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ट्रेजरी घोटाले में फंसे लेखपाल पर कार्रवाई नहीं
Updated Mon, 27 Aug 2018 02:04 AM IST
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मुरादाबाद।
10 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में फंसे लेखपाल और उसके बेटे पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ठाकुरद्वारा इलाके के लेखपाल लियाकत के खाते में ट्रेजरी घोटाले की रकम से कुछ हिस्सा गया था। उसके बेटे के बैंक खाते में भी घोटाले की रकम जमा की गई थी। साक्ष्य उजागर होने के बाद भी अधिकारी मामले में लीपापोती में जुटे हैं।
पिछले पांच वर्षों में फर्जी एरियर बिल लगाकर ट्रेजरी से करीब 10 करोड़ रुपये निकाले गए। इस मामले में जिला प्रशासन ने सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल मेहरोत्रा को जेल भेजकर खानापूरी कर ली है। घोटाले में कलक्ट्रेट से लेकर ट्रेजरी तक के अहम ओहदेदारों पर उंगलियां उठ रही हैं। बगैर सरकारी तंत्र की मिलीभगत के इतने बड़े घोटाले का अंजाम तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। बावजूद इसके किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दो बाबुओं को निलंबित किया गया है। इसमें भी डीएम का कहना है कि दोनों की सिर्फ लापरवाही थी, किसी आपराधिक साजिश में दोनों शामिल नहीं थे। अधिकारियाें ने कमोबेश सभी कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी है। मातहतों को क्लीन चिट देना अधिकारियों की मजबूरी भी है। नाक तले ट्रेजरी से हुई इस लूट में अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है। यदि कर्मचारियों पर एक्शन हुआ तो जांच की जद में अफसर भी आएंगे। इसीलिए हाकिम कर्मचारियों को बचाने में जुटे हैं।
ट्रेजरी घोटाले की जांच में कदम - कदम पर झोल है। एडीएम प्रशासन लक्ष्मी शंकर सिंह का कहना था कि घोटाले की रकम जिन - जिन के भी बैंक खातों में पहुंची थी उन सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। ठाकुरद्वारा इलाके के लेखपाल लियाकत और उसके बेटे के खाते में भी घोटाले की रकम पहुंची थी, लेकिन इन दोनों का नाम एफआईआर से गायब था। पुलिस विवेचना में इन दोनों के नाम उजागर हुए और पुलिस ने लेखपाल और उसके बेटे को वांछित सूची में भी डाल दिया। विवेचना का हाल यह है कि लेखपाल अपने हलके में ड्यूटी कर रहा है लेकिन पुलिस उसे ढूूंढ नहीं पा रही है। पुलिस द्वारा वांछित करने के बावजूद जिला प्रशासन ने लेखपाल को निलंबित तक नहीं किया है।
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10 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में फंसे लेखपाल और उसके बेटे पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ठाकुरद्वारा इलाके के लेखपाल लियाकत के खाते में ट्रेजरी घोटाले की रकम से कुछ हिस्सा गया था। उसके बेटे के बैंक खाते में भी घोटाले की रकम जमा की गई थी। साक्ष्य उजागर होने के बाद भी अधिकारी मामले में लीपापोती में जुटे हैं।
पिछले पांच वर्षों में फर्जी एरियर बिल लगाकर ट्रेजरी से करीब 10 करोड़ रुपये निकाले गए। इस मामले में जिला प्रशासन ने सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल मेहरोत्रा को जेल भेजकर खानापूरी कर ली है। घोटाले में कलक्ट्रेट से लेकर ट्रेजरी तक के अहम ओहदेदारों पर उंगलियां उठ रही हैं। बगैर सरकारी तंत्र की मिलीभगत के इतने बड़े घोटाले का अंजाम तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। बावजूद इसके किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दो बाबुओं को निलंबित किया गया है। इसमें भी डीएम का कहना है कि दोनों की सिर्फ लापरवाही थी, किसी आपराधिक साजिश में दोनों शामिल नहीं थे। अधिकारियाें ने कमोबेश सभी कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी है। मातहतों को क्लीन चिट देना अधिकारियों की मजबूरी भी है। नाक तले ट्रेजरी से हुई इस लूट में अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है। यदि कर्मचारियों पर एक्शन हुआ तो जांच की जद में अफसर भी आएंगे। इसीलिए हाकिम कर्मचारियों को बचाने में जुटे हैं।
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ट्रेजरी घोटाले की जांच में कदम - कदम पर झोल है। एडीएम प्रशासन लक्ष्मी शंकर सिंह का कहना था कि घोटाले की रकम जिन - जिन के भी बैंक खातों में पहुंची थी उन सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। ठाकुरद्वारा इलाके के लेखपाल लियाकत और उसके बेटे के खाते में भी घोटाले की रकम पहुंची थी, लेकिन इन दोनों का नाम एफआईआर से गायब था। पुलिस विवेचना में इन दोनों के नाम उजागर हुए और पुलिस ने लेखपाल और उसके बेटे को वांछित सूची में भी डाल दिया। विवेचना का हाल यह है कि लेखपाल अपने हलके में ड्यूटी कर रहा है लेकिन पुलिस उसे ढूूंढ नहीं पा रही है। पुलिस द्वारा वांछित करने के बावजूद जिला प्रशासन ने लेखपाल को निलंबित तक नहीं किया है।
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