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अंतर्जनपदीय डकैती गिरोह का पर्दाफाश
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मुरादाबाद। दूसरे जनपदोें में जाकर चोरी व डकैती की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक गिरोह के तीन बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अभी भी गिरोह के चार बदमाश फरार बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार तीन बदमाशों में एक मुरादाबाद तथा दो जनपद शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। पुलिस ने तीनों बदमाशों के पास से चोरी किए माल की बरामदगी करते हुए तीनों को कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
थाना मझोला प्रभारी राकेश कुमार सिंह के मुताबिक पुलिस ने एक गिरोह के तीन बदमाशों को खुशहालपुर स्थित एक डेरे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया कि गिरफ्तार किए गए बदमाश दूसरे जिलों मे चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। तीनों बदमाशों के पास चार जोड़ी पायल, चार जोड़ी बिछुए, छह अंगूठी, सात हजार रुपये के साथ-साथ अवैध हथियार व घरों में नकब लगाने वाले उपकरण भी बरामद हुए हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरोह में कुल सात बदमाश हैं जिनमें से चार अभी भी फरार हैं। गिरफ्तार बदमाशों ने अपना नाम किशनपाल पुत्र बेनी निवासी ग्राम मिलकिया थाना निगोही शाहजहांपुर, मंगल पुत्र पप्पू व बोबी पुत्र करन सिंह निवासी शंकर नगर लाइन पार थाना मझोला बताया। बदमाशों ने मुरादाबाद में की गई तीन चोरी की घटनाओं को कबूल किया है। अप्रैल माह में कांशीराम नगर में एक घर से बदमाशों ने नकदी, जेवरात के साथ घरेलू सामान की भी चोरी की थी। जुलाई माह में खुशहालपुर के एक घर में घुसकर नकदी व मोबाइल चुराए थे व अगस्त माह में पूरे गिरोह ने थाना कटघर के ग्राम जैतिया मोड़ पर स्थित सराफ की दुकान का शटर तोड़कर दस लाख की डकैती डाली थी।
सामान बेचने व भीख मांगने के बहाने करते थे रेकी
मुरादाबाद। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि सभी बदमाश डेरा डालकर रहते थे और दिन में अलग-अलग जगह जाकर साइकिल में हवा भरने वाला पंप व टार्च बेचने के बहाने मकानों की रेकी करते थे। गिरोह के दो सदस्य भीख मांगने के बहाने घरों में घुस जाते थे और सुनसान जगह पर स्थित मकानों का चुनाव करते थे। और रात में पूरा गैंग एक साथ धाबा बोलकर घटनाओं को अंजाम देता था। रात को घटनाओं को अंजाम देने के बाद गिरोह का एक सदस्य चोरी किए हुए माल को लेकर गृहजनपद को रवाना हो जाता था और बाकि सभी बदमाश सुबह पांच बजे तक डेरे पर पहुंच जाते थे। ऐसे में यदि गिरोह का कोई भी सदस्य डेरे पर नहीं पहुंचता था तो बदमाश समझ जाते थे कि वह सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गया है और तत्काल डेरा उठाकर वहां से भाग जाते थे। गिरोह का कोई भी सदस्य मोबाइल फोन नहीं ले जाता था । वारदात के समय एक कपड़ों का बैग भी ले जाते थे। घटनाओं को अंजाम देने के तुरंत बाद कपड़े बदल लेते थे ताकि कोई भी उनकी कपड़ो से पहचान न कर सके।
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थाना मझोला प्रभारी राकेश कुमार सिंह के मुताबिक पुलिस ने एक गिरोह के तीन बदमाशों को खुशहालपुर स्थित एक डेरे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया कि गिरफ्तार किए गए बदमाश दूसरे जिलों मे चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। तीनों बदमाशों के पास चार जोड़ी पायल, चार जोड़ी बिछुए, छह अंगूठी, सात हजार रुपये के साथ-साथ अवैध हथियार व घरों में नकब लगाने वाले उपकरण भी बरामद हुए हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरोह में कुल सात बदमाश हैं जिनमें से चार अभी भी फरार हैं। गिरफ्तार बदमाशों ने अपना नाम किशनपाल पुत्र बेनी निवासी ग्राम मिलकिया थाना निगोही शाहजहांपुर, मंगल पुत्र पप्पू व बोबी पुत्र करन सिंह निवासी शंकर नगर लाइन पार थाना मझोला बताया। बदमाशों ने मुरादाबाद में की गई तीन चोरी की घटनाओं को कबूल किया है। अप्रैल माह में कांशीराम नगर में एक घर से बदमाशों ने नकदी, जेवरात के साथ घरेलू सामान की भी चोरी की थी। जुलाई माह में खुशहालपुर के एक घर में घुसकर नकदी व मोबाइल चुराए थे व अगस्त माह में पूरे गिरोह ने थाना कटघर के ग्राम जैतिया मोड़ पर स्थित सराफ की दुकान का शटर तोड़कर दस लाख की डकैती डाली थी।
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सामान बेचने व भीख मांगने के बहाने करते थे रेकी
मुरादाबाद। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि सभी बदमाश डेरा डालकर रहते थे और दिन में अलग-अलग जगह जाकर साइकिल में हवा भरने वाला पंप व टार्च बेचने के बहाने मकानों की रेकी करते थे। गिरोह के दो सदस्य भीख मांगने के बहाने घरों में घुस जाते थे और सुनसान जगह पर स्थित मकानों का चुनाव करते थे। और रात में पूरा गैंग एक साथ धाबा बोलकर घटनाओं को अंजाम देता था। रात को घटनाओं को अंजाम देने के बाद गिरोह का एक सदस्य चोरी किए हुए माल को लेकर गृहजनपद को रवाना हो जाता था और बाकि सभी बदमाश सुबह पांच बजे तक डेरे पर पहुंच जाते थे। ऐसे में यदि गिरोह का कोई भी सदस्य डेरे पर नहीं पहुंचता था तो बदमाश समझ जाते थे कि वह सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गया है और तत्काल डेरा उठाकर वहां से भाग जाते थे। गिरोह का कोई भी सदस्य मोबाइल फोन नहीं ले जाता था । वारदात के समय एक कपड़ों का बैग भी ले जाते थे। घटनाओं को अंजाम देने के तुरंत बाद कपड़े बदल लेते थे ताकि कोई भी उनकी कपड़ो से पहचान न कर सके।
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