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कुत्ते के काटने से मासूम में हाइड्रोफोबिया के लक्षण
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मुरादाबाद। आवारा कुत्ते के काटने से पंडित नगला का एक मासूम हाइड्रोफोबिया का शिकार हो गया। मासूम की हालत बिगड़ने पर मंगलवार को परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर मासूम को मेडिकल कालेज मेरठ के लिए रेफर कर दिया। परिजन मासूम को गोदी में लेकर अस्पताल में भटकते रहे, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल सकी।
पंडित नगला निवासी कमल के आठ साल के बेटे नैतिक को महीने भर पहले आवारा कुत्ते ने काट लिया था। नैतिक घर के बाहर ही बच्चों के साथ खेल रहा था। कुत्ते के काटने पर परिजनों ने उसे टीटी का इंजेक्शन तो लगाया, लेकिन एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं दी गई। परिजनों ने बताया कि दो दिन पहले ही नैतिक के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा। पहले तो कुछ समझ नहीं पाए। सोमवार से उसके मुंह से झाग आने लगा और पानी को देखकर डरने लगा। चलने में भी कांपने लगा। मंगलवार को उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। परिजन दोपहर करीब 12 बजे नैतिक को जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे।
डाक्टरों ने नैतिक में हाइड्रोफोबिया के लक्षण बताते हुए मुरादाबाद में इलाज होने से हाथ खड़े कर दिए। नैतिक को मेडिकल कालेज मेरठ के लिए रेफर कर दिया। नैतिक के परिजनों की आर्थिक हालत बेहद खराब है। मेरठ रेफर होने पर 108 एंबुलेंस के लिए परिजन भटकते रहे। लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
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- बच्चे में हाइड्रोफोबिया के लक्षण हैं। इमरजेंसी 108 एंबुलेंस में हाइड्रोफोबिया और मानसिक रूप से कमजोर रोगियों को नहीं ले जाया जाता है। जिसके चलते ही नैतिक को मेरठ रेफर करने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई। - डा. राजेंद्र कुमार, एमएस जिला अस्पताल
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पंडित नगला निवासी कमल के आठ साल के बेटे नैतिक को महीने भर पहले आवारा कुत्ते ने काट लिया था। नैतिक घर के बाहर ही बच्चों के साथ खेल रहा था। कुत्ते के काटने पर परिजनों ने उसे टीटी का इंजेक्शन तो लगाया, लेकिन एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं दी गई। परिजनों ने बताया कि दो दिन पहले ही नैतिक के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा। पहले तो कुछ समझ नहीं पाए। सोमवार से उसके मुंह से झाग आने लगा और पानी को देखकर डरने लगा। चलने में भी कांपने लगा। मंगलवार को उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। परिजन दोपहर करीब 12 बजे नैतिक को जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे।
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डाक्टरों ने नैतिक में हाइड्रोफोबिया के लक्षण बताते हुए मुरादाबाद में इलाज होने से हाथ खड़े कर दिए। नैतिक को मेडिकल कालेज मेरठ के लिए रेफर कर दिया। नैतिक के परिजनों की आर्थिक हालत बेहद खराब है। मेरठ रेफर होने पर 108 एंबुलेंस के लिए परिजन भटकते रहे। लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
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- बच्चे में हाइड्रोफोबिया के लक्षण हैं। इमरजेंसी 108 एंबुलेंस में हाइड्रोफोबिया और मानसिक रूप से कमजोर रोगियों को नहीं ले जाया जाता है। जिसके चलते ही नैतिक को मेरठ रेफर करने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई। - डा. राजेंद्र कुमार, एमएस जिला अस्पताल