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तहसील कर्मियों ने ली रिश्वत, जांच फाइल का पता नहीं
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मुरादाबाद।
फाइल कछुआ गति से रेंग रही है या गायब हो गई, यह जांच का विषय है। जमीन के विवाद में तहसील के अर्दली और वाहन चालक पर विपक्षियों से रिश्वत लेने का आरोप है। डीएम से हुई शिकायत के बाद फाइल चली, लेकिन 20 दिन बाद भी एसडीएम सदर के सामने नहीं पहुंच सकी है।
तहसील मुरादाबाद के गांव भोजपुर धर्मपुर निवासी राहत अली के मुताबिक उन्होंने 22 बीघा जमीन की पंजीकृत वसीयत कराई थी, जिसके आधार पर तहसीलदार कोर्ट में दाखिल खारिज का वाद दायर किया। यह जानकारी विपक्षियों को हुई तो उन्होंने अपना दावा ठोंक दिया। आरोप है कि बहस उपरांत निर्णय के लिए 25 नवंबर 2020 की तारीख नियत हुई, लेकिन इस दिन फैसला नहीं हुआ। राहत अली का कहना है कि फैसले के इंतजार में वह देर शाम तक तहसील में बैठा रहा, तभी विपक्षी आए और तहसील के अर्दली व वाहन चालक से वार्ता करने लगे। राहत का दावा है कि संदेह होने पर वह और नजदीक चला गया तो उसने देखा कि विपक्षियों ने अर्दली को रिश्वत दी और उसने नोट गिनकर रख लिए। उसने इस घटनाक्रम की अपने मोबाइल से वीडियो बना ली। अगले दिन 26 नवंबर को ही यह शिकायत एसडीएम से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित का कहना है कि दायर वाद का भी निर्णय नहीं किया गया तो उसने 15 दिसंबर को एसडीएम को फिर प्रार्थना पत्र दिया। इसमें लिखा कि एक महीने बाद भी निर्णय नहीं हुआ है, इसलिए नियमानुसार पुन: बहस की जाए। आरोप है कि 25 दिसंबर तक कोई सुनवाई नहीं हुई, लेकिन जब 26 दिसंबर को नेट पर देखा तो 15 दिसंबर में ही विपक्षियों के पक्ष में फैसला कर दिया गया। आरोप है कि यह फैसला गलत तरीके से बैक डेट में किया गया है।
उधर एसडीएम ने मामले में कोई सुनवाई नहीं की तो पीड़ित ने 27 दिसंबर को डीएम, एसएसपी समेत उच्चाधिकारियों से मामले की शिकायत की। डीएम ने मामले की जांच करने के लिए एडीएम प्रशासन को निर्देशित किया। एडीएम ने जांच एसडीएम सदर को दे दी और पूरी फाइल तहसील स्थित एसडीएम के दफ्तर भेज दी, लेकिन लगभग 20 दिन बाद भी यह फाइल एसडीएम सदर के सामने नहीं पहुंच सकी है। शिकायतकर्ता ने प्रमाण के तौर पर अर्दली की नोट गिनते फोटो और वीडियो भी दी है।
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वर्जन......
पीड़ित राहत अली ने 27 दिसंबर को सरकारी कर्मचारियों द्वारा विपक्षियों से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है, जो अत्यंत गंभीर मामला है। शिकायत की सत्यता जानने के लिए जांच एसडीएम सदर को दी है। एसडीएम सदर के यहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद संपूर्ण रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
सुरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन।
तहसील के अर्दली और वाहन चालक पर रिश्वत लेने जैसे मामले की जांच फाइल अभी तक सामने नहीं आई है। फाइल मिलने के बाद मामले में सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। मामला अत्यंत गंभीर है। हकीकत सामने आने पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रेरणा सिंह, एसडीएम-सदर
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फाइल कछुआ गति से रेंग रही है या गायब हो गई, यह जांच का विषय है। जमीन के विवाद में तहसील के अर्दली और वाहन चालक पर विपक्षियों से रिश्वत लेने का आरोप है। डीएम से हुई शिकायत के बाद फाइल चली, लेकिन 20 दिन बाद भी एसडीएम सदर के सामने नहीं पहुंच सकी है।
तहसील मुरादाबाद के गांव भोजपुर धर्मपुर निवासी राहत अली के मुताबिक उन्होंने 22 बीघा जमीन की पंजीकृत वसीयत कराई थी, जिसके आधार पर तहसीलदार कोर्ट में दाखिल खारिज का वाद दायर किया। यह जानकारी विपक्षियों को हुई तो उन्होंने अपना दावा ठोंक दिया। आरोप है कि बहस उपरांत निर्णय के लिए 25 नवंबर 2020 की तारीख नियत हुई, लेकिन इस दिन फैसला नहीं हुआ। राहत अली का कहना है कि फैसले के इंतजार में वह देर शाम तक तहसील में बैठा रहा, तभी विपक्षी आए और तहसील के अर्दली व वाहन चालक से वार्ता करने लगे। राहत का दावा है कि संदेह होने पर वह और नजदीक चला गया तो उसने देखा कि विपक्षियों ने अर्दली को रिश्वत दी और उसने नोट गिनकर रख लिए। उसने इस घटनाक्रम की अपने मोबाइल से वीडियो बना ली। अगले दिन 26 नवंबर को ही यह शिकायत एसडीएम से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित का कहना है कि दायर वाद का भी निर्णय नहीं किया गया तो उसने 15 दिसंबर को एसडीएम को फिर प्रार्थना पत्र दिया। इसमें लिखा कि एक महीने बाद भी निर्णय नहीं हुआ है, इसलिए नियमानुसार पुन: बहस की जाए। आरोप है कि 25 दिसंबर तक कोई सुनवाई नहीं हुई, लेकिन जब 26 दिसंबर को नेट पर देखा तो 15 दिसंबर में ही विपक्षियों के पक्ष में फैसला कर दिया गया। आरोप है कि यह फैसला गलत तरीके से बैक डेट में किया गया है।
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उधर एसडीएम ने मामले में कोई सुनवाई नहीं की तो पीड़ित ने 27 दिसंबर को डीएम, एसएसपी समेत उच्चाधिकारियों से मामले की शिकायत की। डीएम ने मामले की जांच करने के लिए एडीएम प्रशासन को निर्देशित किया। एडीएम ने जांच एसडीएम सदर को दे दी और पूरी फाइल तहसील स्थित एसडीएम के दफ्तर भेज दी, लेकिन लगभग 20 दिन बाद भी यह फाइल एसडीएम सदर के सामने नहीं पहुंच सकी है। शिकायतकर्ता ने प्रमाण के तौर पर अर्दली की नोट गिनते फोटो और वीडियो भी दी है।
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पीड़ित राहत अली ने 27 दिसंबर को सरकारी कर्मचारियों द्वारा विपक्षियों से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है, जो अत्यंत गंभीर मामला है। शिकायत की सत्यता जानने के लिए जांच एसडीएम सदर को दी है। एसडीएम सदर के यहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद संपूर्ण रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
सुरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन।
तहसील के अर्दली और वाहन चालक पर रिश्वत लेने जैसे मामले की जांच फाइल अभी तक सामने नहीं आई है। फाइल मिलने के बाद मामले में सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। मामला अत्यंत गंभीर है। हकीकत सामने आने पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रेरणा सिंह, एसडीएम-सदर