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Moradabad: खनन सिंडिकेट की जड़े नहीं हिला पा रही पुलिस, खनन के खेल में हर पांच किलोमीटर पर फिल्डर तैनात
Fri, 14 Oct 2022 10:14 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 14 Oct 2022 10:14 AM IST
सार
उत्तराखंड से आने वाले डंपरों पर कार्रवाई के लिए उन्होंने थाना प्रभारी और चौकी इंचार्जों को निर्देश दिए थे। बावजूद इसके डंपर का संचालन बंद नहीं हुआ था। तब वह खुद ही ठाकुरद्वारा क्षेत्र में जाकर कार्रवाई करती थीं। चर्चा है कि इससे बौखलाकर खनन माफिया ने अपनी पहुंच के बल पर उनका ट्रांसफर करा दिया था।
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Attacks On Up Police
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुरादाबाद जिले में खनन सिंडिकेट की जड़े गहरी हैं। जिसे हिलाने की कोशिश में जनपद में तैनात रहे एसपी, तीन दरोगा और दो इंस्पेक्टरों को ट्रांसफर की
‘सौगात’ मिल चुकी है, लेकिन खनन का खेल जारी रहा। मुरादाबाद में 2016 में एसपी देहात के पद पर तैनात रहीं आईपीएस सुजाता सिंह ने कांठ, डिलारी, ठाकुरद्वारा और भगतपुर में खनन पर कार्रवाई की थी।
उत्तराखंड से आने वाले डंपरों पर कार्रवाई के लिए उन्होंने थाना प्रभारी और चौकी इंचार्जों को निर्देश दिए थे। बावजूद इसके डंपर का संचालन बंद नहीं हुआ था। तब वह खुद ही ठाकुरद्वारा क्षेत्र में जाकर कार्रवाई करती थीं। चर्चा है कि इससे बौखलाकर खनन माफिया ने अपनी पहुंच के बल पर उनका ट्रांसफर करा दिया था।
13 सितंबर को खनन माफिया ने लोगों को उकसाकर एसडीएम और खनन अधिकारी पर हमला करा कर डंपर छुड़ा लिए थे। इस घटना से कुछ दिन पहले भी जनपद की पुलिस में अचानक एक सीओ, दो इंस्पेक्टर और तीन दरोगा के ट्रांसफर किए गए थे। सूत्रों का दावा है इन ट्रांसफर के पीछे भी खनन का खेल था।
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बताया जा रहा है कि ट्रांसफर के पीछे खनन का ही मामला था। तब एक दरोगा की ऑडियो बरेली जोन के एक बड़े अधिकारी के पास पहुंची थी। जिसमें दरोगा एक व्यक्ति को जनपद के एक अधिकारी के नाम पर धमकाकर खनन माफिया उगाही की बात कर रहा था। इसके बाद ही दरोगा, इंस्पेक्टर और सीओ का ट्रांसफर किया गया था। हालांकि ऑडियो वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंचाने में भी एक अन्य दरोगा का नाम सामने आया था।
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‘सौगात’ मिल चुकी है, लेकिन खनन का खेल जारी रहा। मुरादाबाद में 2016 में एसपी देहात के पद पर तैनात रहीं आईपीएस सुजाता सिंह ने कांठ, डिलारी, ठाकुरद्वारा और भगतपुर में खनन पर कार्रवाई की थी।
उत्तराखंड से आने वाले डंपरों पर कार्रवाई के लिए उन्होंने थाना प्रभारी और चौकी इंचार्जों को निर्देश दिए थे। बावजूद इसके डंपर का संचालन बंद नहीं हुआ था। तब वह खुद ही ठाकुरद्वारा क्षेत्र में जाकर कार्रवाई करती थीं। चर्चा है कि इससे बौखलाकर खनन माफिया ने अपनी पहुंच के बल पर उनका ट्रांसफर करा दिया था।
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13 सितंबर को खनन माफिया ने लोगों को उकसाकर एसडीएम और खनन अधिकारी पर हमला करा कर डंपर छुड़ा लिए थे। इस घटना से कुछ दिन पहले भी जनपद की पुलिस में अचानक एक सीओ, दो इंस्पेक्टर और तीन दरोगा के ट्रांसफर किए गए थे। सूत्रों का दावा है इन ट्रांसफर के पीछे भी खनन का खेल था।
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बताया जा रहा है कि ट्रांसफर के पीछे खनन का ही मामला था। तब एक दरोगा की ऑडियो बरेली जोन के एक बड़े अधिकारी के पास पहुंची थी। जिसमें दरोगा एक व्यक्ति को जनपद के एक अधिकारी के नाम पर धमकाकर खनन माफिया उगाही की बात कर रहा था। इसके बाद ही दरोगा, इंस्पेक्टर और सीओ का ट्रांसफर किया गया था। हालांकि ऑडियो वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंचाने में भी एक अन्य दरोगा का नाम सामने आया था।
जिससे गुस्साए अफसरों ने उसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी थी। इसके बाद शिकायत करने वाले दरोगा को भी जिले से बाहर कर दिया गया। इनके ट्रांसफर के पीछे भी जनहित ही बताया गया। पहले एसडीएम और फिर पुलिस टीम पर हमला करने वाला पचास हजार का इनामी जफर अब तक फरार है लेकिन पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाई है।
खनन के खेल में हर पांच किलोमीटर पर फिल्डर तैनात
खनन माफिया हर पांच किलोमीटर की दूरी पर अपना एक फिल्डर तैनात करते हैं। ये फिल्डर एसडीएम, सीओ और थाना प्रभारी की लोकेशन खनन माफिया और
डंपर चालकों दे देते हैं। इसके लिए फिल्डर को रकम दी जाती है। पिछले दिनों पुलिस के हत्थे चढ़े वसीम ने पुलिस पूछताछ में ये कबूला था।
ठाकुरद्वारा सर्किल में हैं 500 से ज्यादा डंपर
ठाकुरद्वारा सर्किल के ठाकुरद्वारा, डिलारी, भोजपुर और भगतपुर थानाक्षेत्र के गांव में पांच सौ ज्यादा डंपर हैं। इन डंपरों के जरिये ही उत्तराखंड से रेता, बजरी और बजरफुट लाया जाता है। इन डंपरों को उत्तराखंड की सीमा से ठाकुरद्वारा और भगतपुर थानाक्षेत्र में प्रवेश किया जाता है।
काशीपुर से भगतपुर की नेपा चौकी के सामने से डंपर गुजरते हुए अलीगंज होते हुए रोशनपुर, चांदपुर होते हुए भोजपुर तक पहुंचते हैं जबकि काशीपुर से ठाकुरद्वारा होते हुए धारकनगला से कॉसमॉस अस्पताल के पास कांठ रोड पर पहुंचाए जाते हैं। ठाकुरद्वारा से लेकर मुरादाबाद तक कई ऐसे गांव में हैं जहां एक-एक गांव में 20-30 तक डंपर हैं।
खनन के खेल में हर पांच किलोमीटर पर फिल्डर तैनात
खनन माफिया हर पांच किलोमीटर की दूरी पर अपना एक फिल्डर तैनात करते हैं। ये फिल्डर एसडीएम, सीओ और थाना प्रभारी की लोकेशन खनन माफिया और
डंपर चालकों दे देते हैं। इसके लिए फिल्डर को रकम दी जाती है। पिछले दिनों पुलिस के हत्थे चढ़े वसीम ने पुलिस पूछताछ में ये कबूला था।
ठाकुरद्वारा सर्किल में हैं 500 से ज्यादा डंपर
ठाकुरद्वारा सर्किल के ठाकुरद्वारा, डिलारी, भोजपुर और भगतपुर थानाक्षेत्र के गांव में पांच सौ ज्यादा डंपर हैं। इन डंपरों के जरिये ही उत्तराखंड से रेता, बजरी और बजरफुट लाया जाता है। इन डंपरों को उत्तराखंड की सीमा से ठाकुरद्वारा और भगतपुर थानाक्षेत्र में प्रवेश किया जाता है।
काशीपुर से भगतपुर की नेपा चौकी के सामने से डंपर गुजरते हुए अलीगंज होते हुए रोशनपुर, चांदपुर होते हुए भोजपुर तक पहुंचते हैं जबकि काशीपुर से ठाकुरद्वारा होते हुए धारकनगला से कॉसमॉस अस्पताल के पास कांठ रोड पर पहुंचाए जाते हैं। ठाकुरद्वारा से लेकर मुरादाबाद तक कई ऐसे गांव में हैं जहां एक-एक गांव में 20-30 तक डंपर हैं।