फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Ground Report of Moradabad Eleven percent children malnourished in Moradabad

ग्राउंड रिपोर्ट मुरादाबाद: मुट्ठी भर चावल और बीमार गेहूं...कैसे सुधरे बच्चों की सेहत

Sat, 16 Jan 2021 03:41 PM IST
शाहरुख खान मोहम्मद सलाम खां, अमर उजाला, मुरादाबाद
मोहम्मद सलाम खां, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 16 Jan 2021 03:41 PM IST
विज्ञापन
Ground Report of Moradabad Eleven percent children malnourished in Moradabad
मुरादाबाद में 11 फीसदी बच्चे कुपोषित - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में दो माह बाद जिले में बांटा गया अनाज भी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पूरा नहीं मिला। आंगनबाड़ी केंद्रों पर चावल कम पहुंचा तो गेहूं चोकर जैसा था। अधिकतर केंद्रों पर दाल और घी नहीं पहुंचे। सुपोषण की कोशिशों में अनाज की कमी पीतलनगरी की चमक पर कुपोषण की स्याही लगा रही है। जिले में पांच साल तक के 11 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। वहीं, इस साल नवंबर तक 38 बच्चे काल के गाल में समा चुके हैं।

loader
कोरोना काल में दो माह बाद जिले में बांटा गया अनाज भी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पूरा नहीं मिला। आंगनबाड़ी केंद्रों पर चावल कम पहुंचा तो गेहूं चोकर जैसा था। अधिकतर केंद्रों पर दाल और घी नहीं पहुंचे। सुपोषण की कोशिशों में अनाज की कमी पीतलनगरी की चमक पर कुपोषण की स्याही लगा रही है। जिले में पांच साल तक के 11 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। वहीं, इस साल नवंबर तक 38 बच्चे काल के गाल में समा चुके हैं।

गांव में केंद्र, शहर में रहती हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
शहर से सटी पाकबड़ा नगर पंचायत के बगल के गांव हासमपुर में तीन केंद्र है। यहां एक केंद्र बंद मिला। तीन में से दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुरादाबाद से आतीं हैं। फोन पर बातचीत में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भुवनेश देवी ने बताया कि 150 किग्रा चावल और 2.40 क्विंटल गेहूं मिला था। दाल नहीं मिली। पड़ोसी गांव भांडली में भी केंद्र बंद मिला। यहां की आंगनबाड़ी वर्कर भी दूसरे गांवों से आती हैं। यही हाल अगवानपुर के मोहल्ला सादात का रहा। यहां भी आंगनबाड़ी अमरोहा से आती जाती हैं।
 

खड़ी नहीं हो पाती डेढ़ साल की आलिया

मुरादाबाद में 11 फीसदी बच्चे कुपोषित
मुरादाबाद में 11 फीसदी बच्चे कुपोषित - फोटो : अमर उजाला
कुंदरकी ब्लॉक के भांडली गांव में मजदूर राजाबाबू की डेढ़ साल की बेटी आलिया खड़ी नहीं हो पाती। मां जायदा बतातीं हैं कि आलिया जन्म के समय 800 ग्राम की थी। तीन महीने से न तो दलिया मिली और न अनाज। आंगनबाड़ी वर्कर का पता नहीं, गुरुजी करते हैं केंद्र का इस्तेमाल रतनपुर कला गांव के जूनियर हाईस्कूल द्वितीय में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र तो खुला मिला, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नहीं मिलीं। गुरुजी केंद्र का इस्तेमाल करते दिखे। केंद्र पर कट्टों में पॉलिथीन में पैक गेहूं, चावल और दाल रखे मिले। चावल और चने की दाल की सूरत तो ठीक थी, लेकिन गेहूं चोकर जैसा था।

चार साल का रेहान , वजन 10 किलो
अगवानपुर के मोहल्ला कुरैशियान निवासी शानू का चार वर्षीय बेटा रेहान दिखने में एक साल का लगता है। दादी मुसर्रफ जहां बतातीं हैं कि जन्म के समय रेहान का वजन  600 ग्राम था। अधिक कमजोर होने पर वह बैठ भी नहीं पाता था। चार साल का होने के बाद भी उसका वजन नौ से दस किलो के बीच है। पिछले महीने पांच किलो चावल मिला था। इससे पहले कुछ नहीं मिला।

दाल खरीद अभी नहीं हुई

ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज बांटने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। अगर किसी केंद्र पर अनाज कम पहुंचा तो ये समूह की जिम्मेदारी है। शिकायत की जांच की जाएगी। अभी दाल की खरीद नहीं हो पाई है, इसलिए दाल बांटी नहीं जा सका है। - राजेश कुमार, सीडीपीओ, भोजपुर


एनआरसी पर नहीं आते बच्चे

- कोरोना के डर से परिजन एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने से कतरा रहे हैं। इसके चलते लॉकडाउन के बाद एनआरसी में बच्चों की संख्या में गिरावट आई है। हर महीने दो से चार बच्चे ही भर्ती किए जा रहे हैं। - डा. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल मुरादाबाद।


जिले में कुपोषित बच्चों की स्थिति
कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 27102
लाल श्रेणी के बच्चों की संख्या 4327
पीली श्रेणी के बच्चों की संख्या 19821
मैम श्रेणी के बच्चों की संख्या 2312
सैम श्रेणी के बच्चों की संख्या 642

नोट: मैम और सैम श्रेणी में आने वाले बच्चों को एनआरसी में भर्ती किया जाता है। ये लाल श्रेणी के बच्चों से भी कमजोर होते हैं।

एक नजर गर्भवतियाें की स्थिति पर
  • अप्रैल से नवंबर तक जिले में 55000 गर्भवतियों के खून की जांच की गई, इसमें  510 गर्भवतियां सीवियर एनीमिया से पीड़ित पाई गईं।
  • 476 गर्भवतियों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ी
  • प्रसव के दौरान या 42 दिनों के भीतर 50 महिलाओं की मौत हो गई

कुपोषण की जंग में शबाना बनी नजीर

मुरादाबाद में 11 फीसदी बच्चे कुपोषित
मुरादाबाद में 11 फीसदी बच्चे कुपोषित - फोटो : अमर उजाला
डीएम के गोद लिए गांव लक्ष्मीपुर कट्टई की आंगनबाड़ी वर्कर शबाना परवीन दूसरे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नजीर हैं। गर्भवतियों को काउंसिलिंग के जरिए एनीमिक श्रेणी से बाहर निकालने और पोषण माह-2018 में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें प्रदेश सरकार और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से सम्मान मिल चुका है। यहां दो आंगनबाड़ी सेंटर हैं। जहां कुल 166 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां सात बच्चे कुपोषित हैं।

दोनों सेंटरों की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी शबाना परवीन के पास है। काउंसिलिंग के जरिए गर्भवतियों को एनीमिक श्रेणी से बाहर लाने और बच्चों के टीकाकरण एवं मातृ समिति को सक्रिय करने के लिए उन्हें रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार मिला। शबाना परवीन केंद्र के बच्चों को खेल-खेल में गिनती, अक्षर  और रंगों का ज्ञान, सूंघना, आंख बंदकर किसी चीज को पहचाना और स्वाद का ज्ञान भी कराती हैं। शबाना का कहना है कि परिवार के साथ आंगनबाड़ी सेंटर चलाना चुनौती पूर्ण कार्य है, लेकिन परिवार के सहयोग और टाइम मैनेजमेंट से सब आसान हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed