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किसान की हत्या में तीन दोस्तों को आजीवन कारावास
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मुरादाबाद। पंद्रह साल पहले की गई किसान की हत्या में अदालत ने तीन दोस्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
संभल जनपद के बहजोई थानाक्षेत्र के पृथ्वीपुर निवासी राजपाल ने 14 फरवरी 2006 को बहजोई थाने में केस दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने कहा था कि उनके बेटे सुभाष और दिनेश पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के लिएराजघाट गए थे। लौटते समय सुभाष ने फोन पर बताया था कि वह रात में अपनी रिश्तेदारी तुरतीपुर गांव में रुक जाएंगे, लेकिन तुरतीपुर में केवल दिनेश ही रुका था।
सुभाष वापस अपने घर की ओर आ रहा था। रास्ते में उसके दोस्त किशनपाल व जबर सिंह मिल गए थे, जिनके साथ वह तुरतीपुर आ गया। यहां राम खिलाड़ी पुत्र डालचंद, श्योराज पुत्र रामलाल निवासी बल्लमपुर व राजू पुत्र गिरधर निवासी गांव चितौरा, थाना बहजोई पहले से मौजूद थे। इसके बाद किशनपाल और जबर सिंह उक्त चारों को छोड़कर अपने घर चले गए थे।
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अगले दिन दिनांक 14 फरवरी 2006 को अतरासी व पंवासा के बीच सुबह के समय सुभाष की लाश सड़क पर मिली थी। उसके सीने पर गोली का निशान था। थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि आरोपी रामखिलाड़ी सुभाष की बहन पर बुरी नजर रखता था। सुभाष इसका विरोध करता था। इस कारण रामखिलाड़ी सुभाष से रंजिश रखने लगा।
13 फरवरी 2006 की रात्रि मौका पाकर रामखिलाड़ी ने अपने दोनों साथियों के साथ मिलकर सुभाष की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उक्त मुकदमा अपर जिला जज प्रथम अरविंद कुमार सिंह द्वितीय की अदालत में सुना गया। इसमें बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। घटना का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजराज सिंह ने अदालत को बताया कि तीनों आरोपी सुभाष से रंजिश रखते थे। इस बात को साबित करने के लिए 11 गवाह अदालत में पेश किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रामखिलाड़ी, श्योराज व राजू को हत्या का दोषी करार देते हुए तीनों को आजीवन कारावास केसाथ प्रत्येक पर 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनवाई है।
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संभल जनपद के बहजोई थानाक्षेत्र के पृथ्वीपुर निवासी राजपाल ने 14 फरवरी 2006 को बहजोई थाने में केस दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने कहा था कि उनके बेटे सुभाष और दिनेश पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के लिएराजघाट गए थे। लौटते समय सुभाष ने फोन पर बताया था कि वह रात में अपनी रिश्तेदारी तुरतीपुर गांव में रुक जाएंगे, लेकिन तुरतीपुर में केवल दिनेश ही रुका था।
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सुभाष वापस अपने घर की ओर आ रहा था। रास्ते में उसके दोस्त किशनपाल व जबर सिंह मिल गए थे, जिनके साथ वह तुरतीपुर आ गया। यहां राम खिलाड़ी पुत्र डालचंद, श्योराज पुत्र रामलाल निवासी बल्लमपुर व राजू पुत्र गिरधर निवासी गांव चितौरा, थाना बहजोई पहले से मौजूद थे। इसके बाद किशनपाल और जबर सिंह उक्त चारों को छोड़कर अपने घर चले गए थे।
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अगले दिन दिनांक 14 फरवरी 2006 को अतरासी व पंवासा के बीच सुबह के समय सुभाष की लाश सड़क पर मिली थी। उसके सीने पर गोली का निशान था। थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि आरोपी रामखिलाड़ी सुभाष की बहन पर बुरी नजर रखता था। सुभाष इसका विरोध करता था। इस कारण रामखिलाड़ी सुभाष से रंजिश रखने लगा।
13 फरवरी 2006 की रात्रि मौका पाकर रामखिलाड़ी ने अपने दोनों साथियों के साथ मिलकर सुभाष की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उक्त मुकदमा अपर जिला जज प्रथम अरविंद कुमार सिंह द्वितीय की अदालत में सुना गया। इसमें बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। घटना का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजराज सिंह ने अदालत को बताया कि तीनों आरोपी सुभाष से रंजिश रखते थे। इस बात को साबित करने के लिए 11 गवाह अदालत में पेश किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रामखिलाड़ी, श्योराज व राजू को हत्या का दोषी करार देते हुए तीनों को आजीवन कारावास केसाथ प्रत्येक पर 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनवाई है।