Moradabad: जिगर मुरादाबादी की याद में 'जिगर लिट फेस्ट' का आयोजन, अभिनेता सचिन पिलगांवकर हुए शामिल
मुख्य वक्ता के रूप में सचिन पिलगांवकर शनिवार को पंचायत भवन में आयोजित जिगर मुरादाबादी की याद में चल रहे जिगर लिट फेस्ट की परिचर्चा में शामिल हुए। उन्होंने फिल्मों की भाषाएं हिंदू और उर्दू प्रयोग और जिगर मुरादाबाद से जुड़ी यादों पर चर्चा की।
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सलाम..आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। मुंबई में मेरी वेब सीरीज की शूटिंग चल रही है, लेकिन मेरी दिली ख्वाहिश थी कि मैं मुरादाबाद आऊं। दो दिन का समय निकालकर मैं यहां सिर्फ मोहब्बत की वजह से आया हूं। मेरा यहां से रिश्ता मेरे उस्ताद की वजह से है। क्योंकि मेरे उस्ताद के उस्ताद जिगर मुरादाबादी हैं। मैं चाहता हूं कि मुरादाबाद में आयोजित हुआ जिगर लिटफेस्ट देश के कोने-कोने में आयोजित किया जाए। ये बातें बॉलीवुड अभिनेता सचिन पिलगांवकर ने कहीं। मुख्य वक्ता के रूप में सचिन शनिवार को पंचायत भवन में आयोजित जिगर मुरादाबादी की याद में चल रहे जिगर लिट फेस्ट की परिचर्चा में बोल रहे थे। उन्होंने फिल्मों की भाषाएं हिंदू और उर्दू प्रयोग और जिगर मुरादाबाद सेजुड़ी यादों पर चर्चा की।
सचिन पिलगांवकर ने बताया कि फिल्मों में शुरुआती दौर में हिंदी को प्राथमिकता दी जाती थी। जब नामचीन शायर फिल्मों से जुड़ने लगे तो उर्दू का प्रयोग भी चलन में आया है। उन्होंने अपनी बात यह इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिये, इक आग का दरिया है और कूद के जाना शेर के साथ शुरू की। जिगर मुरादाबादी का मैं प्रशंसक हूं और यही वजह कि आज में आप लोगों के बीच मुरादाबाद में बैठकर उन पर चर्चा कर रहा हूं। मेरे उस्ताद मजरूह सुल्तानपुरी से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं उन्हें अब्बा कहा करता था। वह भी जिगर मुरादाबादी को अपना गुरु मानते थे। उनके शेर और गजल की गहराई के कारण ही जिगर और गालिब को जोड़ा जाता है।
उन्होंने कहा कि भाषा हमेशा जोड़ने का काम करती है। बॉलीवुड में पहले भाषा पर विशेष रूप काम होता था। यह अंतर आपको आज के पुराने गानों को सुनने से समझ में आ जाएगा। आज के बॉलीवुड में भाषा की अहमियत के नाम पर आपको चार बोतल वोदका आदि गीत सुनने को मिलते हैं। गंदी-गंदी बात.. जैसे गीत बन रहे हैं। क्या यह लोगों के दिल में जगह बना पाएंगे। अभी कुछ वर्ष पहले बना गीत मोह मोह के धागे खूब हिट हुआ। इतना अच्छा गीत था जो बनाया गया और युवाओं ने खूब पसंद किया। आज भी अच्छे शब्दों का प्रयोग कर दिल को छू लेने वाले गीत लिखने वाले गीतकार हैं, पर लोगों का मिजाज बदल रहा है। हम सभी को भाषा पर काम करने की जरूरत है।
ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी को किया याद
सचिन पिलगांवकर ने ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी को याद करते हुए कहा कि मैं उर्दू भाषा को जितना सीख पाया हूं, वह सिर्फ मीना आपा की वजह से है। मैं 9 वर्ष का था जब उन्होंने मेरे माता-पिता से मुझे उर्दू सिखाने के लिए कहा था। मैं उनके घर उर्दू सीखने के लिए जाया करता था। पहले एक घंटा वह मेरे साथ टेबल टेनिस खेलती थीं और फिर एक घंटा उर्दू सिखाती थीं। पूछने पर कहती थीं कि तुम भविष्य में बॉलीवुड में बहुत नाम करोगे, इसीलिए तुम्हें उर्दू आना बहुत जरूरी है। तुम एक दिन मुझे याद करोगे। आज मैं कहता हूं कि उनके द्वारा एक दिन कही गई यह बात मैं हर दिन याद करता हूं।
मंच पर उनके साथ मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, डीआईजी शलभ माथुर रहे। संचालन आयोजक नजर बिजनौरी ने किया। आभार अनुज सिंह ने जताया। इस दौरान हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग अग्रवाल, सर्वेश गुप्ता, कशिश वारसी, शिवेंद्र जैन आदि मौजूद रहे। इससे पहले गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। एक के बाद एक सुरीली प्रस्तुतियों से प्रतिभागियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। विजेताओं को रविवार को होने वाले समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
यूट्यूब दे रहा है प्रतिभाओं को मंच: रानी इंद्राणी शर्मा
बॉलीवुड सिंगर रानी इंद्राणी शर्मा ने कहा कि प्रतिभा को कोई नहीं रोक सकता है। यूट्यूब एक ऐसा माध्यम है कि जहां टैलेंट को आसानी से मंच मिल जाता है। आजकल के युवा अपने टैलेंट के दम पर यूट्यूब के माध्यम से देश ही नहीं बल्कि दुनिया में नाम कमा रहे हैं। इसीलिए यदि किसी में टैलेंट है तो उसे छिपाने या दबाने के बजाय निखारने का प्रयास करना चाहिए।