{"_id":"6150e1f28ebc3efb7e1b789e","slug":"farmers-were-expecting-400-did-not-like-the-price-of-350-city-news-mbd4040886177","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को थी 400 की आस, 350 का भाव नहीं आया रास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को थी 400 की आस, 350 का भाव नहीं आया रास
विज्ञापन
मुरादाबाद। तीन साल से सरकार ने गन्ना मूल्य में कोई बढोत्तरी नहीं की थी। किसान हर साल गन्ना मूल्य बढ़ाने क मांग कर रहे थे। कृषि कानून बिल के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन और अगले साल यूपी के विधान सभा चुनाव को देखते हुए किसान संगठन भी उम्मीद लगाए थे कि सरकार अच्छा खासा गन्ना मूल्य बढ़ाकर किसानों को लुभाने की कोशिश करेगी। किसान नेताओं को कम से कम 370 रुपये तक गन्ना मूल्य घोषित होने की आस थी लेकिन उनकी ये उम्मीदें पूर नहीं हो सकी।
सरकार ने अक्तूबर से शुरू होने जा रहे नए गन्ना पेराई सत्र के लिए 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है लेकिन यदि पिछले 15 साल के गन्ना मूल्य का आंकलन किया जाए तो गन्ने का भाव बढ़ाने में सबसे आगे बसपा रही है। बसपा सरकार ने अपनेे पांच साल में सबसे अधिक 120 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाया है जबकि भाजपा ने सबसे कम केवल 35 रुपये की बढ़ोत्तरी की है। उधर किसान संगठन भी इस वृद्वि से खुुश् नहीं हैं। उनका कहना है कि पांच साल में खाद डीजल के भाव 30 से 40 फीसदी बढ़े हैं, जबकि गन्ने का भाव 10 फीसदी भी नहीं बढ़ा। किसानों ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताया है।
पांच साल में खाद और डीजल के दाम 30 -40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। बीज, कीटनाशक दवा भी महंगी हुई है, लेकिन गन्ने का भाव 10 प्रतिशत भी नहीं बढ़ा। बिजली का बिल देर से जमा करने पर किसान पर पेनल्टी लगती है लेकिन उसका गन्ना मूल्य महीनों बाद मिलता है लेकिन नियम होने के बाद भी उसे ब्याज नहीं मिलता। विस चुनाव के डर से गन्ना मूल्य बढ़ा है जो नाकाफी है। -चरण सिंह मलिक, किसान नेता ज्ञानपुर
विज्ञापन
किसानों की आय दुगनी करने के दावे करने वाली भाजपा सरकार के पांच साल में ही सबसे कम गन्ना मूल्य बढ़ा है। कृषि कानून बिल को लेकर किसानों की नाराजगी और चुनावी इस साल की वजह से इस साल भाव बढ़ाया है, लेकिन ये ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। कम से कम 400 रुपये क्विंटल का भाव करना चाहिए था। -नोसिंह, प्रदेश महासचिव भाकियू
2017 में विस चुनाव से पहले भाजपा दावा करते थे कि भाजपा सत्ता में आई तो गन्ना मूल्य 370 रुपये प्रति क्विंटल कर देंगे लेकिन सरकार बनने पर पांच साल में केवल 35 रुपये बढ़ाए। किसान भाजपा की असलियत जान चुके हैं। -मनोज चौधरी, जिलाध्यक्ष भाकियू
चुुनावी साल में सपा ने भी बढ़ाए थे 25 रुपये
सपा सरकार ने भी अपने शासनकाल के आखिरी साल में 25 रुपये क्विंटल बढ़ाए थे। 2016-17 में सपा सरकार ने गन्ने का भाव 290 से बढ़ाकर 315 रुपये प्रति क्विंटल किया था। हालांकि सपा ने सत्ता में आते ही गन्ना मूल्य 250 से बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल किया था।
कितना हुआ गन्ना मूल्य
सामान्य प्रजाति 340 रुपए प्रति क्विंटल
अगेती 350 रुपए प्रति क्विंटल
15 साल में किस सरकार में कितने गन्ना मूल्य की बढ़ोत्तरी
वर्ष बढ़ोत्तरी सरकार
2007- 2012 120 बसपा
2012- 2017 65 सपा
2017-अब तक 35 भाजपा
वर्ष सरकार गन्ना मूल्य
2007-08 बसपा 125-130
2008-09 बसपा 140-145
2009-10 बसपा 165-170
2010-11 बसपा 205-210
2011-12 बसपा 240-250
2012-13 सपा 280-290
2013-14 सपा 280-290
2014-15 सपा 280-290
2015-16 सपा 280-290
2016-17 सपा 305-315
2017-18 भाजपा 315-325
2018-19 भाजपा 315-325
2019-20 भाजपा 315-325
2020-21 भाजपा 315-325
2021-22 भाजपा 340-350
विज्ञापन
सरकार ने अक्तूबर से शुरू होने जा रहे नए गन्ना पेराई सत्र के लिए 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है लेकिन यदि पिछले 15 साल के गन्ना मूल्य का आंकलन किया जाए तो गन्ने का भाव बढ़ाने में सबसे आगे बसपा रही है। बसपा सरकार ने अपनेे पांच साल में सबसे अधिक 120 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाया है जबकि भाजपा ने सबसे कम केवल 35 रुपये की बढ़ोत्तरी की है। उधर किसान संगठन भी इस वृद्वि से खुुश् नहीं हैं। उनका कहना है कि पांच साल में खाद डीजल के भाव 30 से 40 फीसदी बढ़े हैं, जबकि गन्ने का भाव 10 फीसदी भी नहीं बढ़ा। किसानों ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताया है।
विज्ञापन
पांच साल में खाद और डीजल के दाम 30 -40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। बीज, कीटनाशक दवा भी महंगी हुई है, लेकिन गन्ने का भाव 10 प्रतिशत भी नहीं बढ़ा। बिजली का बिल देर से जमा करने पर किसान पर पेनल्टी लगती है लेकिन उसका गन्ना मूल्य महीनों बाद मिलता है लेकिन नियम होने के बाद भी उसे ब्याज नहीं मिलता। विस चुनाव के डर से गन्ना मूल्य बढ़ा है जो नाकाफी है। -चरण सिंह मलिक, किसान नेता ज्ञानपुर
विज्ञापन
किसानों की आय दुगनी करने के दावे करने वाली भाजपा सरकार के पांच साल में ही सबसे कम गन्ना मूल्य बढ़ा है। कृषि कानून बिल को लेकर किसानों की नाराजगी और चुनावी इस साल की वजह से इस साल भाव बढ़ाया है, लेकिन ये ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। कम से कम 400 रुपये क्विंटल का भाव करना चाहिए था। -नोसिंह, प्रदेश महासचिव भाकियू
2017 में विस चुनाव से पहले भाजपा दावा करते थे कि भाजपा सत्ता में आई तो गन्ना मूल्य 370 रुपये प्रति क्विंटल कर देंगे लेकिन सरकार बनने पर पांच साल में केवल 35 रुपये बढ़ाए। किसान भाजपा की असलियत जान चुके हैं। -मनोज चौधरी, जिलाध्यक्ष भाकियू
चुुनावी साल में सपा ने भी बढ़ाए थे 25 रुपये
सपा सरकार ने भी अपने शासनकाल के आखिरी साल में 25 रुपये क्विंटल बढ़ाए थे। 2016-17 में सपा सरकार ने गन्ने का भाव 290 से बढ़ाकर 315 रुपये प्रति क्विंटल किया था। हालांकि सपा ने सत्ता में आते ही गन्ना मूल्य 250 से बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल किया था।
कितना हुआ गन्ना मूल्य
सामान्य प्रजाति 340 रुपए प्रति क्विंटल
अगेती 350 रुपए प्रति क्विंटल
15 साल में किस सरकार में कितने गन्ना मूल्य की बढ़ोत्तरी
वर्ष बढ़ोत्तरी सरकार
2007- 2012 120 बसपा
2012- 2017 65 सपा
2017-अब तक 35 भाजपा
वर्ष सरकार गन्ना मूल्य
2007-08 बसपा 125-130
2008-09 बसपा 140-145
2009-10 बसपा 165-170
2010-11 बसपा 205-210
2011-12 बसपा 240-250
2012-13 सपा 280-290
2013-14 सपा 280-290
2014-15 सपा 280-290
2015-16 सपा 280-290
2016-17 सपा 305-315
2017-18 भाजपा 315-325
2018-19 भाजपा 315-325
2019-20 भाजपा 315-325
2020-21 भाजपा 315-325
2021-22 भाजपा 340-350