{"_id":"5bd8c60ebdec22695b77a3ef","slug":"191540933134-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो उम्रकैदियों को मिलेगी सलाखों से आजादी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दो उम्रकैदियों को मिलेगी सलाखों से आजादी
Updated Wed, 31 Oct 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
मुरादाबाद।
जिला जेल में बंद दो उम्रकैदियों को जल्द सलाखों से आजादी मिल सकती है। जेल प्रशासन ने दोनों की रिहाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी है। इनमें से एक अमरोहा जिले में गजरौला का रहने वाला है। दूसरा सजायाफ्ता बंदी भोजपुर का निवासी है। दोनों पिछले 16 वर्षों से जिला जेल में बंद हैं। इनकी रिहाई पर शासन की कमेटी को फैसला लेना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने एक अगस्त को बंदियों की रिहाई के संबंध में एक शासनादेश जारी किया था। शासनादेश के मुताबिक ऐसे उम्रकैदी जो जेल में 16 साल की अवधि काट चुके हैं उनकी रिहाई पर विचार किया जा सकता है। शासनादेश जारी होने के बाद प्रदेश की सभी जेलों में ऐसे बंदियों को तलाशा जा रहा है। जिला जेल में बंद गजरौला का मोहनलाल और भोजपुर का जुल्फिकार शासनादेश के दायरे में आ रहे हैं। दोनों हत्या के मामले में पिछले 16 साल से जेल में बंद हैं। दोनों बंदियों की रिपोर्ट तैयार करके जेल प्रशासन ने रिहाई की संस्तुति कि साथ शासन को भेज दी है। शासन स्तर से कमेटी इनकी रिहाई पर फैसला करेगी।
एक अगस्त 2018 को आए शासनादेश के मुताबिक ऐसी उम्रकैदियों की रिहाई पर विचार किया जा सकता है जो 16 वर्ष की सजा पूरी कर चुके हों। इस श्रेणी में मुरादाबाद जेल के दो बंदी आ रहे हैं। इन दोनों का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा जा रहा है। इनकी रिहाई पर निर्णय शासन को लेना है। - एसएचएम रिजवी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला जेल में बंद दो उम्रकैदियों को जल्द सलाखों से आजादी मिल सकती है। जेल प्रशासन ने दोनों की रिहाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी है। इनमें से एक अमरोहा जिले में गजरौला का रहने वाला है। दूसरा सजायाफ्ता बंदी भोजपुर का निवासी है। दोनों पिछले 16 वर्षों से जिला जेल में बंद हैं। इनकी रिहाई पर शासन की कमेटी को फैसला लेना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने एक अगस्त को बंदियों की रिहाई के संबंध में एक शासनादेश जारी किया था। शासनादेश के मुताबिक ऐसे उम्रकैदी जो जेल में 16 साल की अवधि काट चुके हैं उनकी रिहाई पर विचार किया जा सकता है। शासनादेश जारी होने के बाद प्रदेश की सभी जेलों में ऐसे बंदियों को तलाशा जा रहा है। जिला जेल में बंद गजरौला का मोहनलाल और भोजपुर का जुल्फिकार शासनादेश के दायरे में आ रहे हैं। दोनों हत्या के मामले में पिछले 16 साल से जेल में बंद हैं। दोनों बंदियों की रिपोर्ट तैयार करके जेल प्रशासन ने रिहाई की संस्तुति कि साथ शासन को भेज दी है। शासन स्तर से कमेटी इनकी रिहाई पर फैसला करेगी।
विज्ञापन
एक अगस्त 2018 को आए शासनादेश के मुताबिक ऐसी उम्रकैदियों की रिहाई पर विचार किया जा सकता है जो 16 वर्ष की सजा पूरी कर चुके हों। इस श्रेणी में मुरादाबाद जेल के दो बंदी आ रहे हैं। इन दोनों का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा जा रहा है। इनकी रिहाई पर निर्णय शासन को लेना है। - एसएचएम रिजवी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।
विज्ञापन