सियासी रसूख में घटाई तड़ीपार की अवधि

Moradabad Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
मुरादाबाद। गुंडों पर लगाम कसने के लिए बनी नियमावली भी सियासी दबाव में कंपकंपा रही है। समाज में आतंक फैलाने वाले बदमाशों को अब तक छह माह के लिए जिला बदर किया जाता था लेकिन एक राज्यमंत्री के दबाव में इसे घटाकर तीन माह कर दिया गया। लेकिन इतने समय का भी पालन नहीं हो पा रहा है।
वाकई सरकारी मशीनरी ने सियासत के आगे घुटने टेक दिए हैं। जिन बदमाशों के ऊपर पांच से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इलाके में आतंक है। गिरफ्तारी को कई दफा दबिश गई, आज वही पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता कहे जा रहे हैं। जी हां गुंडा एक्ट के तहत आने वाली रिपोर्ट पर जो जनप्रतिनिधियों की चिट्ठियां लग रही हैं उनमें इन्हें शरीफ बताया जा रहा है। दबाव में प्रशासन भी केस वापस ले लेता है। सबसे सनसनीखेज मामला तो जिला बदर की अवधि कम करने का है। आमतौर पर जिलाधिकारी या एडीएम की अदालत से बदमाशों को छह माह के लिए जिला बदर किया जाता है। हालांकि गुंडा एक्ट की धारा 3 के अंतर्गत जिला बदर करने की अधिकतम अवधि छह माह है। अदालत इससे कम समय के लिए भी तड़ीपार कर सकती है। लेकिन अगर पुराने मुकदमों पर गौर करेंगे तो ऐसा कोई मामला नहीं मिलेगा जिसमें छह माह से कम के लिए तड़ीपार किया गया हो। करीब दस दिन पहले एक राज्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों से कलेक्ट्रेट में कहा था कि जिला बदर की अवधि तीन माह की जाए। वह जिस बदमाश की सिफारिश लेकर आए थे उसकी अवधि भी घटाकर तीन माह ही कर दी गई थी।

एक महीने में 28 जिला बदर
मुरादाबाद। एडीएम सिटी और एडीएम प्रशासन की अदालत से 28 बदमाशों को जिला बदर घोषित किया गया है। इनमें तीन माह के लिए तड़ीपार होने वाले बदमाशों की संख्या भी दस है। सभी बदमाशों के बारे में कोतवाली, मझोला, सिविल लाइंस, कटघर, नागफनी और गलशहीद पुलिस से रिपोर्ट भेजी गई थी।


सोलह फाइलों पर माननीयों की चिट्ठी
मुरादाबाद। गुंडा एक्ट के लिए डीएम के पास पहुंचने वाली फाइल पर माननीयों की सिफारिशी चिट्ठियां भी खूब लग रही हैं। सोलह मामलों में पत्र लिखे गए हैं। जिसमें बदमाशों की खुले तौर पर पैरवी की गई है। थानों में दर्ज मुकदमों को झूठा बताया गया है।



किस पर लगती है गुंडा एक्ट
मुरादाबाद। जो व्यक्ति किसी गिरोह से जुड़ा हो। सदस्य हो या फिर सरगना। दो समुदायों के बीच झगड़ा कराकर शांति को खतरा बने। लड़कियों से छेड़छाड़ के मामले दर्ज हों। समाज में आतंक हो। ऐसे सभी बदमाशों के खिलाफ थाना पुलिस जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजती है। जिसमें उसके खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा विवरण होता है।


कागजी आंकड़े पेश होते समीक्षा में
मुरादाबाद। जब प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी समीक्षा करते हैं तो गुंडा एक्ट को लेकर भी रिपोर्ट ली जाती है। प्रशासन अगर टारगेट में पीछे रहा तो शासन स्तर से चेतावनी मिलती है और स्थानीय स्तर पर सियासी दबाव भी रहता है।



चेक किए जाएंगे सभी जिला बदर
मुरादाबाद। जिलाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि सभी जिला बदर बदमाशों को चेक किया जाएगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि तड़ीपार अपराधी अपने घर पर ही हो। अगर कोई पकड़ा जाएगा तो कार्रवाई होगी।

Spotlight

Most Read

Pilibhit

पारवलूम इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

पारवलूम इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

21 जनवरी 2018

Related Videos

यूपी के इस शहर में घुस आया तेंदुआ

मुरादाबाद से लगे अगवानपुर में एक तेंदुए के घुस आने से लोगों में दहशत फैल गई।

19 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper