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Moradabad News: दस राजकीय इंटर कॉलेजों की लैब बिना उपकरण-केमिकल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jul 2025 01:35 AM IST
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Labs of ten government inter colleges are without equipment and chemicals
मुरादाबाद। जिले के कई राजकीय इंटर कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को बिना प्रैक्टिकल के विज्ञान की पढ़ाई करना मजबूरी बन गया है। कॉलेजों में प्रयोगशालाएं तो हैं, लेकिन उपकरण और केमिकल का अभाव है। कॉलेजों में प्रयोगात्मक कक्षाओं के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
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जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के 470 कॉलेज हैं। इसमें 54 राजकीय इंटर कॉलेज हैं। इसमें 10 ऐसे कॉलेज हैं, जहां पर प्रयोगशालाएं तो हैं लेकिन उपकरण और केमिकल का अभाव है। इसके कारण छात्र-छात्राएं पढ़ने तो जाते हैं लेकिन उन्हें प्रैक्टिकल की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। कॉलेजों के प्रधानाध्यापकों ने बताया कि कॉलेज में जिस समय प्रयोगशाला का निर्माण किया जाता है उस समय प्रैक्टिकल से संबंधित सामान रखे जाते हैं। इसके बाद प्रयोगशाला में अलग से प्रैक्टिकल का सामान उपलब्ध कराने के लिए कभी बजट आता है तो कभी नहीं। नियमित प्रयोगात्मक कक्षाओं का संचालन नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि व्यवस्थित प्रयोगशाला नहीं होने की वजह से प्रयोगात्मक कार्य करवाने में दिक्कत होती है।
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विद्यार्थियों से प्रैक्टिकल के लिए जाते हैं 15 से 25 रुपये
- सरकारी इंटर कॉलेजों में साइंस के विद्यार्थियों से प्रयोगशालाओं में उपकरण समेत अन्य सामान खरीदने के लिए हर साल 15 से 25 रुपये तक लिए जाते है। शुल्क जमा जमा करने के बाद भी विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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प्रयोगशालाओं में इन उपकरण और रसायन का होता है प्रयोग
- कॉलेजों में प्रैक्टिकल के दौरान प्रयोगशालाओं में उपकरण और केमिकल का प्रयोग किया जाता है। उपकरण में बीकर, प्लास्क, टेस्ट ट्यूब, पिपेट, ब्यूरेट, फलन, बर्नर, थर्मामीटर, संदशिका, क्रूसिबल, वॉच ग्राल, टेस्ट ट्यूब होल्डर, स्पैटुला, ड्रॉपर, फिल्टर पेपर, बर्नर, परखनली और प्लास्टिक की बोतलें प्रयोग की जाती हैं। इसके रसायन में अम्ल, क्षार, लवण, सूचक, विलायक, सूचक घोल आदि का उपयोग किया जाता है।
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2024 में आया था प्रयोगशालाओं के सामान खरीदने के लिए बजट
- विभाग के अनुसार, कई साल बाद 2024 में सरकारी कॉलेजों के प्रयोगशालाओं में सामान खरीदने के लिए बजट आया था। लेकिन इस बार अभी तक सरकारी कॉलेज में प्रयोगशालाओं में सामान खरीदने के लिए बजट नहीं आया है।
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-कॉलेजों के प्रयोगशालाओं के लिए सरकार की ओर से फंड न के बराबर आता है। बच्चों से जो शुल्क मिलता है वह नाम मात्र के होता है। इससे प्रयोगशाला में सामान उपलब्ध कराना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगर सरकार की ओर से हर साल फंड मिले तो प्रयोगशालाओं में उपकरण और केमिकल समेत हर सामान उपलब्ध कराया जा सकता है।- राजीव कुमार पाठक, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट)

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- प्रयोगशालाओं में सामान खरीदने के लिए तीन साल में एक बार बजट आता है। जिन कॉलेजों तीन साल पूरे होते हैं उनके बजट जारी हो जाते हैं। - देवेंद्र कुमार पांडेय, डीआईओएस
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