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संभल: समृद्ध इतिहास के धरोहर को खुद में समेटे हुए है यूपी का यह जिला

Fri, 30 Aug 2019 01:36 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: Prachi Priyam Updated Fri, 30 Aug 2019 01:36 PM IST
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Know the interesting story of Sambhal district of UP and its history
संभल - फोटो : Social Media

शासकों और सम्राटों का घर माने जाने वाले उत्तर प्रदेश के संभल जिले का इतिहास समृद्ध रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तशिल्प उत्पादों के मामले में प्रतिष्ठित और मशहूर संभल 28 सितंबर, 2011 को उत्तर प्रदेश के तीन नए जिलों में से एक के तौर पर सामने आया। 

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प्रचलित लोक मान्यताओं के अनुसार सतयुग में इस जगह का नाम सत्यव्रत था, त्रेता में महदगिरि, द्वापर में पिंगल और कलयुग में इसका नाम संभल पड़ा। संभल में बनने वाले हस्तशिल्प उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मशहूर हैं। यहां निर्मित किए जाने वाले हॉर्न-बोन उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात भी किए जाते हैं। 
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वास्तव में संभल के कारीगरों को विश्व स्तर पर बेहतरीन सजावटी सामान के उत्पादन के लिए जाना जाता है। संभल में हस्तशिल्पियों की बनाई गई शानदार ज्वेलरी को सात समंदर पार विदेशी भी पसंद करते हैं, क्योंकि ये दाम में कम और दिखने में आकर्षक होती हैं। संभल की हड्डी-सींग के डेकोरेशन से बनने वाली तमाम ज्वेलरी संसार भर में प्रसिद्ध है।
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संभल भले ही एक छोटा सा शहर है, लेकिन पर्यटन स्थलों में इसकी अच्छी खासी हिस्सेदारी है। ऐतिहासिक मंदिर और मस्जिद हों या दूसरी इमारतें... इस शहर के कदम-कदम में इतिहास बसता है। आइए जानते हैं यहां के समृद्ध इतिहास के बारे में।

पुराना किला

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संभल के फिरोजपुर गांव में बना ऐतिहासिक पुराना किला - फोटो : अमर उजाला

मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में संभल से करीब सात किलोमीटर दूर संभल-मुरादाबाद मार्ग पर सन् 1650-1655 के बीच संभल की सोत नदी के किनारे सैय्यद फिरोज ने किला बनवाया गया। फिरोजशाह, शाहजहां के शासनकाल में संभल क्षेत्र के गवर्नर रहे रुस्तमखां दक्खिनी के फौजी हुआ करते थे। उन्हें शाहजहां ने सोत नदी के किनारे संभल में एक हजार बीघा जमीन दी थी। उसी जमीन पर किला बनाया गया था, जिसे पुराना किला के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में ये किला एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित है। किले का द्वार यहां आने वाले पर्यटकों को मुगलकालीन स्थापत्य कला की याद दिलाता है।

तोता मैना की कब्र

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तोता मैना की कब्र - फोटो : अमर उजाला

संभल नगर से तीन किलोमीटर दूर संभल-गवां मार्ग पर एक कब्र है। लोक मान्यता में ये कब्र तोता-मैना की मुहब्बत की निशानी के तौर पर प्रसिद्ध है। कब्र को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। संभल के इतिहास पर शोध करने वाले फुरकान संभली के मुताबिक उन्होंने कब्र पर लिखी इबारत पढ़ी है। इसमें एक तरफ आयतल कुर्सी लिखी है। एक तरफ दुआ और एक तरफ कब्र के बनने का समय हिजरी 939 लिखा हुआ है।

बावड़ी

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जामा मस्जिद संभल - फोटो : Social Media

तोता-मैना की कब्र के करीब ही दर्शनीय स्थलों में प्रसिद्ध बावड़ी है। बावड़ी में लोग सीढ़ी से उतर कर नीचे तक जाते हैं। हालांकि, इस स्थान को संरक्षित करने की जरूरत है।

जामा मस्जिद संभल

जामा मस्जिद संभल के सबसे पुराने स्मारकों में से एक है। जामा मस्जिद वास्तुकला का नमूना और दर्शनीय स्थल है। ये मस्जिद पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

वहीं संभल जिले के चंदौसी में पांच दशक से भव्य गणेश मेले का आयोजन किया जाता है। मेले को देखने के लिए देश-विदेश के लोग उत्सुक रहते हैं। हर साल तमाम विदेशी पर्यटक भी मेला देखने आते हैं। मेले में झांकियों के साथ निकलने वाली रथ यात्रा आकर्षण का केंद्र रहती है। 

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