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45 में से एससी एसटी एक्ट के 15 मामले जांच में खारिज
Updated Mon, 27 Aug 2018 02:00 AM IST
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मुरादाबाद।
एससी एसटी एक्ट में बिना जांच के ही आरोपियाें की गिरफ्तारी इन दिनों चर्चा बनी हुई है। दूसरी तरफ जनपद के अंदर पिछले सात माह के अंदर एससी एसटी एक्ट के करीब 45 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से जांच के बाद भी ज्यादातर मामलों में गिरफ्तारियां की गई हैं तो 15 मामलों में आरोप गलत पाए गए हैं। इनको जांच के दौरान पुलिस ने खारिज कर उनमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है।
आंकड़े इसी साल जनवरी से लेकर जुलाई तक के हैं। पिछले सात माह में एससी - एसटी एक्ट के 45 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 22 मामलों में पुलिस ने ज्यादातर आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की है। आठ मामले अभी विचाराधीन हैं। अगर एससी एसटी एक्ट के मामलों की विवेचना किए जाने से पहले ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाती तो खारिज किए गए 15 मामलों के आरोपियों का हाल भी नोएडा के रिटायर्ड कर्नल की तरह हो जाता। वह भी झूठे आरोप लगने के बाद भी जेल जाने को मजबूर होते। एससी एसटी एक्ट के ज्यादातर मामले देहात क्षेत्रों में सामने आते हैं। एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने बताया कि जिस तरह अन्य मामलों की जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है, उसी तरह एससी - एसटी एक्ट के मामलों की भी जांच की गई है। ऐसे मामलों की जांच सीओ को दी जाती है। कुछ मामले जांच के दौरान गलत पाए जाते हैं। जो रंजिश या दूसरों को फंसाने के लिए दर्ज कराए जाते हैं। उन मामलों में जांच के दौरान साक्ष्यों के आधार पर कार्यवाही कर एफआर लगा दी जाती है। आरोप सत्य पाए जाने पर गिरफ्तारी की जाती है।
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एससी एसटी एक्ट में बिना जांच के ही आरोपियाें की गिरफ्तारी इन दिनों चर्चा बनी हुई है। दूसरी तरफ जनपद के अंदर पिछले सात माह के अंदर एससी एसटी एक्ट के करीब 45 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से जांच के बाद भी ज्यादातर मामलों में गिरफ्तारियां की गई हैं तो 15 मामलों में आरोप गलत पाए गए हैं। इनको जांच के दौरान पुलिस ने खारिज कर उनमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है।
आंकड़े इसी साल जनवरी से लेकर जुलाई तक के हैं। पिछले सात माह में एससी - एसटी एक्ट के 45 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 22 मामलों में पुलिस ने ज्यादातर आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की है। आठ मामले अभी विचाराधीन हैं। अगर एससी एसटी एक्ट के मामलों की विवेचना किए जाने से पहले ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाती तो खारिज किए गए 15 मामलों के आरोपियों का हाल भी नोएडा के रिटायर्ड कर्नल की तरह हो जाता। वह भी झूठे आरोप लगने के बाद भी जेल जाने को मजबूर होते। एससी एसटी एक्ट के ज्यादातर मामले देहात क्षेत्रों में सामने आते हैं। एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने बताया कि जिस तरह अन्य मामलों की जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है, उसी तरह एससी - एसटी एक्ट के मामलों की भी जांच की गई है। ऐसे मामलों की जांच सीओ को दी जाती है। कुछ मामले जांच के दौरान गलत पाए जाते हैं। जो रंजिश या दूसरों को फंसाने के लिए दर्ज कराए जाते हैं। उन मामलों में जांच के दौरान साक्ष्यों के आधार पर कार्यवाही कर एफआर लगा दी जाती है। आरोप सत्य पाए जाने पर गिरफ्तारी की जाती है।
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