{"_id":"68dee0aa0723f66a88057fae","slug":"icu-started-in-the-district-hospital-moradabad-news-c-15-1-mbd1044-743311-2025-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: जिला अस्पताल में आईसीयू शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: जिला अस्पताल में आईसीयू शुरू
विज्ञापन
मुरादाबाद। जिला अस्पताल के सारी वार्ड में आईसीयू के लिए पांच बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। वेंटिलेटर की सुविधा वाले इस वार्ड को मिनी आईसीयू नाम दिया गया है। आईसीयू के उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर जिला अस्पताल की टीएम केजीएमयू लखनऊ से लौटी है।
डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह समेत तीन नर्सिंग स्टाफ की टीम को आईसीयू के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। कोरोना काल ने अस्पताल में रखे वेंटिलेटर का अब इस्तेमाल हो सकेगा। सांस के गंभीर मरीजों को सी-पैप के जरिए उपचार दिया जा सकेगा। इस तकनीक को नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन कहा जाता है। इसे गंभीर मरीजों को मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर करना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल को मेडिसिन विषय में डीएनबी पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति भी मिल गई है। अगले वर्ष दो प्रशिक्षु डॉक्टर यहां पढ़ने के लिए आएंगे। इन डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए भी आईसीयू अनिवार्य है। हर छह माह में दो प्रशिक्षु डॉक्टरों के आने से 24 घंटे डॉक्टर तैनात रहेंगे। मरीजों की बेहतर मॉनिटरिंग हो सकेगी।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में 10 बेड का आईसीयू संचालित करने की योजना है। फिलहाल सारी वार्ड में पांच बेड वेंटिलेटर सपोर्ट वाले हैं। कोरोना काल में अस्पताल को मिलीं सी-पैप व एचएफएनसी मशीनें भी सुरक्षित रखी हैं। स्टाफ के प्रशिक्षित होने के बाद अब इनका उपयोग मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा। हालांकि मरीज की सांस की नली में पाइप डालकर वेंटिलेशन देने की सुविधा अब भी नहीं मिल पाएगी। इसके लिए अस्पताल को आईसीयू के विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह समेत तीन नर्सिंग स्टाफ की टीम को आईसीयू के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। कोरोना काल ने अस्पताल में रखे वेंटिलेटर का अब इस्तेमाल हो सकेगा। सांस के गंभीर मरीजों को सी-पैप के जरिए उपचार दिया जा सकेगा। इस तकनीक को नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन कहा जाता है। इसे गंभीर मरीजों को मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर करना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल को मेडिसिन विषय में डीएनबी पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति भी मिल गई है। अगले वर्ष दो प्रशिक्षु डॉक्टर यहां पढ़ने के लिए आएंगे। इन डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए भी आईसीयू अनिवार्य है। हर छह माह में दो प्रशिक्षु डॉक्टरों के आने से 24 घंटे डॉक्टर तैनात रहेंगे। मरीजों की बेहतर मॉनिटरिंग हो सकेगी।
विज्ञापन
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में 10 बेड का आईसीयू संचालित करने की योजना है। फिलहाल सारी वार्ड में पांच बेड वेंटिलेटर सपोर्ट वाले हैं। कोरोना काल में अस्पताल को मिलीं सी-पैप व एचएफएनसी मशीनें भी सुरक्षित रखी हैं। स्टाफ के प्रशिक्षित होने के बाद अब इनका उपयोग मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा। हालांकि मरीज की सांस की नली में पाइप डालकर वेंटिलेशन देने की सुविधा अब भी नहीं मिल पाएगी। इसके लिए अस्पताल को आईसीयू के विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत होगी।
विज्ञापन