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उम्मीद की मशाल: स्टेडियम के लिए नहीं मिली जमीन तो अजीम ने खेतों को किराये पर लेकर युवाओं के लिए बना दिया मैदान

Mon, 26 Sep 2022 01:31 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 26 Sep 2022 01:31 PM IST
सार

संभल रोड स्थित इस गांव में प्रशासन को मिनी स्टेडियम बनाने के लिए जमीन नहीं मिली थी। इसके बाद गांव के युवा अजीम पाशा ने लोगों से उनके खेत लीज पर लेकर उन्हें मैदान में तब्दील कर दिया। इस मैदान में खिलाड़ी क्रिकेट का अभ्यास भी करते हैं।

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Azim built a playground for the youth in Dingarpur village by renting out the fields
अभ्यास करते युवा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुरादाबाद के डींगरपुर गांव के खेतों में खिलाड़ियों की फसल तैयार हो रही है। इस फसल को तैयार करने के लिए गांव के युवा मोहम्मद अजीम पाशा मेहनत कर रहे है। नतीजतन मैदान का रूप ले चुके इन खेतों से अभ्यास करके राष्ट्रीय स्तर के एथलीट तैयार हुए हैं। अब आसपास के कई गांवों के युवा यहां सेना, पुलिस

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समेत विभिन्न भर्तियों के लिए अभ्यास करने आते हैं।

संभल रोड स्थित इस गांव में प्रशासन को मिनी स्टेडियम बनाने के लिए जमीन नहीं मिली थी। इसके बाद गांव के युवा अजीम पाशा ने लोगों से उनके खेत लीज पर लेकर उन्हें मैदान में तब्दील कर दिया। इस मैदान में खिलाड़ी क्रिकेट का अभ्यास भी करते हैं। यहीं से गांव के मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद सहरूज को लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश मिला है। आसिफ और जुनैद यूपी की अंडर-14 और 16 क्रिकेट टीम के लिए कैंप में चुने गए हैं। मोहम्मद वारिक, नदीम खाम, फरमान, रेहान अली, मोहम्मद अजीम समेत कई खिलाड़ी नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं।
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गुरेर, भैंसोड़, ललवारा, भीकनपुर, हरियाना, कमालपुर, सिरसी, महमूदपुर आदि गावों से एथलेटिक्स का अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को डींगरपुर का यह मैदान बेहद काम आ रहा है। अजीम पाशा खुद भी स्पोर्ट्स कोटे से रेलवे में टोकन पोर्टर के पद पर भर्ती हुए हैं। अब युवाओं को खेलों के जरिये सेना, पुलिस और अन्य नौकरियों में जाने की राह दिखा रहे हैं।

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चक रोड पर भागना शुरू किया था
बड़े भाई को देखकर गांव के चक रोड पर मैंने दौड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे गांव के तमाम लड़के साथ दौड़ने लगे। वहां से बैलगाड़ी गुजरती थी तो रास्ता खराब हो जाता था। सब लड़के मिलकर ट्रैक को ठीक करते थे। इसी अभ्यास के बल पर मैंने 2010 और 2011 में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीता। 2013 में रेलवे में नौकरी मिल गई। इसके बाद भी कई साल तक चक रोड पर दौड़ते रहे। 2019 की शुरुआत में ही गांव के लोगों से बातचीत कर चक रोड के आसपास उनके 20 बीघा खेतों को किराये पर ले लिया। वहां स्पोर्ट्स के लिए सुविधाएं विकसित कीं। अब लोग इसे गांव के स्टेडियम के नाम से पहचानने लगे हैं। -अजीम पाशा, स्पोर्ट्समैन

गांव के मैदान पर अभ्यास करके मैंने 11.28 सेकंड में 100 मीटर रेस लगाकर नॉर्दर्न जोन नेशनल चैंपियनशिप में पहला स्थान पाया था। इसके लिए मुझे गोल्ड मेडल मिला था। यह प्रतियोगिता देहरादून में आयोजित हुई थी। -मोहम्मद वारिक, एथलीट

मैंने हमेशा गांव के मैदान पर ही अभ्यास किया है। पहले चकरोड पर दौड़ते थे। इसी अभ्यास से मुझे भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में लांग जंप में कांस्य पदक मिला था। -नदीम खान, एथलीट

इन्ही खेतों (मैदान) की जमीन पर अभ्यास करके मैं दिल्ली, मुंबई, विशाखापटनम, चेन्नई में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं खेला हूं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 मीटर दौड़ में मुझे स्वर्ण पदक मिला -मोहम्मद फरमान, एथलीट

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