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दहेज हत्या में अधिवक्ता को दस साल की कैद
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Nov 2017 01:25 AM IST
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न्यायालय
- फोटो : file photo
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चंदौसी के 17 साल पुराने दहेज हत्या के मामले में एफटीसी द्वितीय की अदालत ने आरोपी अधिवक्ता अरविंद गुप्ता को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई है। दस हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव ने बताया कि 21 मई 2000 को रामपुर जनपद के शहजाद नगर थानाक्षेत्र के धमौरा निवासी भूकन लाल गुप्ता ने चंदौसी थाने में अपने दामाद अधिवक्ता अरविंद गुप्ता, उसके पिता राजेंद्र गुप्ता, मां अंगूरी देवी और बहन सुमन गुप्ता के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज कराया था।
भूकन लाल ने पुलिस को बताया था कि उसकी बेटी रानी की शादी वर्ष 1997 में अरविंद के साथ हुई थी। दहेज की मांग पूरी न होने पर उसकी जहर देकर हत्या कर दी। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश इंतखाब आलम की अदालत में चली। ट्रायल के दौरान अंगूरी देवी की मृत्यु हो चुकी है।
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अभियोजन पक्ष से एडीजीसी अशोक कुमार यादव ने पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुल्जिम अरविंद को घटना में दोषी करार देते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा न किए जाने अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने राजेंद्र और सुमन को बरी कर दिया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव ने बताया कि 21 मई 2000 को रामपुर जनपद के शहजाद नगर थानाक्षेत्र के धमौरा निवासी भूकन लाल गुप्ता ने चंदौसी थाने में अपने दामाद अधिवक्ता अरविंद गुप्ता, उसके पिता राजेंद्र गुप्ता, मां अंगूरी देवी और बहन सुमन गुप्ता के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज कराया था।
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भूकन लाल ने पुलिस को बताया था कि उसकी बेटी रानी की शादी वर्ष 1997 में अरविंद के साथ हुई थी। दहेज की मांग पूरी न होने पर उसकी जहर देकर हत्या कर दी। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश इंतखाब आलम की अदालत में चली। ट्रायल के दौरान अंगूरी देवी की मृत्यु हो चुकी है।
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अभियोजन पक्ष से एडीजीसी अशोक कुमार यादव ने पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुल्जिम अरविंद को घटना में दोषी करार देते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा न किए जाने अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने राजेंद्र और सुमन को बरी कर दिया है।