तेजी से आतंकियों का बेस कैंप बनता जा रहा अमरोहा, खुफिया एजेंसियों की पैनी निगहबानी
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दिल्ली के नजदीक होने की वजह से आतंकी संगठन मुरादाबाद मंडल को बेस कैंप की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। आतंकियों के इस पैंतरे से खुफिया एजेंसियां अंजान नहीं हैं। अमरोहा और संभल जिले के कुछ इलाकों को लेकर केंद्रीय एजेंसियां फिक्रमंद हैं। अमरोहा में स्पेशल सेल खोलने के बाद भी आईबी आतंकी संगठनों के स्लीपिंग मूडयूल्स नेटवर्क को ध्वस्त करने में नाकाम है। स्थानीय खुफिया तंत्र की नाकामी एजेंसियों के काम को और भी कठिन बना रही है। आतंकी घटनाओं में लगातार जुड़ रहे मंडल के नाम से स्थानीय खुफिया तंत्र के साथ ही पुलिस की चौकसी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद केंद्रीय एजेंसियों का रुख मंडल की ओर हुआ था। तब संभल में एजेंसियों ने कई स्थानों पर छापामारी की थी। तभी से लापता बताए जा रहे संभल के एक युवक के बारे में एजेंसियों का कहना है कि गायब होने के बाद आखिरी बार उसे पीओके में देखा गया था। 23 नवंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद की कचहरियों में सीरियल ब्लास्ट हुआ तो फिर से केंद्रीय एजेंसियों ने मंडल का रुख किया। इस बार एजेंसियों ने अमरोहा में एक मदरसे पर छापा मारा।
खुलासा हुआ कि कचहरी सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड हूजी का यूपी कमांडर खालिद मुजाहिद अमरोहा के इसी मदरसे में रहकर पढ़ा था। इससे पहले मार्च 2006 में बनारस के संकटमोचन मंदिर में हुए ब्लास्ट में जब 18 लोगों की मौत हुई तो भी एजेंसियों की तलाश अमरोहा पहुंचकर ही खत्म हुई। इस ब्लास्ट में यूपी एसटीएफ ने अमरोहा के मोहम्मद शाद और रिजवान को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने बुधवार को अमरोहा में छापा मारकर मोहल्ला मुल्लाना से मुफ्ती सुहैल और उसके साथियों रईस व सईद निवासी सैदपुर इम्मा और इरशाद निवासी पचदरा को गिरफ्तार किया था। अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता जब दिल्ली से पकड़े गए जम्मू-कश्मीर के दो आतंकियों परवेज राशिद और जमशेद का नाता भी अमरोहा से उजागर हुआ था।
परवेज राशिद ने अमरोहा से ही बीटेक किया था और इनके कब्जे से जो पिस्टल पकड़ी गई थी वह अमरोहा के ही एक ठेकेदार की थी। इससे पहले वर्ष 2007 में अमरोहा के गांव रजबपुर की महिला पाकीजा खातून को एजेंसियों ने पाकिस्तान से लौटते समय वाघा बार्डर पर जाली करेंसी के साथ गिरफ्तार किया था। वह जूतों के डिब्बों में छुपाकर जाली करेंसी भारत ला रही थी। 15 दिसंबर 2015 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने संभल के दीपा सराय से अल कायदा का इंडिया चीफ बताकर मोहम्मद आसिफ को गिरफ्तार किया था। संभल का ही जफर मसूद भी उसके मददगार के तौर पर पकड़ा गया था। चार साल पहले मुरादाबाद में एकता विहार कालोनी से मेरठ पीएसी कांड का वांटेड सलीम पतला पकड़ा गया। वह 20 साल से पहचान छुपाकर एकता विहार में रह रहा था। पहचान छुपाकर रह रहे फरहान को भी सालभर पहले मुगलपुरा से पकड़ा गया था।