{"_id":"69145ebfc899116e0b0a74b7","slug":"delhi-blast-tragedy-daughter-made-an-emotional-reel-for-her-father-lost-his-life-in-explosion-2025-11-12","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: 'जिस पिता के लिए बनाई रील... वह आठ दिन बाद दुनिया से चले गए', दिल्ली धमाके में दोस्तों की गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: 'जिस पिता के लिए बनाई रील... वह आठ दिन बाद दुनिया से चले गए', दिल्ली धमाके में दोस्तों की गई जान
Wed, 12 Nov 2025 04:18 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 12 Nov 2025 04:18 PM IST
सार
दिल्ली में हुए धमाके में हसनपुर के व्यापारी लोकेश अग्रवाल और मंगरौला निवासी अशोक कुमार की मौत हो गई। दोनों में 16 साल पुरानी दोस्ती थी। दोनों को उनकी मौत दिल्ली में खींच लाई।
विज्ञापन
Delhi Bomb Blast
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली में हुए कायराना धमाके में अपनी जान गंवाने वाले अशोक कुमार के घर में मातम पसरा है। उनके परिवार में पत्नी सोनम के अलावा दो बेटियां और एक बेटा है लेकिन अब यह खुशियों से भरा संसार उजड़ चुका है। अशोक के परिवार की खुशियों का एक खुशनुमा हिस्सा थीं उनकी बेटियां, जो अक्सर रील बनाती थीं।
करीब आठ दिन पहले ही अशोक की आठ वर्षीय बड़ी बेटी आराध्या ने अपने प्यारे पापा को समर्पित करते हुए एक मार्मिक रील तैयार की थी। ‘पापा घर आते हैं, पलकों पर बिठाते हैं...’ बेटी की यह रील देखकर अशोक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दो नवंबर को ही अशोक ने इस रील को फेसबुक अकाउंट पर बड़े प्यार से पोस्ट किया था। इस रील में आराध्या ने इन दिल छू लेने वाली पंक्तियों को गुनगुनाया था...
पापा घर आते हैं, गले से लगाते हैं,
प्यार जताते हैं, पलकों पर बिठाते हैं,
ठुमक ठुमक जावा मेरे पापा दे नाल,
पापा जैसा कोई मुझे करता ना प्यार...
लेकिन उस नन्ही बेटी को क्या पता था कि जिस पिता के लिए वह इतने प्यार से रील बना रही है, वह ठीक आठ दिन बाद हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह जाएंगे। अशोक की बेटी आराध्या ने रोते हुए बताया कि अब किसके लिए वह रील बनाएगी। अशोक खुद भी बच्चों की रीलों में उनका साथ देते थे और परिवार में एक खुशनुमा माहौल बनाकर रखते थे। अपनी बड़ी बेटी आराध्या का जन्मदिन भी उन्होंने इसी साल 14 जून को पूरे उत्साह के साथ मनाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
करीब आठ दिन पहले ही अशोक की आठ वर्षीय बड़ी बेटी आराध्या ने अपने प्यारे पापा को समर्पित करते हुए एक मार्मिक रील तैयार की थी। ‘पापा घर आते हैं, पलकों पर बिठाते हैं...’ बेटी की यह रील देखकर अशोक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दो नवंबर को ही अशोक ने इस रील को फेसबुक अकाउंट पर बड़े प्यार से पोस्ट किया था। इस रील में आराध्या ने इन दिल छू लेने वाली पंक्तियों को गुनगुनाया था...
विज्ञापन
पापा घर आते हैं, गले से लगाते हैं,
प्यार जताते हैं, पलकों पर बिठाते हैं,
ठुमक ठुमक जावा मेरे पापा दे नाल,
पापा जैसा कोई मुझे करता ना प्यार...
लेकिन उस नन्ही बेटी को क्या पता था कि जिस पिता के लिए वह इतने प्यार से रील बना रही है, वह ठीक आठ दिन बाद हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह जाएंगे। अशोक की बेटी आराध्या ने रोते हुए बताया कि अब किसके लिए वह रील बनाएगी। अशोक खुद भी बच्चों की रीलों में उनका साथ देते थे और परिवार में एक खुशनुमा माहौल बनाकर रखते थे। अपनी बड़ी बेटी आराध्या का जन्मदिन भी उन्होंने इसी साल 14 जून को पूरे उत्साह के साथ मनाया था।
विज्ञापन
16 साल पुरानी थी दोनों की दोस्ती, दोनों को दिल्ली में खींच लाई मौत
दिल्ली में हुए धमाके में हसनपुर के व्यापारी लोकेश अग्रवाल और मंगरौला निवासी अशोक कुमार की मौत हो गई। दोनों में 16 साल पुरानी दोस्ती थी। दोनों को उनकी मौत दिल्ली में खींच लाई। हादसे के बाद लोकेश अग्रवाल की पहचान हो पाना मुश्किल हो रहा था। दिल्ली पहुंचे परिजनों को भी उन्हें पहचानने में काफी मुश्किल हुई।
दिल्ली में हुए धमाके में हसनपुर के व्यापारी लोकेश अग्रवाल और मंगरौला निवासी अशोक कुमार की मौत हो गई। दोनों में 16 साल पुरानी दोस्ती थी। दोनों को उनकी मौत दिल्ली में खींच लाई। हादसे के बाद लोकेश अग्रवाल की पहचान हो पाना मुश्किल हो रहा था। दिल्ली पहुंचे परिजनों को भी उन्हें पहचानने में काफी मुश्किल हुई।
बाद में लोकेश अग्रवाल की पहचान उसके दाहिने हाथ में पहनी अंगूठी से हुई। बताते हैं कि अशोक का शव लोकेश अग्रवाल के शव से करीब पांच मीटर की दूरी पर पड़ा था। इससे पहले दिल्ली पुलिस को लोकेश अग्रवाल का मोबाइल मिल गया था, जिसकी सहायता से उन्होंने घर पर फोन करके सूचना दी थी।
बेटे की मौत से बेखबर थीं मां, शव देखकर हुईं बेहोश
मंगरौला गांव में दिल्ली बम धमाके के शिकार अशोक कुमार के घर सोमवार रात जो दृश्य था, वह किसी भी व्यक्ति को झकझोरने वाला था। अशोक की 70 वर्षीय मां सोमवती देवी, जो दिल की मरीज हैं। वह रातभर बेटे की मौत की खबर से अनजान रहीं। वहीं, सुबह बेटे का शव देखा दो बेहोश हो गईं। परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
मंगरौला गांव में दिल्ली बम धमाके के शिकार अशोक कुमार के घर सोमवार रात जो दृश्य था, वह किसी भी व्यक्ति को झकझोरने वाला था। अशोक की 70 वर्षीय मां सोमवती देवी, जो दिल की मरीज हैं। वह रातभर बेटे की मौत की खबर से अनजान रहीं। वहीं, सुबह बेटे का शव देखा दो बेहोश हो गईं। परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
सोमवती देवी बड़े बेटे सुभाष के साथ गांव में रहती हैं। सोमवार रात करीब 10 बजे जब अशोक की मौत की दुखद खबर गांव में फैली, तो घर के बाहर लोगों, मीडियाकर्मियों व स्थानीय पुलिस का तांता लग गया। हालांकि, परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों ने मिलकर एक कठिन निर्णय लिया। उन्होंने तय किया कि सोमवती देवी को उनकी बीमारी के चलते रात में यह जानकारी देना सही नहीं है।
परिजन रातभर इस दर्द को छुपाते रहे जबकि एक बूढ़ी मां इस उम्मीद में सोती रही कि उनका बेटा सही सलामत है। रातभर मां बेटे की भयानक मौत से बेखबर रहीं। वहीं, मंगलवार सुबह दिल दहला देने वाला सच सामने आया। अशोक का क्षत-विक्षत पार्थिव शरीर दिल्ली से घर लाया गया, तो शव की भयानक हालत देखते ही सोमवती देवी चीख पड़ीं और सदमे से बेहोश हो गईं। इस हृदय विदारक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
रिश्तेदार ने कपड़ों से की कारोबारी के शव की शिनाख्त
कारोबारी लोकेश के समधी, राजेश अग्रवाल ने घटना की वीभत्सता बयां करते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा मोबाइल पर दिखाए गए मृतकों के फोटो से उनकी पहचान कर पाना असंभव था। इसके बाद जब मोर्चरी में रखे शवों को देखा, तो कपड़ों से उनकी पहचान हो सकी। राजेश अग्रवाल ने बताया चेहरे का सिर्फ एक हिस्सा ही थोड़ा-बहुत बचा था, वरना पूरा शरीर देखने लायक नहीं बचा था।
कारोबारी लोकेश के समधी, राजेश अग्रवाल ने घटना की वीभत्सता बयां करते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा मोबाइल पर दिखाए गए मृतकों के फोटो से उनकी पहचान कर पाना असंभव था। इसके बाद जब मोर्चरी में रखे शवों को देखा, तो कपड़ों से उनकी पहचान हो सकी। राजेश अग्रवाल ने बताया चेहरे का सिर्फ एक हिस्सा ही थोड़ा-बहुत बचा था, वरना पूरा शरीर देखने लायक नहीं बचा था।
बड़े भाई काम की तलाश में गए थे हरियणा, भतीजे ने दी मुखाग्नि
जिस समय सोमवार देर शाम दिल्ली में अशोक की मौत हुई, उनके बड़े भाई सुभाष भी काम की तलाश में हरियाणा गए हुए थे। वह भी मंगलवार सुबह ही गांव मंगरौला पहुंचे। दिल्ली धमाके में जान गंवाने वाले मंगरौला निवासी अशोक कुमार के शव का अंतिम संस्कार गंगा पूठ घाट पर किया गया। चूंकि अशोक का बेटा बहुत छोटा है, इसलिए अंतिम संस्कार की रस्म उनके भतीजे निशांत (बड़े भाई सुभाष के बेटे) ने निभाई। निशांत ने अपने चाचा को मुखाग्नि देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
संबंधित वीडियो-
जिस समय सोमवार देर शाम दिल्ली में अशोक की मौत हुई, उनके बड़े भाई सुभाष भी काम की तलाश में हरियाणा गए हुए थे। वह भी मंगलवार सुबह ही गांव मंगरौला पहुंचे। दिल्ली धमाके में जान गंवाने वाले मंगरौला निवासी अशोक कुमार के शव का अंतिम संस्कार गंगा पूठ घाट पर किया गया। चूंकि अशोक का बेटा बहुत छोटा है, इसलिए अंतिम संस्कार की रस्म उनके भतीजे निशांत (बड़े भाई सुभाष के बेटे) ने निभाई। निशांत ने अपने चाचा को मुखाग्नि देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
संबंधित वीडियो-