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बदलते मौसम में जरा सी लापरवाही, सेहत पर पड़ सकती है भारी
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संभल। बदलते मौसम में जरा सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। अमूमन बारिश के मौसम में संक्रामक बीमारियां फैल जाती हैं। बीमारियां पैर न पसार लें, इसलिए अधिक सावधानी बरतनी होगी।
फिजिशियन डा. प्रवेंद्र सिंह बताते हैं कि बारिश के मौसम में ज्यादातर वायरल फीवर, बदहजमी, पेचिश, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, पीलिया, फोड़े-फुंसी आदि होने का खतरा अधिक रहता है। बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है। आम तौर पर गंदगी और जलभराव के कारण मच्छर तेजी के साथ पनपते हैं, इससे मलेरिया और डेेंगू का खतरा अधिक बढ़ जाता है। फिजिशियन डा. मोहित वर्मा ने बताया कि डेंगू होने की स्थिति में तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, जोड़ों और मांसपेशियों में ऐंठन, त्वचा पर चक्कते उभरना, शारीरिक कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए ऐसा दिखने पर तत्काल डाक्टर से परामर्श लें।
यह बरतें सावधानियां
- गमलों को अच्छी तरह से साफ रखें।
- घर में पानी एकत्र न होने दें।
- शरीर पर पूरे कपड़े पहनें।
- आसपास की सफाई पर ध्यान दें।
- मच्छरदानी लगाकर सोएं।
- साफ पानी पिएं, किसी भी हालत में वसा भोजन न खाएं।
- दस्त आदि होने पर ओआरएस का घोल लेना शुरू कर दें।
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फिजिशियन डा. प्रवेंद्र सिंह बताते हैं कि बारिश के मौसम में ज्यादातर वायरल फीवर, बदहजमी, पेचिश, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, पीलिया, फोड़े-फुंसी आदि होने का खतरा अधिक रहता है। बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है। आम तौर पर गंदगी और जलभराव के कारण मच्छर तेजी के साथ पनपते हैं, इससे मलेरिया और डेेंगू का खतरा अधिक बढ़ जाता है। फिजिशियन डा. मोहित वर्मा ने बताया कि डेंगू होने की स्थिति में तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, जोड़ों और मांसपेशियों में ऐंठन, त्वचा पर चक्कते उभरना, शारीरिक कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए ऐसा दिखने पर तत्काल डाक्टर से परामर्श लें।
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यह बरतें सावधानियां
- गमलों को अच्छी तरह से साफ रखें।
- घर में पानी एकत्र न होने दें।
- शरीर पर पूरे कपड़े पहनें।
- आसपास की सफाई पर ध्यान दें।
- मच्छरदानी लगाकर सोएं।
- साफ पानी पिएं, किसी भी हालत में वसा भोजन न खाएं।
- दस्त आदि होने पर ओआरएस का घोल लेना शुरू कर दें।