{"_id":"690d09541cb706ec920bc25b","slug":"gst-ankit-saurabh-untraceable-20-more-firms-under-suspicion-moradabad-news-c-15-1-mbd1044-766349-2025-11-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी : अंकित, सौरभ का पता नहीं, 20 और फर्मों पर संदेह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएसटी : अंकित, सौरभ का पता नहीं, 20 और फर्मों पर संदेह
विज्ञापन
मुरादाबाद। 402 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में अब तक अंकित कुमार व सौरभ मिश्रा के बारे में कोई सटीक जानकारी जांच टीमों को नहीं है। अभी जांच अधिकारी यह स्पष्ट करने में जुटे हैं कि टैक्स की चोरी किस तरह हुई और पीछे कितनी परतें बाकी हैं। इस मामले से जुड़ी 20 और फर्मों को संदेह के दायरे में रखकर जांच की जा रही है।
प्रदेश के कुछ बड़े कारोबारियों के नाम टैक्स चोरी के मामले में शामिल होने के आसार हैं। राज्यकर की टीम एसआईटी को सारा विवरण सौंप चुकी है। साथ ही तीन अधिकारी लगातार जांच में जुटे हैं। जांच टीमें देख रही हैं कि फर्जी फर्मों ने किस-किस के साथ कागजों में अपना कारोबार दिखाया है। सभी को आपस में जोड़कर संपर्क तलाशने की कोशिश की जा रही है। ई-मेल की जांच में 22 और फर्में प्रकाश में आ चुकी हैं। जीएसटी के अधिकारियों की टीमों ने बृहस्पतिवार को भी लखनऊ के आरोपी अंकित कुमार और मुजफ्फरनगर के सौरभ मिश्रा के ई-मेल की जांच की। अब तक की जांच के मुताबिक 10 से अधिक राज्यों में टैक्स चोरों की कई बोगस फर्म होने के क्लू मिले हैं। इस प्रकार बोगस फर्मों की संख्या बढ़कर 140 से ऊपर निकल गई है।
राज्यकर की टीम लखनऊ निवासी अंकित कुमार को मास्टर माइंड मानकर कार्य कर रही है। साथ ही इस एंगल पर भी जांच की जा रही है कि अंकित कुमार नाम का सिर्फ इस्तेमाल किया गया है। टैक्स चोरी के पीछे असली खिलाड़ी का नाम कुछ और है। पंजीयन कराने के लिए आरोपी ने सीजीएसटी के सरल नियमों का फायदा उठाते हुए फर्जी अभिलेखों का प्रयोग किया है। लापरवाही के चलते अधिकारियों ने अभिलेखों का सत्यापन नहीं किया।
विज्ञापन
00
हमारी टीम के तीन अधिकारी जांच में एसआईटी का सहयोग कर रहे हैं। सारा विवरण पुलिस को सौंपा जा चुका है। मामले से जुड़ी बोगस फर्मों की जांच जारी है। जो भी जानकारी मिलेगी वह एसआईटी को दी जाएगी।
- आरए सेठ, अपर आयुक्त राज्यकर, ग्रेड-टू
विज्ञापन
प्रदेश के कुछ बड़े कारोबारियों के नाम टैक्स चोरी के मामले में शामिल होने के आसार हैं। राज्यकर की टीम एसआईटी को सारा विवरण सौंप चुकी है। साथ ही तीन अधिकारी लगातार जांच में जुटे हैं। जांच टीमें देख रही हैं कि फर्जी फर्मों ने किस-किस के साथ कागजों में अपना कारोबार दिखाया है। सभी को आपस में जोड़कर संपर्क तलाशने की कोशिश की जा रही है। ई-मेल की जांच में 22 और फर्में प्रकाश में आ चुकी हैं। जीएसटी के अधिकारियों की टीमों ने बृहस्पतिवार को भी लखनऊ के आरोपी अंकित कुमार और मुजफ्फरनगर के सौरभ मिश्रा के ई-मेल की जांच की। अब तक की जांच के मुताबिक 10 से अधिक राज्यों में टैक्स चोरों की कई बोगस फर्म होने के क्लू मिले हैं। इस प्रकार बोगस फर्मों की संख्या बढ़कर 140 से ऊपर निकल गई है।
विज्ञापन
राज्यकर की टीम लखनऊ निवासी अंकित कुमार को मास्टर माइंड मानकर कार्य कर रही है। साथ ही इस एंगल पर भी जांच की जा रही है कि अंकित कुमार नाम का सिर्फ इस्तेमाल किया गया है। टैक्स चोरी के पीछे असली खिलाड़ी का नाम कुछ और है। पंजीयन कराने के लिए आरोपी ने सीजीएसटी के सरल नियमों का फायदा उठाते हुए फर्जी अभिलेखों का प्रयोग किया है। लापरवाही के चलते अधिकारियों ने अभिलेखों का सत्यापन नहीं किया।
विज्ञापन
00
हमारी टीम के तीन अधिकारी जांच में एसआईटी का सहयोग कर रहे हैं। सारा विवरण पुलिस को सौंपा जा चुका है। मामले से जुड़ी बोगस फर्मों की जांच जारी है। जो भी जानकारी मिलेगी वह एसआईटी को दी जाएगी।
- आरए सेठ, अपर आयुक्त राज्यकर, ग्रेड-टू