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डेंगू रोकने में विभाग नाकाम, जीका वायरस का कैसे होगा काम तमाम
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मुरादाबाद। कोरोना और डेंगू से जूझ रहे सेहत महकमे के सामने अब जीका वायरस की चुनौती होगी। प्रदेश में जीका वायरस के दस केस मिल चुके हैं। जीका वायरस का संवाहक एडीज एजेप्टी मच्छर है। दूसरी ओर जिले में डेंगू के लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। अब तक 788 मरीज मिल चुके हैं। ऐसे में डेंगू को रोकने में नाकाम विभाग जीका वायरस से कैसे लड़ेगा।
दूसरी लहर में अप्रैल और मई माह में कोरोना ने कहर बरपाया था। अस्पतालों में बेडों और ऑक्सीजन की मारामारी थी। इन दो महीनों में जिले में 26450 से अधिक पॉजिटिव केस मिले, लेकिन जून से संक्रमण की रफ्तार में कमी आनी शुरू हो गई। वहीं, सितंबर में डेंगू ने पांव पसारने शुरू कर दिए। इन दो महीनों में जिले में कोरोना के सिर्फ तीन केस मिले। वहीं डेंगू के 788 मरीज मिल चुके हैं। ऐसे में कोरोना के बाद सेहत महकमा डेंगू से जूझ रहा है। तमाम कोशिशों के बावजूद हालात जस के तस बने हैं। डेंगू की रोकथाम में विभाग नाकाम साबित हो रहा है। दूसरी ओर प्रदेश में जीका वायरस के दस मामले सामने आ चुके हैं। ये सभी केस कानपुर में मिले हैं। जिसे लेकर प्रदेश में खलबली मची हुई है। जब मच्छरों से फैलने वाले डेंगू को विभाग रोकने में फेल साबित हो रहा तो जीका वायरस की रोकथाम कैसे होगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर अभी शासन स्तर को जीका वायरस को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है।
- जिले में डेंगू फैला हुआ है। अब विभाग का पूरा ध्यान डेंगू पर है। इसकी रोकथाम की जा रही है। जीका वायरस के संबंध में शासन स्तर से अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, लेकिन सावधानी बरती जा रही है। - डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, जिला सर्विलांस अधिकारी
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डेंगू से मिलते जुलते हैं जीका वायरस के लक्षण
मुरादाबाद। जीका वायरस के लक्षण डेंगू से मिलते जुलते हैं। इसमें मरीज को बुखार, सिरदर्द, शरीर पर चकत्ते पड़ना, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होना, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी की शिकायत होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- मच्छरदानी में सोएं, मॉस्कयूटो रिप्लेंट का प्रयोग करें
- बुखार-सिरदर्द को हल्के में न लें, डॉक्टरी सलाह लें
- स्किन पर चकत्ते दिखे तो अलर्ट हो जाएं
तीन से चौदह दिन के भीतर दिखने लगते हैं लक्षण
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक जीका वायरस के संपर्क में आने के तीन से चौदह दिन के भीतर लक्षण और संकेत दिखने लगते हैं, जो दो दिन से लेकर सात दिन तक दिख सकते हैं। हालांकि जीका वायरस के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखता है। ये बुखार के तीसरे या चौथे दिन डायरेक्ट अटैक कर सकता है।
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दूसरी लहर में अप्रैल और मई माह में कोरोना ने कहर बरपाया था। अस्पतालों में बेडों और ऑक्सीजन की मारामारी थी। इन दो महीनों में जिले में 26450 से अधिक पॉजिटिव केस मिले, लेकिन जून से संक्रमण की रफ्तार में कमी आनी शुरू हो गई। वहीं, सितंबर में डेंगू ने पांव पसारने शुरू कर दिए। इन दो महीनों में जिले में कोरोना के सिर्फ तीन केस मिले। वहीं डेंगू के 788 मरीज मिल चुके हैं। ऐसे में कोरोना के बाद सेहत महकमा डेंगू से जूझ रहा है। तमाम कोशिशों के बावजूद हालात जस के तस बने हैं। डेंगू की रोकथाम में विभाग नाकाम साबित हो रहा है। दूसरी ओर प्रदेश में जीका वायरस के दस मामले सामने आ चुके हैं। ये सभी केस कानपुर में मिले हैं। जिसे लेकर प्रदेश में खलबली मची हुई है। जब मच्छरों से फैलने वाले डेंगू को विभाग रोकने में फेल साबित हो रहा तो जीका वायरस की रोकथाम कैसे होगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर अभी शासन स्तर को जीका वायरस को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है।
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- जिले में डेंगू फैला हुआ है। अब विभाग का पूरा ध्यान डेंगू पर है। इसकी रोकथाम की जा रही है। जीका वायरस के संबंध में शासन स्तर से अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, लेकिन सावधानी बरती जा रही है। - डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, जिला सर्विलांस अधिकारी
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डेंगू से मिलते जुलते हैं जीका वायरस के लक्षण
मुरादाबाद। जीका वायरस के लक्षण डेंगू से मिलते जुलते हैं। इसमें मरीज को बुखार, सिरदर्द, शरीर पर चकत्ते पड़ना, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होना, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी की शिकायत होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- मच्छरदानी में सोएं, मॉस्कयूटो रिप्लेंट का प्रयोग करें
- बुखार-सिरदर्द को हल्के में न लें, डॉक्टरी सलाह लें
- स्किन पर चकत्ते दिखे तो अलर्ट हो जाएं
तीन से चौदह दिन के भीतर दिखने लगते हैं लक्षण
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक जीका वायरस के संपर्क में आने के तीन से चौदह दिन के भीतर लक्षण और संकेत दिखने लगते हैं, जो दो दिन से लेकर सात दिन तक दिख सकते हैं। हालांकि जीका वायरस के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखता है। ये बुखार के तीसरे या चौथे दिन डायरेक्ट अटैक कर सकता है।