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बाढ़ में एडवाइजरी तक सिमटी प्रशासनिक कवायद
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:20 AM IST
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मुरादाबाद।
खतरे के निशान से सवा दो फीट ऊपर बह रही रामगंगा की वजह से जिले के 235 गांव और शहर के कई इलाके बाढ़ के हालात से जूझ रहे हैं। कई मोहल्ले ऐसे भी हैं जहां नालों के जवाब दे देने की वजह से तीन फीट तक पानी भरा है। प्रशासन ने इन सभी इलाकों के लिए एक - एक कर कई एडवाइजरी तो जारी कर दीं लेकिन उनके रहने - खाने का कोई इंतजाम नहीं किया।
प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी जा रही है कि बाढ़ आने से पहले और बाद में क्या करें। अफसर सलाह दे रहे हैं कि लोग सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं। पीने और खाने के सामान के साथ दवाओं का इंतजाम कर लेने की भी सलाह दी जा रही है। प्रभावित गांवों और शहर के कुछ हिस्सों में लोगों को घर छोड़ने के लिए मुनादी भी कराई जा रही हैं। लेकिन इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि घर छोड़कर लोग जाएं कहां। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के रहने के लिए राहत कैंप नहीं बनाए गए हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि घर छोड़ते समय अपने कीमती सामान को सुरक्षित रख दें, लेकिन कहां रखें, इसका कोई इंतजाम नहीं है। फोन चार्ज रखने और टीवी देखते रहने की सलाह प्रशासन की एडवाइजरी दे रही है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था चरमरा चुकी है। ऐसे में लोग कैसे फोन चार्ज करेंगे और कहां से टीवी देखेंगे। प्रशासन की पूरी कवायद फिलहाल एडवाइजरी जारी करने तक सिमटी है। पुलिस प्रभावित इलाकों के आसपास पेट्रोलिंग कर रही है। रामगंगा के जल स्तर की जानकारी देने के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। कंट्रोल पानी के घटते - बढ़ते जल स्तर की जानकारी तो दे सकता है लेकिन इससे किसी मदद की उम्मीद मत पालिए। अमूमन इन हालात में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के आसपास स्कूल - कालेजों में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कैंप बनाए जाते हैं। ऐसी कोई कवायद अभी तक प्रशासन की ओर से नहीं दिखी।
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खतरे के निशान से सवा दो फीट ऊपर बह रही रामगंगा की वजह से जिले के 235 गांव और शहर के कई इलाके बाढ़ के हालात से जूझ रहे हैं। कई मोहल्ले ऐसे भी हैं जहां नालों के जवाब दे देने की वजह से तीन फीट तक पानी भरा है। प्रशासन ने इन सभी इलाकों के लिए एक - एक कर कई एडवाइजरी तो जारी कर दीं लेकिन उनके रहने - खाने का कोई इंतजाम नहीं किया।
प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी जा रही है कि बाढ़ आने से पहले और बाद में क्या करें। अफसर सलाह दे रहे हैं कि लोग सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं। पीने और खाने के सामान के साथ दवाओं का इंतजाम कर लेने की भी सलाह दी जा रही है। प्रभावित गांवों और शहर के कुछ हिस्सों में लोगों को घर छोड़ने के लिए मुनादी भी कराई जा रही हैं। लेकिन इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि घर छोड़कर लोग जाएं कहां। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के रहने के लिए राहत कैंप नहीं बनाए गए हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि घर छोड़ते समय अपने कीमती सामान को सुरक्षित रख दें, लेकिन कहां रखें, इसका कोई इंतजाम नहीं है। फोन चार्ज रखने और टीवी देखते रहने की सलाह प्रशासन की एडवाइजरी दे रही है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था चरमरा चुकी है। ऐसे में लोग कैसे फोन चार्ज करेंगे और कहां से टीवी देखेंगे। प्रशासन की पूरी कवायद फिलहाल एडवाइजरी जारी करने तक सिमटी है। पुलिस प्रभावित इलाकों के आसपास पेट्रोलिंग कर रही है। रामगंगा के जल स्तर की जानकारी देने के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। कंट्रोल पानी के घटते - बढ़ते जल स्तर की जानकारी तो दे सकता है लेकिन इससे किसी मदद की उम्मीद मत पालिए। अमूमन इन हालात में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के आसपास स्कूल - कालेजों में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कैंप बनाए जाते हैं। ऐसी कोई कवायद अभी तक प्रशासन की ओर से नहीं दिखी।
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