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भारत-चीन सीमा तक सुरक्षित पहुंचे सेना का सामान, मुरादाबाद से होगी निगरानी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 02:07 AM IST
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Army baggage safely reached Indo-China border, will be monitored from Moradabad
उत्तराखंड में चल रहा सुरंग निर्माण का काम। - फोटो : CITY
शिवम वर्मा
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मुरादाबाद। भारत-चीन सीमा तक सेना का साजो-सामान सुरक्षित पहुंचे इसके लिए मुरादाबाद से निगरानी की जा सकेगी। इसके लिए मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में कंट्रोल रूम तैयार किया जाएगा। इस पर कुल लागत लगभग 15 करोड़ रुपये आएगी। रेलवे प्रशासन ने रेलवे बोर्ड की सहमति के बाद सभी तैयारियां पूरी कर लीं हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में निर्माण कार्य शुरू होगा।
दरअसल ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट का 125 किमी हिस्सा मुरादाबाद रेल मंडल में आ रहा है। इसमें से 105 किमी में सिर्फ 17 सुरंगें हैं। इन सुरंगों की निगरानी के लिए डीआरएम कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ को रेल लाइन से जोड़ा जा रहा है। उत्तराखंड में निर्माणाधीन यह रेल लाइन भारत-चीन सीमा से काफी नजदीक है। रेल विकास निगम लिमिटेड के सर्वे के अनुसार उत्तराखंड की करीब 345 किमी की सीमा चीन से सीधे मिलती है। इसमें से 122 किमी उत्तरकाशी और 88 किमी सीमा चमोली जिले से सटती है। चमोली की नीति घाटी से सटी सीमा बेहद संवेदनशील मानी जाती है। यहां बाड़ाहोती क्षेत्र में 2014 से 2018 के बीच चीन कई बार घुसपैठ की कोशिश कर चुका है। इस दुर्गम क्षेत्र में सेना को अपना सामान ले जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इससे समय भी अधिक लगता है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सेना का सामान पूरी सुरक्षा से और बेहद कम समय में सीमा तक पहुंचाया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है और 2023 तक यह पूरा होना है। इससे सामान्य यात्रियों और चार धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को भी लाभ होगा। अभी श्रद्धालुओं को ऋषिकेश से कर्ण प्रयाग तक पहुंचने में छह घंटे लगते हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यह सफर ढाई घंटे में पूरा किया जाएगा।
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12 स्टेशन, 17 सुरंगें, 15 पुल हो रहे हैं तैयार
16,216 करोड़ की लागत से इस परियोजना में 12 नए रेलवे स्टेशन, 15 पुल और 17 सुरंगें तैयार की जा रही हैं। इस परियोजना का 85 फीसदी हिस्सा सुरंगों का है। सबसे लंबी सुरंग 14.8 किमी की है जो देवप्रयाग के नजदीक है। इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने उत्तराखंड के चार जनपदों टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, पौढ़ी गढ़वाल और चमोली में भूमि अधिग्रहण भी किया है। प्रोजेक्ट के तहत बनियावाल, रानीपोखरी, जाजल, मरोड़ा, बरेठ, मक्कूमठ, नंदप्रयाग, पीपलकोठी, सोनप्रयाग, जोशीमठ, आदि रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह न सिर्फ धार्मिक यात्रा की दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट के 105 किमी सेक्शन में बन रही 17 सुरंगों की निगरानी के लिए मंडल कार्यालय में कंट्रोल रूम तैयार किया जाना है। यह तीन मंजिला इमारत होगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर लीं गई हैं, जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा।
- तरुण प्रकाश, मंडल रेल प्रबंधक
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