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Azam Khan: 59 पेज में फैसला... आजम को अब तक की अधिकतम सजा; नौ गवाहों ने की घटना की पुष्टि; जानें कब-कब हुई सजा

Fri, 31 May 2024 12:48 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 31 May 2024 12:48 PM IST
सार

डूंगरपुर के एक और मामले में दोषी करार दिए गए सपा नेता आजम खां को बृहस्पतिवार को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही उन पर 14 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट ने इसी मामले में आजम के करीबी बरेली निवासी ठेकेदार बरकत अली को सात साल की सजा और छह लाख रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई।

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Azam Khan dungarpur case Judgment in 59 pages Azam got maximum punishment till now witnesses confirm incident
आजम खां को फिर सजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डूंगरपुर में अबरार हुसैन का मकान खाली कराने के दौरान किए गए उत्पीड़न की पूरी कहानी बृहस्पतिवार को आए 59 पेज के फैसले में दर्ज है। आजम को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई है। अब तक जिन छह मामलों में आजम को सजा हुई है, उनमें यह सजा सबसे ज्यादा है। इससे पहले उन्हें दो मामलों में सात-सात साल, दो मामलों में दो-दो साल और एक केस में तीन साल की सजा हुई है।
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डूंगरपुर के इस प्रकरण में आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन की ओर से वादी समेत नौ गवाहों को पेश किया गया, जिन्होंने घटना की पुष्टि की। अभियोजन की ओर से इस मामले में कठोर सजा दिए जाने की मांग की गई। 2019 में गंज थाने में डूंगरपुर बस्ती को खाली कराने के नाम पर लूटपाट, डकैती, मारपीट व धमकाने के 12 मुकदमे दर्ज हुए थे। 
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चार मुकदमों में कोर्ट का फैसला आ चुका है। आठ मामलों में फैसला आना बाकी है। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने डूंगरपुर बस्ती निवासी अबरार हुसैन द्वारा दर्ज कराए गए केस में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में अभियोजन द्वारा पेश किए गवाहों के बयानों का उल्लेख व हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की दाखिल की गई नजीरें पेश कीं। 
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बचाव पक्ष की ओर से दाखिल दस्तावेजी सुबूत और लिखित बहस व सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की नजीरों का उल्लेख किया। कोर्ट ने अपने फैसले में सपा नेता आजम खां को 10 साल की कैद व 14 लाख रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। ठेकेदार बरकत अली को सात साल की कैद व छह लाख रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई।
 
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अभियोजन ने दी ये दलील
अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अमित सक्सेना व एडीजीसी सीमा सिंह राणा ने दलील दी कि सपा नेता आजम खां और ठेकेदार बरकत अली ने सुनियोजित तरीके से अपराध किया है और इनके द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है। आजम खां का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। दोनों को अधिक से अधिक सजा दी जाए।

 

बचाव पक्ष की दलील
सपा नेता आजम खां के अधिवक्ताओं द्वारा दलील दी गई कि सपा नेता आजम खां को राजनीतिक रंजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। वह बूढ़े व बीमार हैं। उनका राजनीतिक कॅरिअर बेदाग रहा है। उन्हें कम से कम सजा दी जाए।
 

अभियोजन की टीम में ये रहे शामिल 
जिला शासकीय अधिवक्ता अमित सक्सेना, एडीजीसी सीमा सिंह राणा, कुमार सौरभ, संयुक्त निदेशक अभियोजन रोहिताश पांडे, संयुक्त निदेशक अभियोजन अनिल राणा, एसपीओ शिव प्रकाश पांडे, एसपीओ अमरनाथ तिवारी, एपीओ नीरज कुमार।

17 माह में छह मामलों में हुई आजम खां को सजा
सपा नेता आजम खां पर अब तक 108 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिसमें 80 मुकदमे ट्रायल पर चल रहे हैं। कोर्ट पिछले 17 माह में छह मामलों में सपा नेता को सजा सुना चुकी है। हालांकि, चार मामलों में उन्हें बरी भी किया जा चुका है। बरी किए गए एक मामले को अभियोजन की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।   

 

2019 के लोकसभा चुनाव से सपा नेता की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं थीं। चुनाव के दौरान ही उन पर करीब एक दर्जन मुकदमे दर्ज हुए थे। उसके बाद भी तमाम मुकदमे दर्ज हुए। आजम खां पर रामपुर, मुरादाबाद, फिरोजाबाद समेत अन्य जिलों में कुल 108 मुकदमे पंजीकृत हुए थे, जिसमें 80 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।


 

17 माह में अब तक छह मुकदमों में सपा नेता आजम खां को कोर्ट में सजा सुनाई जा चुकी है और चार मामलों में वह बरी हो चुके हैं। हालांकि, एक मामले में सरकार की ओर से सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की जा चुकी है।  

इन मामलों में हो चुके हैं बरी
पड़ोसी पर जानलेवा हमला करने, डूंगरपुर के दो मामले और भड़काऊ भाषण के मामले में सपा नेता आजम खां को बरी किया जा चुका है। भड़काऊ भाषण के मामले में सरकार की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की जा चुकी है

 

आजम को कब-कब हुई सजा
  • 27 अक्तूबर 2022 को मिलक में दर्ज लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा तीन वर्ष की सजा व दो हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, सेशन कोर्ट ने इस मामले में उनको बरी कर दिया था और यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
  • 15 फरवरी 2023 को मुरादाबाद के थाना छजलैट में दर्ज मुकदमे में एमपी-एमएलए कोर्ट मुरादाबाद द्वारा दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। 
  • 15 जुलाई 2023 को शहजादनगर थाने में दर्ज नफरती भाषण के मामले में दो वर्ष के कारावास तथा 2500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
  • 18 अक्तूबर 2023 को थाना गंज में दर्ज अब्दुल्ला के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा सात वर्ष की सजा व 50 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई।
  • 18 मार्च 2024 -डूंगरपुर मामले में आजम खां को सात साल की कैद और आठ लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
  • 30 मई 2024- डूंगरपुर के एक और मामले में 10 साल की सजा और 14 लाख का जुर्माना 

आजम खां को 10 साल की सजा, 14 लाख का जुर्माना
डूंगरपुर के एक और मामले में दोषी करार दिए गए सपा नेता आजम खां को बृहस्पतिवार को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही उन पर 14 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट ने इसी मामले में आजम के करीबी बरेली निवासी ठेकेदार बरकत अली को सात साल की सजा और छह लाख रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई।
 

सपा नेता आजम खां के खिलाफ 2019 में डूंगरपुर बस्ती में रहने वाले लोगों ने बस्ती को खाली कराने के नाम पर लूटपाट, चोरी, मारपीट समेत अन्य धाराओं में गंज थाने में 12 मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें से तीन मुकदमों में फैसला आ चुका था। अब तक दो मामलों में सपा नेता बरी हो चुके हैं। तीसरे मामले में उन्हें सात साल की कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। बृहस्पतिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट सेशन ट्रायल के जज डॉ. विजय कुमार ने डूंगरपुर प्रकरण के चौथे मामले में आजम खां को 10 साल कैद की सजा सुनाई।

 

सपा नेता आजम खां पर दर्ज डूंगरपुर प्रकरण के आठ मामले अभी भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में सात साल सजा पाने के बाद से आजम खां सीतापुर जेल में बंद हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया है, लेकिन अन्य मामलों में सजा मिलने के चलते वो अभी जेल से बाहर नहीं आ सके हैं। सुनवाई के दौरान आजम सीतापुर और बरेली निवासी ठेकेदार बरकत अली रामपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े।

ये है मामला
डूंगरपुर निवासी अबरार हुसैन ने गंज थाने में 13 अगस्त 2019 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि तत्कालीन सीओ आले हसन, दरोगा फिरोज खां, ठेकेदार बरकत अली, सीएंडडीएस के जेई परवेज आलम ने छह दिसंबर 2016 की सुबह बस्ती में पहुंचे और उनसे मकान खाली करने को कहा। दरोगा फिरोज ने फायरिंग भी की। उसकी वाशिंग मशीन, सोने-चांदी के जेवर व पांच हजार रुपये लूटकर ले गए। विवेचना के दौरान सपा नेता आजम खां का भी नाम शामिल किया गया था। इस मुकदमे में जानलेवा हमले और डकैती के भी आरोप लगे।
 

मामले में तीन आरोपियों पर फैसला आना बाकी
डूंगरपुर निवासी अबरार हुसैन ने तत्कालीन सीओ आले हसन, दरोगा फिरोज खां, ठेकेदार बरकत अली, सीएंडडीएस के जेई परवेज आलम को आरोपी बनाया था, लेकिन पुलिस की तफ्तीश में सपा नेता आजम खां का नाम भी सामने आया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों की केस फाइलों को अलग-अलग कर दिया गया। एक फाइल में सपा नेता आजम खां और ठेकेदार बरकत अली का केस चला, जिसका फैसला बृहस्पतिवार को सुनाया गया। रिटायर्ड सीओ आले हसन का केस हाईकोर्ट से शार्ट टर्म स्टे हो चुका है। उनकी पत्रावली अलग चल रही है। परवेज आलम व दरोगा फिरोज खां की पत्रावली अलग है, जिसका ट्रायल चल रहा है।
 

दोषियों को इन धाराओं में हुई सजा
सपा नेता आजम खां को 392 आईपीसी में 10 साल का कठोर कारावास एवं सात लाख रुपये जुर्माना, 452 आईपीसी में सात साल का कठोर कारावास एवं पांच लाख रुपये जुर्माना, 504 आईपीसी में दो साल का साधारण कारावास एवं एक लाख रुपये जुर्माना, 506 आईपीसी में दो साल का साधारण कारावास एवं एक लाख रुपये जुर्माना व धारा 120 बी में आपराधिक षड्यंत्र का दोषी मानते हुए सजा दी गई है। वहीं ठेकेदार बरकत अली को 392 आईपीसी में सात साल का कठोर कारावास एवं तीन लाख रुपये जुर्माना, 452 आईपीसी में छह साल का कठोर कारावास एवं दो लाख रुपये जुर्माना, 504 आईपीसी में दो साल का साधारण कारावास एवं 50 हजार रुपये जुर्मान, 506 आईपीसी में दो साल का साधारण कारावास एवं 50 रुपये हजार जुर्माना की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
 
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