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हाईकोर्ट हुआ सख्त तो हाकिम सर्दी में भी पसीना - पसीना
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jan 2018 12:41 AM IST
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हाईकोर्ट
- फोटो : file photo
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रामपुर में हो रहा अवैध खनन अफसरों को नजर नहीं आया। हाईकोर्ट ने अवैध खनन रोकने के आदेश दिए। लेकिन इन आदेशों को भी अफसरों ने कोई तवज्जो नहीं दी। अब जबकि हाईकोर्ट ने अवमानना में रामपुर के दो पूर्व डीएम सस्पेंड कर दिए हैं तो अफसरों में खलबली मच गई है।
उच्च न्यायालय ने प्रमुख सचिव को तलब किया तो नीचे वालों की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच बैठा दी गई। शासन के आदेश पर जांच कर रहे कमिश्नर ने 2015 से लेकर अभी तक रामपुर में संबंधित क्षेत्र में तैनात रहे पटवारी और सिपाही से लेकर कलक्टर - कप्तान तक सभी को तलब कर लिया है।
रामपुर के दढ़िहयाल क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने 2015 में हाईकोर्ट में अवैध खनन के खिलाफ रिट दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि अवैध खनन की वजह से नदियों व पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए इसे तुरंत सख्ती से रोका जाए।
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अवैध खनन नहीं रुका तो 2017 में याचिकाकर्ता ने अवमानना की याचिका दाखिल कर दी। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद रामपुर में इस दौरान तैनात रहे सभी डीएम - एसपी, एएसपी, एडीएम, एसडीएम- सीओ और थानेदार व चौकी इंचार्जों तक की जिम्मेदारी तय की जा रही है। खनन निरीक्षक से लेकर खनन विभाग के बाबुओं तक को कमिश्नर ने तलब किया है।
गुुरुवार को मंडलायुक्त कार्यालय पर ऐसे तमाम अफसरों की भीड़ लगी थी जो इस अवधि में रामपुर में तैनात रहे हैं। जांच में अपनी - अपनी गर्दन बचाने के लिए सभी अधिकारी एक - दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं। कार्रवाई के डर से अधिकारी सर्दी में भी पसीना - पसीना थे।
बयान दर्ज कराने के लिए सभी अधिकारियों को एक प्रोफार्मा दिया गया था। सभी ने उसमें लिखित बयान दर्ज कराए। कुल 139 अफसरों की सूची बयान के लिए जारी की गई है। जांच में सौ से अधिक अधिकारियों के बयान दर्ज होने थे। जिनमें से अधिकांश ने बयान दर्ज करा दिए हैं।
रामपुर के दो पूर्व डीएम समेत कुछ अधिकारियों के बयान होना रह गया है। छूटे अधिकारी शुक्रवार को अपने बयान दर्ज कराएंगे। हम खुद शुक्रवार को मौके पर जाकर स्थिति देखेंगे। छह जनवरी को जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। - राजेश कुमार सिंह, मंडलायुक्त।
उच्च न्यायालय ने प्रमुख सचिव को तलब किया तो नीचे वालों की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच बैठा दी गई। शासन के आदेश पर जांच कर रहे कमिश्नर ने 2015 से लेकर अभी तक रामपुर में संबंधित क्षेत्र में तैनात रहे पटवारी और सिपाही से लेकर कलक्टर - कप्तान तक सभी को तलब कर लिया है।
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रामपुर के दढ़िहयाल क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने 2015 में हाईकोर्ट में अवैध खनन के खिलाफ रिट दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि अवैध खनन की वजह से नदियों व पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए इसे तुरंत सख्ती से रोका जाए।
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अवैध खनन नहीं रुका तो 2017 में याचिकाकर्ता ने अवमानना की याचिका दाखिल कर दी। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद रामपुर में इस दौरान तैनात रहे सभी डीएम - एसपी, एएसपी, एडीएम, एसडीएम- सीओ और थानेदार व चौकी इंचार्जों तक की जिम्मेदारी तय की जा रही है। खनन निरीक्षक से लेकर खनन विभाग के बाबुओं तक को कमिश्नर ने तलब किया है।
गुुरुवार को मंडलायुक्त कार्यालय पर ऐसे तमाम अफसरों की भीड़ लगी थी जो इस अवधि में रामपुर में तैनात रहे हैं। जांच में अपनी - अपनी गर्दन बचाने के लिए सभी अधिकारी एक - दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं। कार्रवाई के डर से अधिकारी सर्दी में भी पसीना - पसीना थे।
बयान दर्ज कराने के लिए सभी अधिकारियों को एक प्रोफार्मा दिया गया था। सभी ने उसमें लिखित बयान दर्ज कराए। कुल 139 अफसरों की सूची बयान के लिए जारी की गई है। जांच में सौ से अधिक अधिकारियों के बयान दर्ज होने थे। जिनमें से अधिकांश ने बयान दर्ज करा दिए हैं।
रामपुर के दो पूर्व डीएम समेत कुछ अधिकारियों के बयान होना रह गया है। छूटे अधिकारी शुक्रवार को अपने बयान दर्ज कराएंगे। हम खुद शुक्रवार को मौके पर जाकर स्थिति देखेंगे। छह जनवरी को जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। - राजेश कुमार सिंह, मंडलायुक्त।