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कैश वैन में पहुंचने से पहले ही 33 लाख लुटे

Sun, 06 May 2018 03:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद। 
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद।  Updated Sun, 06 May 2018 03:04 AM IST
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thirty three lakh bank cash looted before fix in cash van
लूट के बाद असिस्टंट मेनेजर से पूछताछ करती सीओ। - फोटो : amar ujala
मोटर साइकिल सवार दो लुटेरों ने शनिवार की दोपहर सवा दो बजे सिविल लाइंस के व्यस्त पीली कोठी चौराहे पर एक्सिस बैंक के बाहर कैश वैन के लिए ले जाए जा रहे 33 लाख रुपए लूट लिए। लुटेरों ने किसी हथियार का भी इस्तेमाल नहीं किया। पीली कोठी चौराहा स्थित बैंक की शाखा के बाहर वारदात के समय खूब गहमागहमी थी।
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मौका ए वारदात से 300 मीटर के दायरे में ही पुलिस थाना, महिला थाना, पुलिस पिकेट और सीओ का दफ्तर है। इसके बाद भी लुटेरे वारदात को अंजाम देकर आसानी से भाग निकले। आनन-फानन में की गई नाकाबंदी भी किसी काम नहीं आई। अब सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। सनद रहे कि इससे पहले 17 जून 2010 को भी इसी इलाके से यूनियन बैंक की शाखा से 27 लाख रुपए लूटे गए थे।
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सिक्योरिट्रांस कंपनी बैंकों से रुपये लेकर एटीएम में जमा कराने का काम करती है। इसी कंपनी के कर्मचारी राहुल (बुद्धि विहार) और अजय (जयंतीपुर) 1.45 बजे कैश वैन में सवार होकर एक्सिस बैंक पहुंचे। कैश वैन को बैंक के बाहर 25 मीटर दूर खड़ा कर वैन चालक विजेंद्र (गणेशपुर) और सुरक्षाकर्मी अशोक  (गोविंद नगर) वैन में ही रुक गए। अजय और राहुल बैंक के अंदर गए।
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दो बजकर 10 मिनट पर दोनों बैंक से बाहर निकले। 33 लाख रुपयों से भरा बैग राहुल के कंधे पर था। बकौल राहुल वह कैश वैन के पास पहुंचा ही था कि तभी पीछे से काले रंग की पल्सर बाइक उनके पास आई। उस पर बैठे दो बदमाशों में से एक हेलमेट पहनकर बाइक चला रहा था, रूमाल से मुंह ढांपे पीछे बैठै दूसरे बदमाश ने झपट्टा मारकर राहुल के हाथ से बैग छीन लिया।

जब तक वह कुछ समझ जाता तब तक तो बाइक फर्राटा मारते हुए एएसपी सिविल लाइन के दफ्तर और महिला थाने के सामने से नागफनी की तरफ आंख से ओझल हो चुकी थी। सुरक्षाकर्मी और ड्राइवर वैन के अंदर ही बैठे रह गए। इसके बाद तो हड़कंप भी मचा, पुलिस भी एक्शन में आई, नाकेबंदी भी हुई, एसएसपी रविंदर गौड और आईजी बीके सिंह समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। राहुल ने बताया कि बैग छीनने वाले बदमाश ने काले रंग की शर्ट पहन रखी थी।

दोनों 25 से 30 साल की उम्र के लग रहे थे। बाइक की नंबर प्लेट वह नहीं देख सका। वारदात को जितने सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया उससे इतना तो तय है कि लुटेरों को वैन कर्मियों की गतिविधियों की पुख्ता जानकारी थी। माना जा रहा है कि कई दिनों तक रैकी करने के बाद यह लूट की गई। इसमें किसी बैंककर्मी और नोट जमा करने वाली एजेंसी के कर्मचारी की भरपूर मदद हासिल होने के अंदेशे पर भी पुलिस काम कर रही है। सुरक्षा में बरती गई लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है। 


एसएसपी जे रविंद्र गौड़ ने बताया कि लूटी गई रकम में 500 और 2000 के नए और पुराने दोनों तरह के नोट होने की जानकारी बैंक अधिकारियों ने दी है। अभी इस मामले में नोटों के सीरियल नंबर जारी नहीं किए गए हैं। लूट के खुलासे के लिए एसओजी, सर्विलांस समेत एएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अफसरों की छह टीमें लगाई गईं हैं। 
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