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पहले बसों के लिए किया इंतजार, फिर घंटों जाम से जूझे

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 01:00 AM IST
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First waited for buses, then struggled with jam for hours
मुरादाबाद। भैया दूज शनिवार की थी। रविवार को अवकाश का दिन था, इसलिए इस बार लोग भैया दूज मनाने के बाद अपने भाई और बहनों के यहां रुक गए । रविवार को इन लोगों ने वापसी की तो बस भीड़ इतनी बढ़ गई कि बस अड्डों पर निगम की बसें ही कम पड़ गई। रही सही कसर एनएच-9 पर लगे जाम ने पूरी कर दी। इससे बसें दिन भर जाम में फंसी रही और उनका रुटेशन बिगड़ा गया। ऐसे में यात्रियों का बुरा हाल हो गया। पहले तो घंटो बसों के लिए जूझते रहे बाद में जाम से। हालत ये थी कि सुबह के निकले लोग रात तक अपने गंतव्यों तक पहुंच रहे थे।
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दरअसल दो साल कोरोना की वजह से लोगों ने तीज त्यौहारों को घरोंपर ही मनाया था। इस बार कुछ राहत मिली तो लोग अपने भाई बहनों के यहां त्यौहार मनाने पहुंच गए। भैया दूज के अगले दिन रविवार था इसलिए नौकरी पेशा लोग भी राहत में थे। शनिवार को ये लोग बहनों के यहां रुके और रविवार को घर वापसी की। हालांकि परिवहन निगम ने दीपावली और भैया दूज पर बसों की व्यवस्था की थी लेकिन संभवत भैया दूज से अगले दिन
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इतने अधिक यात्री निकलेंगे इसका अंदाजा निगम को भी नहीं था।
रविवार दोपहर को रोडवेज और पीतल नगरी डिपों पर सैकडों यात्रियों का जमावड़ा लगा था। दिल्ली, गाजियाबाद जाने के लिए याित्रियों की सबसे ज्यादा भीड़ थी, लेकिन उनकी संख्या के चलते बसें कम थी। जैसे ही बसें आते चढकर सीट रोकने के लिए धकका मुक्की होने लगती। गजरौला, मेरठ के लिए तो बसेें ही नहीं थी। यात्री बसों के इंतजार में थे। संभल, चंदौसी, बिजनौर के लिए भी बसों की कमी रही। जितने यात्री रोडवेज के अंदर थे उससे ज्यादा बाहर खड़े थे। दूर से ही जैसे बस दिखती भीड़ दौड़ने लगती। किसी तरह लोग बसों से रवाना हुए लेकिन एनएच-9 पर जोया और गढ़मुक्तेश्वर में लगे जाम में फंसे रहे।
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जाम में फंसे यात्रियों का बुरा हाल
सोनीपत से मुरादाबाद में अपने भाई के यहां निजी वाहन से आए राजेंद्र गोयल ने बताया कि दोपहर करीब एक बजे जोया में करीब एक घंटे लंबे जाम में फंसे रहे। मुरादाबाद से मेरठ जा रहे दिलशाद ड़ेढ घंटे पाकबड़ा में मेरठ की बस के इंतजार में खड़े रहे । दो बसें निकली भी लेकिन चालक ने नहीं रोका। मजबूरन एक निजी वाहन में 200 रुपये किराए पर मेरठ गए लेकिन गढ़मुक्तेश्वर जाम में फंस गए । रात 10बजे तक भी वे मेरठ नहीं पहुंचे थे। इसी तरह कई सवारियां हैं जो सुबह निकली और रात तक गंतव्यों तक नहीं पहुंची थी । परिजन बार बार फोन कर हाल जान रहे थे।

अधिक किराया देकर डग्गामार में जाने को मजबूर हुए लोग
शाम साढ़े तीन बजे पाकबड़ा जीरो प्वांइट से गाजियाबाद, दिल्ली, मेरठ और नोएडा की बसें पकड़ने के लिए सैकडों यात्री खड़े थे। कई लोग परिवार के साथ थे लेकिन काफी देर में दिल्ली की तो बसें आ रही थी लेकिन बस अड़डे से ही बसें इतनी भरकर आ रही थी बस चालकों ने बसों को नहीं रोका। शाम तीन से सवा चार बजे तक मेरठ जाने वाली दो बसें यहां से गुजरी लेकिन चालकों ने नहीं रोका। यात्रियों की संख्या देख कई निजी वाहन डग्गामार वाहन यहां आकर यात्रियों को बिठाकर ले जा रहे थे। गजरौला तक जाने के 100-120 और गढ़ तक का 150 रुपेय तक किराया ले रहे थे। परेशान यात्री मजबूरी में मनमांगा किराया देने को मजबूर थे। कुछ निजी वाहन चालक पाकबड़ा जीरो प्वाइंटर से दिल्ली, गाजियाबाद मेरठ आदि स्थानों की सवारियां बिठाकर ले गए।
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