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जिला अस्पताल इलाज करने पहुंचे तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि
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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण काल में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल इलाज कराने पहुंचे बुखार के तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। एक मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीनों मरीज शहरी क्षेत्र के रहने वाले हैं। जिले में तीन दिनों में डेंगू के सात मरीज मिल चुके हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है। बुखार के मरीजों को चिह्नित कर उनकी डेंगू और मलेरिया की जांच कराई जा रही है। मंगलवार को करीब तीस मरीजों की जांच कराई गई थी। इसमें तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। बुधवार को एक मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। डेंगू के ये मरीज करूला, रामगंगा विहार और रामपुर दोराहे के रहने वाले हैं। इन मरीजों के मोहल्लों में मलेरिया विभाग ने फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव किया है। वायरल के प्रकोप के बीच डेंगू और मलेरिया की दस्तक से सेहत महकमे में खलबली मची हुई है। पिछले तीन दिनों में डेंगू के सात मरीज सामने आ चुके हैं।
तीन तरह के होते हैं डेंगू बुखार
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल ने बताया कि डेंगू बुखार तीन तरह के होते हैं। ये क्लासिक (साधारण) डेंगू बुखार, डेंगू हमरेजिक (डीएचएफ) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) होते हैं।
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साधारण(क्लासिक) डेंगू बुखार के लक्षण
- ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना।
- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
- आंखों के पिछले भाग में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और भी बढ़ जाता है।
- अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख न लगना, जी मिचलाना।
- मुंह के स्वाद का खराब होना।
- गले में हल्का सा दर्द होना।
- दुखी या बीमार महसूस करना।
- शरीर पर लाल रैश का होना।
- चेहरे, गर्दन या छाती पर विसरित दानों की तरह ददोरे हो सकते हैं।
डेंगू हमरेजिक बुखार (डीएचएफ) के लक्षण
- नाक, मसूढ़ों से खून आना।
- शौच या उल्टी में खून आना।
- त्वचा पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाना।
डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) के लक्षण
- मरीज अत्यधिक बेचैन हो जाता है।
- तेज बुखार होने के बावजूद त्वचा ठंडी महसूस होती है।
- मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है।
- मरीज की नाड़ी देखी जाए तो वह तेज और कमजोर महसूस होती है।
- मरीज का बीपी कम होने लगता है।
सलाह
- डॉक्टरों की सलाह पर पैरासिटामॉल की गोली लें।
- मरीज को डिस्प्रिन या एस्प्रिन न दें।
- अगर बुखार 102 डिग्री से अधिक है तो बुखार कम करने के लिए हाईड्रोथेरेपी करें।
- सामान्य रूप से भोजन देना जारी रखें।
- मरीज को आराम करने दें।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है। बुखार के मरीजों को चिह्नित कर उनकी डेंगू और मलेरिया की जांच कराई जा रही है। मंगलवार को करीब तीस मरीजों की जांच कराई गई थी। इसमें तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। बुधवार को एक मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। डेंगू के ये मरीज करूला, रामगंगा विहार और रामपुर दोराहे के रहने वाले हैं। इन मरीजों के मोहल्लों में मलेरिया विभाग ने फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव किया है। वायरल के प्रकोप के बीच डेंगू और मलेरिया की दस्तक से सेहत महकमे में खलबली मची हुई है। पिछले तीन दिनों में डेंगू के सात मरीज सामने आ चुके हैं।
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तीन तरह के होते हैं डेंगू बुखार
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल ने बताया कि डेंगू बुखार तीन तरह के होते हैं। ये क्लासिक (साधारण) डेंगू बुखार, डेंगू हमरेजिक (डीएचएफ) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) होते हैं।
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साधारण(क्लासिक) डेंगू बुखार के लक्षण
- ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना।
- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
- आंखों के पिछले भाग में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और भी बढ़ जाता है।
- अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख न लगना, जी मिचलाना।
- मुंह के स्वाद का खराब होना।
- गले में हल्का सा दर्द होना।
- दुखी या बीमार महसूस करना।
- शरीर पर लाल रैश का होना।
- चेहरे, गर्दन या छाती पर विसरित दानों की तरह ददोरे हो सकते हैं।
डेंगू हमरेजिक बुखार (डीएचएफ) के लक्षण
- नाक, मसूढ़ों से खून आना।
- शौच या उल्टी में खून आना।
- त्वचा पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाना।
डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) के लक्षण
- मरीज अत्यधिक बेचैन हो जाता है।
- तेज बुखार होने के बावजूद त्वचा ठंडी महसूस होती है।
- मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है।
- मरीज की नाड़ी देखी जाए तो वह तेज और कमजोर महसूस होती है।
- मरीज का बीपी कम होने लगता है।
सलाह
- डॉक्टरों की सलाह पर पैरासिटामॉल की गोली लें।
- मरीज को डिस्प्रिन या एस्प्रिन न दें।
- अगर बुखार 102 डिग्री से अधिक है तो बुखार कम करने के लिए हाईड्रोथेरेपी करें।
- सामान्य रूप से भोजन देना जारी रखें।
- मरीज को आराम करने दें।