड़ा रहा इंदिरा जी के घर के बाहर
इंदिरा जी का एक किस्सा आज भी आंखों के सामने ताजा है। वह लद्दाख के दौरे पर थीं और मैं उस समय डिप्टी कमांडेंट था। अचानक मुझे लाइजनिंग ऑफिसर के तौर पर काम करने का आदेश मिला। मीटिंग खत्म होते-होते मैं हवाई जहाज में चढ़ा।
मगर इतने में दरवाजा बंद हो गया और विमान दिल्ली के लिए रवाना हो गया। मैं बाहर नहीं आ सकता था, इसलिए सीधे दिल्ली पहुंचा। सब चले गए मैं अकेला रह गया। वहां किसी को नहीं जानता था। पूरी रात इंदिरा जी के घर के बाहर खड़ा रहा। उस समय सिक्योरिटी इतनी कड़ी नहीं थी।
सुबह जब इंदिरा जी मॉर्निंग वॉक पर आईं तो मैंने सलामी दी। उन्होंने हैरानी से पूछा तुम यहाँ कैसे। मैंने पूरा वाकया बताया। इसके बाद धवन साहब से भी मेरी मुलाकात हुई और कुछ दिन बाद मैंने फौज से इस्तीफे का आवेदन दे दिया, पर उसे तुरंत स्वीकार नहीं किया गया। बाद में राजीव गांधी से मुलाकात हुई। अंततः सारे कागजात देने पर ही फाइनल रिटायरमेंट मिला।