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Moradabad News: बिजली आपूर्ति ग्रामीण शेड्यूल की, बिल दे रहे शहरी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:17 AM IST
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Electricity supply follows the rural schedule, but they are charging urban rates.
मुरादाबाद। एमडीए की सबसे पुरानी कॉलोनी कबीर नगर कई सालों से गांव व शहर के फेर में है। परिणाम यह है कि बिल तो शहरी बिजली का देते हैं लेकिन बिजली आपूर्ति ग्रामीण शेड्यूल से मिलती है। करीब तीन दशक बाद भी न तो सड़कें सुधर पाई हैं और ही जलभराव की समस्या खत्म हुई है। कमजोर वर्ग के लोगों के लिए एमडीए की ओर से बनाए गए भवन तो रहने लायक नहीं थे, इसलिए लगभग सभी ने अब उन्हें तोड़कर नए सिरे से भवन निर्माण कर लिया है।
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एमडीए ने वर्ष 1995-96 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों के लिए सौ से अधिक आवास बनाए थे, लेकिन यह आवास काफी छोटा था, जिसमें सहन सहन काफी मुश्किल था। आवंटन तो सभी का हो गया लेकिन सभी लोगों को उसे तोड़कर रहने के लिए दूसरा ही घर बनाना पड़ा। ये क्षेत्र ग्राम पंचायत भैंसिया के रकबे में था, जिसे एमडीए ने लिया था। तब से लेकर अब तक यहां ग्राम पंचायत ने तो विकास कराना बंद कर ही दिया, एमडीए ने भी यहां कोई विकास नहीं कराया। आज भी यहा्ं के लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि वह ग्रामीण क्षेत्र में हैं या शहरी क्षेत्र में। कॉलोनी में एंट्री की मुख्य सड़क की काफी नीची है, जिससे यहां जलभराव की समस्या शुरू से ही है।
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कबीर नगर कॉलोनी में ही वर्ष 2010 में फ्रेंड्स अपार्टमेंट भी एमडीए की ओर से बनाए गए हैं, जिसमें 102 फ्लैट बनाकर आवंटित किए गए थे। यहां के लोगों को भी ग्रामीण शेड्यूल से ही बिजली मिलती है। यहां पर पिछले दिनों नाले की सफाई कराई गई, उस दौरान से नाले के ऊपर से स्लैब हटाई गई थी, जिन्हें यूं ही छोड़ दिया गया। जिससे बड़ा नाला खुला पड़ा है। सफाई की स्थिति काफी दयनीय है। नाले व मुख्य मार्ग के किनारे ही खुले में कूड़ा डाला जा रहा है, जिससे आने जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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वर्जन
- कबीरनगर कॉलोनी तो अब एमडीए की है, ग्राम पंचायत की ओर से वहां कार्य कराने का प्रयास किया गया लेकिन जब प्रस्ताव भेजा तो खंड विकास अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कबीरनगर के कार्यो का बजट पास नहीं होगा, क्योंकि अब वह एमडीए का हिस्सा है। बिजली तो यहां पहले से ही ग्रामीण क्षेत्र की है लेकिन बिजली बिल शहरी क्षेत्र की दरों से आते हैं, एमडीए को ही शहरी बिजली के लिए प्रयास करने चाहिए।
- जब्बार हुसैन, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत भैसिया।
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- कबीर नगर एमडीए की कॉलोनी है, यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। सफाई व्यवस्था भी कराई जाती है। यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह लिखित रूप से अवगत कराए, समाधान कराया जाएगा।
- संजय कुमार सत्संगी, जनसंपर्क अधिकारी, एमडीए।
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स्थानीय लोगों से बातचीत
- एमडीए कॉलोनी कबीर नगर सबसे पुरानी कॉलोनी है लेकिन यहां का लिंक मार्ग ही दुरुस्त नहीं कराया गया है। काफी नीचा होने के कारण बारिश के दिनों में जलभराव हो जाता है, जिसके कारण लोगों को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
साहब खान, प्रॉपर्टी डीलर।
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- कबीरनगर कॉलोनी की सबसे बड़ी दिक्कत तो बिजली की है। यहां वर्षो से ग्रामीण शेड्यूल से बिजली आती है, जबकि यहां के लोगों से शहरी दरों से बिजली का बिल लिया जाता है। बिजली शेड्यूल से तो कम मिलती है, वैसे भी घंटों की कटौती व ट्रिपिंग होती रहती है।
फैसल बहार, स्पेयर पार्टस् विक्रेता।
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- एमडीए ने जो घर बनाकर दिए थे वह रहने लायक नहीं थे, एक छोटा सा कक्ष था। इस कारण यहां के लोगों को उसे तोड़कर उसके स्थान पर अपने तरीके से रहने लायक भवन बनाना पड़ा। जो भवन दिया था, उसमें परिवार नहीं रह सकता था।
- मजहर अली, शिक्षक।
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- यहां वर्षो से कोई विकास कार्य नहीं कराया गया है, ग्राम पंचायत और एमडीए एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहते हैं। जब शिकायत करने एमडीए जाते हैं तो वह ग्राम पंचायत में भेज देते हैं, ग्राम पंचायत कहती है कि मामला एमडीए का है।
- अजीम अहमद, छात्र।
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- कॉलोनी के अंदर भी जो मार्ग है, वह भी काफी नीचे हैं, जिसके कारण उनके किनारे हमेशा जलभराव की स्थिति बनी रहती है। जिससे मच्छर मक्खियां पैदा होती है, आसपास का वातावरण भी बदबू वाला रहता है। लोगों को आवागमन में भी दिक्कत होती है।

आसिफ खान, नौकरीपेशा।
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- कबीर नगर कॉलोनी में सफाई की बड़ी समस्या है, ग्राम पंचायत यहां सफाई कराती नहीं है, एमडीए ने तीन कर्मचारी रखे हैं, जिनके पास कबीरनगर के साथ साथ दो अन्य कॉलोनियों का भी कार्य है, जिसके कारण वह सप्ताह में भी एक बार यहां मुश्किल से ही आ पाते हैं।
-गब्बर खान, किराना दुकानदार।
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