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कवियों और शायरों की महफिल में गूंजी जश्न ए जुबां

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 28 Aug 2022 02:42 AM IST
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Jashn e Jubaan echoed in the gathering of poets and poets
Jashn e Jubaan echoed in the gathering of poets and poets
मुरादाबाद। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शनिवार की शाम जश्न ए जुबां में कविओं और शायरों की महफिल सजी। एक मंच पर देश व समाज की सच्ची तस्वीर पेश कर श्रोताओं के दिल ही नहीं, बल्कि रूह तक दस्तक दी। प्रो. वसीम बरेलवी, मंसूर उस्मानी, माहेश्वर तिवारी ने अपनी रचनाओं से वरिष्ठजनों के ही नहीं, बल्कि युवाओं के मन को छू लिया।
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पंचायत भवन में योमीना फाउंडेशन की ओर से हुए कवि सम्मेलन, मुशायरा एवं सम्मान समारोह में कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से समां बांधा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. वसीम बरेलवी ने किया। मयंक शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद शुरू हुआ रचनाओं का दौर देर रात तक चलता रहा। प्रो. वसीम बरेलवी ने घुटन बढ़ने का खतरा हो तो दर खोला नहीं जाता, जहां खामोश रहना हो वहां बोला नहीं जाता, नूर ककरालवी ने दिल तोड़ने से पहले जरा सोच लीजिए, रहना पड़ेगा आपको टूटे मकान में, पंडित जमुना प्रसाद उपाध्याय ने नदी के घाट पर भी गर सियासी लोग बस जाएं तो प्यासे होंठ एक-एक बूंद पानी को तरस जाएं, पवन कुमार ने किसी ने रखा है बाजार में सजा के मुझे कोई खरीद ले कीमत मेरी चुका के मुझे रचना प्रस्तुत की। वरिष्ठ शायर मंसूर उस्मानी ने इतने चेहरे थे उसके चेहरे पर आइना तंग आके टूट गया रचना सुनाई। नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी ने हमें तबाह जो करने को आंधियां निकलीं अजीब घर है खिड़कियां ही खिड़कियां निकलीं रचना सुनाई। डॉ. सोनरूपा विशाल ने पिता के व्यक्तित्व को समर्पित जीवन से लबरेज हिमालय जैसे थे पुरजोर पिता मैं उनसे जन्मीं नदिया हूं मेरे दोनों छोर पिता गीत सुनाया। मदन मोहन दानिश ने है इंतिजार मुकद्दर तो इंतिजार करो पर अपने दिल की फिजा को भी खुश गवार करो, डॉ. मधु चतुर्वेदी ने आप चाहें तो मेरे गम को फसाना कहलें सच तो यह है कि जो भोगा है गाया हमने, आलोक श्रीवास्तव ने जरा सा तुमसे क्या आगे बढ़ा हूं तुम्हारी आंख में चुभने लगा हूं रचना प्रस्तुत की।
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इन्होंने भी प्रस्तुत कीं अपनी रचनाएं
जिया जमीर ने किसी बच्चे से पिंजरा खुल गया है, परिंदों की रिहाई हो रही है, कुंवर रंजीत चौहान ने सवालों को संभाला जा रहा है, जवाबों को उछाला जा रहा है मुसल्लसल याद में रोकर हमारी हमें दिल से निकाला जा रहा है रचना सुनाई। डॉ. राहुल अवस्थी ने लफ्ज दर लफ्ज लगता रहता है वो अदब का निशान दिल में है, अब ये नुक्कड़ पे कहां मिलती है शायरी की दुकान दिल में है रचनाएं प्रस्तुत कीं। मनीष शुक्ल ने कागजों पर मुफलिसी के मोर्चे सर हो गए और कहने के लिए हालात बेहतर हो गए प्यास की शिद्दत के मारों की अजीयत देखिए खुश्क आंखों में नदी के ख्वाब पत्थर हो गए रचना सुनाई। कार्यक्रम में संयोजक अभिनव चौहान अभिन्न की कहानी संग्रह सिर्फ तुम का भी विमोचन किया गया।
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कार्यक्रम में दिया गया सम्मान
प्रो. वसीम बरेलवी को आचार्य मम्मट सम्मान, माहेश्वर तिवारी को आचार्य आनंदवर्धन सम्मान, डॉ. महेश दिवाकर को आचार्य वामन सम्मान, डॉ. मधु चतुर्वेदी को ऋषि गार्गी सम्मान और मंसूर उस्मानी को आचार्य कुंतक सम्मान दिया गया।

ये रहे मौजूद
फाउंडेशन की अध्यक्ष अंजली चौहान, योगेंद्र चौहान, मीना चौहान, प्रो. हरबंश दीक्षित, डॉ. विशेष गुप्ता, आशुतोष, शरद कौशिक एड., संजीव आकांक्षी, दीक्षांत चौधरी, राजेश रस्तोगी, शिव मिगलानी, डॉ. मनोज रस्तोगी, दुष्यंत, विदुला सिंह आदि मौजूद रहे।

Jashn e Jubaan echoed in the gathering of poets and poets

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Jashn e Jubaan echoed in the gathering of poets and poets

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मुरादाबाद के पंचायत भवन सभागार में जश्न एजुबां कवि सम्मेलन मौजूद अतिथि। अमर उजाला

मुरादाबाद के पंचायत भवन सभागार में जश्न एजुबां कवि सम्मेलन मौजूद अतिथि। अमर उजाला

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