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अनूठी बेटियां: एक ने किडनी तो दूसरी ने लिवर डोनेट कर बचाया पिता का जीवन

Mon, 28 Sep 2020 12:33 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 28 Sep 2020 12:33 PM IST
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Daughters day 2020 Rampur daughters donate kidney and liver to save their fathers life
अपने-अपने पिता के साथ शिल्पी अग्रवाल और प्रिया - फोटो : अमर उजाला
बात चाहे देश और समाज की सुरक्षा की हो या पढ़ाई और खेल के मैदान की, यह साबित होता है कि बेटियां बेटों से कमतर नहीं है। कहीं-कहीं बेटों से बेहतर बेटियों के मजबूत उदाहरण सामने आते हैं। ऐसे मजबूत उदाहरणों की श्रृंखला में शामिल हैं रामपुर की दो बेटियां, जिनमें से एक ने किडनी देकर तो दूसरी ने लिवर का हिस्सा डोनेट कर पिता की जान बचाई। डॉटर्स-डे पर इन अनूठी बेटियों और उनके पिताओं ने अपने अनुभव अमर उजाला से साझा किए।
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शिल्पी अग्रवाल ने दी पिता को किडनी
रामपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की कैलाश कॉलोनी निवासी आयकर अधिवक्ता अशोक अग्रवाल को साल 2008 में किडनी की समस्या हुई थी। परिजन उपचार के लिए पहले बरेली और बाद में गुरुग्राम मेदांता अस्पताल ले गए। साल 2012 में चिकित्सकों ने अशोक अग्रवाल को किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए कहा। 
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स्पष्ट किया कि जीवन बचाने का यही आखिरी विकल्प है। परिवार के सदस्यों में से किसी की उम्र तो किसी की स्वास्थ्य संबंधी समस्या ने किडनी डोनेशन का रास्ता बंद कर दिया। ऐसे में बेटी शिल्पी अग्रवाल ने डोनर बनने का निर्णय लिया। नवंबर 2012 में शिल्पी ने अपनी एक किडनी देकर पिता को नया जीवन दिया। 
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शिल्पी आज पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और एक निजी स्कूल में बतौर शिक्षिका कार्य कर रही हैं। पिता अशोक अग्रवाल ने कहा कि उन्हें गर्व है कि ईश्वर ने उन्हें ऐसी बेटी दी, कामना है कि सभी अभिभावकों को ऐसी संतान मिले। मेरी बेटी ने साबित किया कि बेटियां बेटों से कम नहीं हैं।

 

प्रिया ने अपने लिवर का एक हिस्सा पिता हरीश कुमार को किया ट्रांसप्लांट 

रामपुर सिविल लाइंस निवासी इंश्योरेंस कंपनी में डेवलपमेंट अधिकारी हरीश कुमार को साल 2002 में लिवर की समस्या हुई थी। शुरुआत में चिकित्सकों के परामर्श से दवा व खानपान के परहेज से सुधार की कोशिश की। साल 2012 में चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि हरीश कुमार क्रोनिक लीवर सिरोसिस से पीड़ित हैं। लिवर ट्रांसप्लांट जरूरी है। 

परिवार के ज्यादातर सदस्य इसके लिए अनफिट साबित हुए। हालात देख साल 2013 में हरीश कुमार की छोटी बेटी प्रिया ने अपने लिवर का एक हिस्सा पिता के लिए ट्रांसप्लांट कराया। प्रिया अब इंडियन बैंक में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। 

उनके पिता हरीश कुमार भी स्वस्थ हैं। वह कहते हैं कि उनके पास बेटे नहीं है। केवल दो बेटियां हैं। प्रिया उनमें छोटी हैं। उसने जो किया, शायद बेटा होता तो वह भी न कर पाता, दोनों बेटियों पर गर्व है। 
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