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कोसी की धार ने हाईवे पर पांच घंटे रोकी वाहनों की रफ्तार
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मुरादाबाद। पहाड़ों पर हुई बारिश के बाद रामनगर बैराज और कालागढ़ डैम से पानी रिलीज किए जाने के बाद से जिले की सीमा के निकट बहने वाली कोसी और जिले में बहने वाली रामगंगा का जल स्तर बढ़ गया है। इसके चलते जिले के 14 गांव जहां बाढ़ के पानी से घिर गए हैं वहीं दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर भी कोसी नदी का चार फीट पानी बहने के कारण यात्रियों से भरी बहराइच डिपो की एक बस बहने से बच गई। इसके बाद मंगलवार रात दो बजे से बुधवार सुबह सात बजे तक इस पर वाहनों का आवागमन ठप रहा। मूंढापांडे क्षेत्र में एक मंदिर के पुजारी द्वारा पाले गए छह गोवंशीय पशुओं की बाढ़ के पानी में डूब कर मौत हो गई। रामगंगा का जल स्तर भी बढ़ गया है। जिसके चलते नदी और खतरे के निशान के बीच का दायरा घट कर मात्र 88 सेमी रह गया है।
उफनाई कोसी नदी के पानी ने मंगलवार देर रात रामपुर के निकट स्थित मूंढापांडे क्षेत्र में लखनऊ-दिल्ली हाईवे को भी अपनी चपेट में ले लिया। गनेशघाट के पास हाईवे पर करीब तीन से चार फीट पानी की तेज धार में बहने लगी। इसी बीच मंगलवार रात करीब दो बजे बहराइच डिपो की यात्रियों से भरी एक बस तेज धार के चलते बहने लगी। बमुश्किल कुछ दूर जाकर खाई के पास चालक उसे रोक पाया। इससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। बाद में बस को बैक कर चालक ने उसे सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया। इसके बाद हाईवे पर जो भी वाहन वहां तक पहुंचे उसके चालक उन्हें आगे ले जाने का साहस नहीं जुटा सके। जो भी वहां तक पहुंचे वह खड़े होते गए। जिससे हाईवे पर दोनों ओर जाम की स्थिति बन गई। मूंढापांडे तक वाहनों की लंबी लाइन लग गई। क्षेत्रीय लोगों के बताने पर तमाम वाहन स्वामियों व बस चालकों ने अपने वाहन वाया बिलारी होते हुए निकाल कर गंतव्य को गए। यह सिलसिला सुबह करीब सात बजे तक चलता रहा। स्थानीय पुलिस प्रशासन के मौैके पर पहुंचने और सुबह होने पर बुधवार सुबह सात बजे धीरे-धीरे बड़े वाहनों का इस हाईवे से गुजरना शुरू हुआ। लेकिन छोटे चौपहिया वाहनों का संचालन दोपहर बाद करीब दो बजे से ही सुचारु हो सका। इसके चलते सैकड़ों यात्रियों व राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कालागढ़ बैराज से रामगंगा में पानी रिलीज किए जाने के बाद यहां रामगंगा भी उफान पर है। रामगंगा का जल स्तर बढ़कर 189.72 मीटर पहुंच गया है। जो खतरा निशान 190.60 मीटर से मात्र 88 सेमी दूर है। देर सायं तक नदी का जल स्तर बढ़ रहा था। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एपी सिंह ने बताया कि अगले 24 घंटे में नदी का जल स्तर तेजी के साथ गिरने की संभावना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल नदी के बढ़े जल स्तर से बाढ़ सुरक्षा को लेकर बनाए गए तटबंध आदि पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। जस स्तर कम होने के बाद स्थिति का आंकलन कराया जाएगा। जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक कार्य किया जाएगा।
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1999 में भी मानसून सत्र समाप्त के बाद बारिश से आई थी बाढ़
मुरादाबा। जिले के इतिहास में यह दूसरा ऐसा मौका है जब मानसून सत्र समाप्त होने के बाद अतिवृष्टि के चलते नदियों में पानी डैम व बैराज से रिलीज करना पड़ा हो। जिसके कारण का जल स्तर बढ़ा हो।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाढ़-कटान से संबंधित सभी योजनाएं मानसून सत्र के लिए ही बनाई जाती हैं। इसी के हिसाब से तैयारी भी की जाती है। 15 अक्तूबर तक ही मानसून सत्र रहता है। विभाग में तैनात पुराने कर्मचारी एवं सीचपाल ब्रह्मानंद ने बताया कि जिले के इतिहास में 1999 के बाद यह दूसरा ऐसा मौका है जब मानसून सत्र के बाद बारिश के कारण डैम व बैराज से नदियों में पानी रिलीज किया गया हो और उसके चलते नदी का जल स्तर बढ़ा हो या फिर बाढ़ की स्थिति पैदा हुई हो।
बेबस राहगीरों के चेहरों पर झलक रही थी बेकरारी
- हाईवे पर बाढ़ के पानी के कारण घंटों फंसे रहे लोगों की व्यथा
मुरादाबाद। हाईवे पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण रास्ते में फंसे तमाम बेबस राहगीरों के चेहरों पर जल्द गंतव्य तक जाने की बेकरारी स्पष्ट तौर पर झलक रही थी।
जैतापुर विसाहट निवासी भगवान दास ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार की तबीयत खराब है। वह नया मुरादाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में अपना उपचार करा रहे हैं। जिन्हें देखने वह अपनी पत्नी शान्ति देवी के साथ मंगलवार को गए थे। बुधवार सुबह घर वापस लौट रहे थे तभी भीतखेड़ा मार्ग पर पानी बहता देख दोनों वहीं रुक गए और पानी कम होने का इंतजार दोपहर तक करते रहे। दोनों के चेहरे पर घर जाने की छटपटाहट साफ दिखाई दे रही थी। बोले-शाम तक पानी कम नहीं हुआ तो वापस एक रिश्तेदारी में चले जाएंगे।
गुरमीत सिंह बरेली से मुरादाबाद के लिए बस में सवार होकर यहां पहुंचे। करीब पांच बजे उनकी बस हाईवे पर आए बाढ़ के पानी के कारण रोकनी पड़ी। इसके बाद वह बस से उतर लिए और बैग लादे पैदल ही किसी शाटकट रास्ते की तलाश में चल दिए। रास्ते में जो भी दिखता उससे पूछते कि मुरादाबाद जल्दी पहुंचना है। कोई साधन व रास्ता व साधन बताइए। संभल के टांडा फतेहपुर निवासी मोहन लाल मीरगंज रिश्तेदारी में गए थे, लेकिन बाढ़ में फंस गए। काफी देर भी जब कोई उपाय नहीं सूझा तो पैदल पानी पार कर आगे से किसी सवारी से घर निकलने की बात कह चल पड़े।
---
डीएम ने ट्रैक्टर-ट्राली पर बैठ बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का किया निरीक्षण
मुरादाबाद। कोसी और रामगंगा नदी के उफान पर होने से बाढ़ के खतरे को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार के साथ मंगलवार रामपुर बार्डर पहुंच कर वहां हाईवे पर बह रहे पानी तथा आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का ट्रैक्टर-ट्राली में बैठकर व पैदल चल कर निरीक्षण कर स्थिति जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों ग्राम भीतखेड़ा, ग्राम मनकरा आदि कई ग्रामों का ट्रैक्टर-ट्राली में बैठकर निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से वार्ता करते हुए उन्हें सतर्क रहने की अपील की। इस दौरान डीएम ने क्षेत्र के राशन डीलरों से वहीं पर वीडियों कॉलिंग कर बात की और राशन संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने लोगों से कहा कि इस संकट की घड़ी में जिला प्रशासन आपके साथ है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
डीएम ने इस मौके पर हाईवे पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण नेशनल हाईवे पर फंसे वाहनों को ट्रैक्टर की मदद से सकुशल निकलवाया और नेशनल हाईवे को सुचारु रुप से चालू करवाया। इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, उपजिलाधिकारी सदर प्रशांत तिवारी, तहसीलदार एवं राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एपी सिंह ने बताया कि 15 नवंबर के बाद बाढ़ खंड कार्यालय पर खोला गया कंट्रोल रूम बंद कर दिया गया था। जिसे विभिन्न नदियों का जल स्तर बढ़ने के बाद डीएम के निर्देश पर पुन: खोल दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह कंट्रोल रूम 24 घंटे खुला रहेगा। जिसका नंबर 0591-2435397 है।
14 गांव बाढ़ के पानी से घिरे, 580 परिवार प्रभावित
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ब्लाक ग्राम पंचायत प्रभावित परिवार
मूंढापांडे सिहोरा बाजे 95
मूंढापांडे वरवरा मुस्तकम 93
मूंढापांडे मनकरा 10
मूंढापांडे सहरिया 05
मूंढापांडे गनेशघाट मुस्तकम 15
मूंढापांडे जगरमपुरा 75
मूंढापांडे रनियाठेर 125
मूंढापांडे अहरोला 20
मूंढापांडे हिरनखेड़ा मुस्तकम 42
मूंढापांडे भीत खेड़ा 32
मूंढापांडे गवईखेड़ा 25
मूंढापांडे कोहनकू 20
मूंढापांडे लालपुर तितरी 20
मूंढापांडे छतर नक्शाखेड़ा 03
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कुल: 580
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उफनाई कोसी नदी के पानी ने मंगलवार देर रात रामपुर के निकट स्थित मूंढापांडे क्षेत्र में लखनऊ-दिल्ली हाईवे को भी अपनी चपेट में ले लिया। गनेशघाट के पास हाईवे पर करीब तीन से चार फीट पानी की तेज धार में बहने लगी। इसी बीच मंगलवार रात करीब दो बजे बहराइच डिपो की यात्रियों से भरी एक बस तेज धार के चलते बहने लगी। बमुश्किल कुछ दूर जाकर खाई के पास चालक उसे रोक पाया। इससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। बाद में बस को बैक कर चालक ने उसे सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया। इसके बाद हाईवे पर जो भी वाहन वहां तक पहुंचे उसके चालक उन्हें आगे ले जाने का साहस नहीं जुटा सके। जो भी वहां तक पहुंचे वह खड़े होते गए। जिससे हाईवे पर दोनों ओर जाम की स्थिति बन गई। मूंढापांडे तक वाहनों की लंबी लाइन लग गई। क्षेत्रीय लोगों के बताने पर तमाम वाहन स्वामियों व बस चालकों ने अपने वाहन वाया बिलारी होते हुए निकाल कर गंतव्य को गए। यह सिलसिला सुबह करीब सात बजे तक चलता रहा। स्थानीय पुलिस प्रशासन के मौैके पर पहुंचने और सुबह होने पर बुधवार सुबह सात बजे धीरे-धीरे बड़े वाहनों का इस हाईवे से गुजरना शुरू हुआ। लेकिन छोटे चौपहिया वाहनों का संचालन दोपहर बाद करीब दो बजे से ही सुचारु हो सका। इसके चलते सैकड़ों यात्रियों व राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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कालागढ़ बैराज से रामगंगा में पानी रिलीज किए जाने के बाद यहां रामगंगा भी उफान पर है। रामगंगा का जल स्तर बढ़कर 189.72 मीटर पहुंच गया है। जो खतरा निशान 190.60 मीटर से मात्र 88 सेमी दूर है। देर सायं तक नदी का जल स्तर बढ़ रहा था। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एपी सिंह ने बताया कि अगले 24 घंटे में नदी का जल स्तर तेजी के साथ गिरने की संभावना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल नदी के बढ़े जल स्तर से बाढ़ सुरक्षा को लेकर बनाए गए तटबंध आदि पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। जस स्तर कम होने के बाद स्थिति का आंकलन कराया जाएगा। जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक कार्य किया जाएगा।
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1999 में भी मानसून सत्र समाप्त के बाद बारिश से आई थी बाढ़
मुरादाबा। जिले के इतिहास में यह दूसरा ऐसा मौका है जब मानसून सत्र समाप्त होने के बाद अतिवृष्टि के चलते नदियों में पानी डैम व बैराज से रिलीज करना पड़ा हो। जिसके कारण का जल स्तर बढ़ा हो।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाढ़-कटान से संबंधित सभी योजनाएं मानसून सत्र के लिए ही बनाई जाती हैं। इसी के हिसाब से तैयारी भी की जाती है। 15 अक्तूबर तक ही मानसून सत्र रहता है। विभाग में तैनात पुराने कर्मचारी एवं सीचपाल ब्रह्मानंद ने बताया कि जिले के इतिहास में 1999 के बाद यह दूसरा ऐसा मौका है जब मानसून सत्र के बाद बारिश के कारण डैम व बैराज से नदियों में पानी रिलीज किया गया हो और उसके चलते नदी का जल स्तर बढ़ा हो या फिर बाढ़ की स्थिति पैदा हुई हो।
बेबस राहगीरों के चेहरों पर झलक रही थी बेकरारी
- हाईवे पर बाढ़ के पानी के कारण घंटों फंसे रहे लोगों की व्यथा
मुरादाबाद। हाईवे पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण रास्ते में फंसे तमाम बेबस राहगीरों के चेहरों पर जल्द गंतव्य तक जाने की बेकरारी स्पष्ट तौर पर झलक रही थी।
जैतापुर विसाहट निवासी भगवान दास ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार की तबीयत खराब है। वह नया मुरादाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में अपना उपचार करा रहे हैं। जिन्हें देखने वह अपनी पत्नी शान्ति देवी के साथ मंगलवार को गए थे। बुधवार सुबह घर वापस लौट रहे थे तभी भीतखेड़ा मार्ग पर पानी बहता देख दोनों वहीं रुक गए और पानी कम होने का इंतजार दोपहर तक करते रहे। दोनों के चेहरे पर घर जाने की छटपटाहट साफ दिखाई दे रही थी। बोले-शाम तक पानी कम नहीं हुआ तो वापस एक रिश्तेदारी में चले जाएंगे।
गुरमीत सिंह बरेली से मुरादाबाद के लिए बस में सवार होकर यहां पहुंचे। करीब पांच बजे उनकी बस हाईवे पर आए बाढ़ के पानी के कारण रोकनी पड़ी। इसके बाद वह बस से उतर लिए और बैग लादे पैदल ही किसी शाटकट रास्ते की तलाश में चल दिए। रास्ते में जो भी दिखता उससे पूछते कि मुरादाबाद जल्दी पहुंचना है। कोई साधन व रास्ता व साधन बताइए। संभल के टांडा फतेहपुर निवासी मोहन लाल मीरगंज रिश्तेदारी में गए थे, लेकिन बाढ़ में फंस गए। काफी देर भी जब कोई उपाय नहीं सूझा तो पैदल पानी पार कर आगे से किसी सवारी से घर निकलने की बात कह चल पड़े।
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डीएम ने ट्रैक्टर-ट्राली पर बैठ बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का किया निरीक्षण
मुरादाबाद। कोसी और रामगंगा नदी के उफान पर होने से बाढ़ के खतरे को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार के साथ मंगलवार रामपुर बार्डर पहुंच कर वहां हाईवे पर बह रहे पानी तथा आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का ट्रैक्टर-ट्राली में बैठकर व पैदल चल कर निरीक्षण कर स्थिति जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों ग्राम भीतखेड़ा, ग्राम मनकरा आदि कई ग्रामों का ट्रैक्टर-ट्राली में बैठकर निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से वार्ता करते हुए उन्हें सतर्क रहने की अपील की। इस दौरान डीएम ने क्षेत्र के राशन डीलरों से वहीं पर वीडियों कॉलिंग कर बात की और राशन संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने लोगों से कहा कि इस संकट की घड़ी में जिला प्रशासन आपके साथ है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
डीएम ने इस मौके पर हाईवे पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण नेशनल हाईवे पर फंसे वाहनों को ट्रैक्टर की मदद से सकुशल निकलवाया और नेशनल हाईवे को सुचारु रुप से चालू करवाया। इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, उपजिलाधिकारी सदर प्रशांत तिवारी, तहसीलदार एवं राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एपी सिंह ने बताया कि 15 नवंबर के बाद बाढ़ खंड कार्यालय पर खोला गया कंट्रोल रूम बंद कर दिया गया था। जिसे विभिन्न नदियों का जल स्तर बढ़ने के बाद डीएम के निर्देश पर पुन: खोल दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह कंट्रोल रूम 24 घंटे खुला रहेगा। जिसका नंबर 0591-2435397 है।
14 गांव बाढ़ के पानी से घिरे, 580 परिवार प्रभावित
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ब्लाक ग्राम पंचायत प्रभावित परिवार
मूंढापांडे सिहोरा बाजे 95
मूंढापांडे वरवरा मुस्तकम 93
मूंढापांडे मनकरा 10
मूंढापांडे सहरिया 05
मूंढापांडे गनेशघाट मुस्तकम 15
मूंढापांडे जगरमपुरा 75
मूंढापांडे रनियाठेर 125
मूंढापांडे अहरोला 20
मूंढापांडे हिरनखेड़ा मुस्तकम 42
मूंढापांडे भीत खेड़ा 32
मूंढापांडे गवईखेड़ा 25
मूंढापांडे कोहनकू 20
मूंढापांडे लालपुर तितरी 20
मूंढापांडे छतर नक्शाखेड़ा 03
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कुल: 580