{"_id":"6ac959fdfdcae4b06a0689ab","slug":"lord-parashurama-became-enraged-when-shri-ram-broke-shivas-bow-thakurdwara-news-c-277-1-smbd1007-115848-2026-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष तो क्रोधित हो उठे भगवान परशुराम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष तो क्रोधित हो उठे भगवान परशुराम
Sat, 10 Oct 2026 02:47 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sat, 10 Oct 2026 02:47 AM IST
विज्ञापन
कांठ। प्रशासन की ओर से गठित श्री रामलीला मंचन अस्थायर समिति की निगरानी में नगर में चल रहे 117वें श्री रामलीला में श्री भोले बाबा आदर्श रामलीला-रासलीला नाटक कला मंडल चंदौसी के कलाकारों ने शुक्रवार को रंगमंच पर धनुष यज्ञ और सीता स्वंयवर का सुंदर मंचन किया।
इधर लंकापति रावण भी इस स्वयंवर में आ गया। उसे शिव धनुष उठाने से रोकने के लिए बाणासुर ने काफी प्रयास किया। जब रावण नहीं माना तो आकाशवाणी हुई और रावण लंका को वापस लौट गया। स्वंयवर में सभी राजा हार थक गए, लेकिन किसी से भी शिव धुनष नहीं उठा।
अंत में महामुनि विश्वामित्र ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को आदेश दिया और जिस पर उन्होंने धुनष को खंड-खंड कर दिया। जिसके बाद सीता ने श्रीराम के गले में वर माला डाली दी लेकिन धनुष टूटने के धमाके से भगवान परशुराम की तपस्या भंग हो गई, वह तिलमिला उठे और क्रोधित हो सीधे जनक महल पहुंच गए। यहां लक्ष्मण की परशुराम से तीखी बहस हुई। इसके बाद परशुराम भगवान श्रीराम को पहचान गए।
विज्ञापन
शुक्रवार को मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि सहकारी समिति के सभापति सचिन चाैहान और संचालन प्रदीप कुमार बिश्नोई ने किया। मंचन की व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई, प्रदीप बिश्नोई, सनी बिश्नोई, डॉ. जितेंद्र सिंह, अंकित शर्मा, विजय चौहान सीटू, त्रिवेद कुमार, इंद्रजीत सिंह बिश्नोई, सुशील नम्बरदार, पिंटू बिश्नोई आदि रहे।
विज्ञापन
इधर लंकापति रावण भी इस स्वयंवर में आ गया। उसे शिव धनुष उठाने से रोकने के लिए बाणासुर ने काफी प्रयास किया। जब रावण नहीं माना तो आकाशवाणी हुई और रावण लंका को वापस लौट गया। स्वंयवर में सभी राजा हार थक गए, लेकिन किसी से भी शिव धुनष नहीं उठा।
विज्ञापन
अंत में महामुनि विश्वामित्र ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को आदेश दिया और जिस पर उन्होंने धुनष को खंड-खंड कर दिया। जिसके बाद सीता ने श्रीराम के गले में वर माला डाली दी लेकिन धनुष टूटने के धमाके से भगवान परशुराम की तपस्या भंग हो गई, वह तिलमिला उठे और क्रोधित हो सीधे जनक महल पहुंच गए। यहां लक्ष्मण की परशुराम से तीखी बहस हुई। इसके बाद परशुराम भगवान श्रीराम को पहचान गए।
विज्ञापन
शुक्रवार को मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि सहकारी समिति के सभापति सचिन चाैहान और संचालन प्रदीप कुमार बिश्नोई ने किया। मंचन की व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई, प्रदीप बिश्नोई, सनी बिश्नोई, डॉ. जितेंद्र सिंह, अंकित शर्मा, विजय चौहान सीटू, त्रिवेद कुमार, इंद्रजीत सिंह बिश्नोई, सुशील नम्बरदार, पिंटू बिश्नोई आदि रहे।