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जेल भूमि घोटाले में पूर्व एसडीएम समेत पांच फंसे
Updated Wed, 12 Sep 2018 02:28 AM IST
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मुरादाबाद।
बहुचर्चित जेल भूमि घोटाले में पूर्व एसडीएम और तहसीलदार समेत पांच अधिकारियों की गर्दनें फंस गई है। एडीएम प्रशासन की जांच में इन सभी को दोषी पाया गया है। संबंधित अफसरों पर कार्रवाई के लिए एडीएम की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि अधिकारियों और शहर के एक होटल संचालक ने मिलकर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया था।
एडीएम प्रशासन की जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि प्रस्तावित जेल के लिए की गई भूमि खरीद में बड़े पैमाने पर घपला हुआ। शहर के एक होटल संचालक और तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपालों ने मिलकर यह खेल किया। दलपतपुर जीरो प्वाइंट के पास जहां जेल प्रस्तावित है वहां भूमि खरीद करते समय अधिकारियों ने एक होटल संचालक को भूमि खरीदवाई। होटल संचालक द्वारा खरीदी गई भूमि जेल प्रोजेक्ट में नहीं आ रही थी, लिहाजा भूमि सस्ती मिल गई। कुछ दिन बाद ही यह भूमि प्रोजेेक्ट में नहीं होने के बावजूद अफसरों ने होटल संचालक से राज्य सरकार के पक्ष में खरीद ली। सर्किल रेट के चार गुना की दर से होटल संचालक को भूमि का मुआवजा दिया गया। जांच में खुलासा हुआ है कि मुआवजे की इस रकम का अफसरों और होटल संचालक के बीच बंदरबांट हुआ। बाद में यह भूमि जेल प्रोजेक्ट के अंदर स्थित वक्फ की भूमि से एक्सचेंज कर दी गई। वक्फ की भूमि का विनिमय होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो इस घोटाले से पर्दा उठा। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। सदर तहसील के एक पूर्व एसडीएम और तहसीलदार समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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बहुचर्चित जेल भूमि घोटाले में पूर्व एसडीएम और तहसीलदार समेत पांच अधिकारियों की गर्दनें फंस गई है। एडीएम प्रशासन की जांच में इन सभी को दोषी पाया गया है। संबंधित अफसरों पर कार्रवाई के लिए एडीएम की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि अधिकारियों और शहर के एक होटल संचालक ने मिलकर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया था।
एडीएम प्रशासन की जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि प्रस्तावित जेल के लिए की गई भूमि खरीद में बड़े पैमाने पर घपला हुआ। शहर के एक होटल संचालक और तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपालों ने मिलकर यह खेल किया। दलपतपुर जीरो प्वाइंट के पास जहां जेल प्रस्तावित है वहां भूमि खरीद करते समय अधिकारियों ने एक होटल संचालक को भूमि खरीदवाई। होटल संचालक द्वारा खरीदी गई भूमि जेल प्रोजेक्ट में नहीं आ रही थी, लिहाजा भूमि सस्ती मिल गई। कुछ दिन बाद ही यह भूमि प्रोजेेक्ट में नहीं होने के बावजूद अफसरों ने होटल संचालक से राज्य सरकार के पक्ष में खरीद ली। सर्किल रेट के चार गुना की दर से होटल संचालक को भूमि का मुआवजा दिया गया। जांच में खुलासा हुआ है कि मुआवजे की इस रकम का अफसरों और होटल संचालक के बीच बंदरबांट हुआ। बाद में यह भूमि जेल प्रोजेक्ट के अंदर स्थित वक्फ की भूमि से एक्सचेंज कर दी गई। वक्फ की भूमि का विनिमय होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो इस घोटाले से पर्दा उठा। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। सदर तहसील के एक पूर्व एसडीएम और तहसीलदार समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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