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Moradabad News: अच्छी न्याय व्यवस्था को बार-बेंच संवाद जरूरी
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मुरादाबाद। दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद ने बुधवार को जमानत कानूनों में सुधार विषय पर एक विधिक सेमिनार का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बार एसोसिएशन सभागार में हुआ। जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने की। लारा कोर्ट के जनपद न्यायाधीश जैगमउद्दीन मुख्य अतिथि रहे, जबकि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 11 घनेंद्र कुमार मुख्य वक्ता थे।
सेमिनार में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तपस्या त्रिपाठी ने मध्यस्थता 3.0 कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मध्यस्थता से वादों का शीघ्र निस्तारण करना है। इससे न्यायालयों पर बढ़ रहे अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम होगा। सिविल जज निमिषा गुप्ता ने रिमांड के समय गिरफ्तारी पर कहा कि कुछ बिंदुओं पर कार्य करने से अभियुक्त को रिमांड पर ही रिहा किया जा सकता है। इसके लिए जमानत की आवश्यकता नहीं होगी। मुख्य वक्ता घनेंद्र कुमार ने उच्चतम एवं उच्च न्यायालय द्वारा जमानत को नियम बनाने के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर चर्चा की। उन्होंने अधिवक्ताओं को मजबूत पैरवी से जमानत आदेश प्राप्त करने के तरीके बताए।
मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश जैग़मउद्दीन ने कहा कि जमानत पर उच्चतम और उच्च न्यायालय के वर्तमान आदेश पूर्व में भी दिए गए हैं। उन्होंने 1978 में न्यायमूर्ति कृष्णन अय्यर के कथन को दोहराया कि जमानत नियम है और कारागार अपवाद है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि न्यायालय नियमों को छोड़कर अपवादों को अधिक अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय नियमों पर कार्य करें तो उच्चतम एवं उच्च न्यायालय को ऐसे दिशा-निर्देश जारी नहीं करने पड़ेंगे। इससे मजिस्ट्रेट और सेशन स्तर के न्यायालयों का समय अन्य मामलों के तुरंत निस्तारण में उपयोग हो सकेगा। बार के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने सभी न्यायिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बार और बेंच के बीच संवाद के बिना अच्छी न्याय व्यवस्था का निर्माण संभव नहीं है।
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इस दौरान बार के पूर्व अध्यक्ष आदेश श्रीवास्तव, एल्डर कमेटी के सदस्य महेश चंद्र त्यागी, पूर्व महासचिव राकेश जौहरी, अभिषेक भटनागर, देवेंद्र बिश्नोई, अंजार हुसैन, संजीव राघव, अतुल माथुर, आवरण अग्रवाल, जितेंद्र प्रताप जेपी, रमा पांडे, फिरोज आलम, अजय बंसल, अंकित टंडन,मयंक शर्मा, मलिक अंसारी, अजय सोती, विवेक शुक्ला, पुष्प यादव, आसिफ, शादाब हुसैन, अमरदीप सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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सेमिनार में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तपस्या त्रिपाठी ने मध्यस्थता 3.0 कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मध्यस्थता से वादों का शीघ्र निस्तारण करना है। इससे न्यायालयों पर बढ़ रहे अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम होगा। सिविल जज निमिषा गुप्ता ने रिमांड के समय गिरफ्तारी पर कहा कि कुछ बिंदुओं पर कार्य करने से अभियुक्त को रिमांड पर ही रिहा किया जा सकता है। इसके लिए जमानत की आवश्यकता नहीं होगी। मुख्य वक्ता घनेंद्र कुमार ने उच्चतम एवं उच्च न्यायालय द्वारा जमानत को नियम बनाने के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर चर्चा की। उन्होंने अधिवक्ताओं को मजबूत पैरवी से जमानत आदेश प्राप्त करने के तरीके बताए।
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मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश जैग़मउद्दीन ने कहा कि जमानत पर उच्चतम और उच्च न्यायालय के वर्तमान आदेश पूर्व में भी दिए गए हैं। उन्होंने 1978 में न्यायमूर्ति कृष्णन अय्यर के कथन को दोहराया कि जमानत नियम है और कारागार अपवाद है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि न्यायालय नियमों को छोड़कर अपवादों को अधिक अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय नियमों पर कार्य करें तो उच्चतम एवं उच्च न्यायालय को ऐसे दिशा-निर्देश जारी नहीं करने पड़ेंगे। इससे मजिस्ट्रेट और सेशन स्तर के न्यायालयों का समय अन्य मामलों के तुरंत निस्तारण में उपयोग हो सकेगा। बार के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने सभी न्यायिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बार और बेंच के बीच संवाद के बिना अच्छी न्याय व्यवस्था का निर्माण संभव नहीं है।
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इस दौरान बार के पूर्व अध्यक्ष आदेश श्रीवास्तव, एल्डर कमेटी के सदस्य महेश चंद्र त्यागी, पूर्व महासचिव राकेश जौहरी, अभिषेक भटनागर, देवेंद्र बिश्नोई, अंजार हुसैन, संजीव राघव, अतुल माथुर, आवरण अग्रवाल, जितेंद्र प्रताप जेपी, रमा पांडे, फिरोज आलम, अजय बंसल, अंकित टंडन,मयंक शर्मा, मलिक अंसारी, अजय सोती, विवेक शुक्ला, पुष्प यादव, आसिफ, शादाब हुसैन, अमरदीप सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।